बुधवार, सितम्बर 23, 2026

फर्टिलाइज़र मैनेजमेंट सिस्टम डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए भारत में सब्सिडी और उर्वरक आपूर्ति की नई व्यवस्था

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फर्टिलाइज़र मैनेजमेंट

पीआईबी के अनुसार, इंटीग्रेटेड फर्टिलाइज़र मैनेजमेंट सिस्टम (iFMS) के जरिए भारत में उर्वरक आपूर्ति, किसानों के डेटा और सब्सिडी के डिजिटल प्रबंधन को नई दिशा दी जा रही है।

इंटीग्रेटेड फर्टिलाइज़र मैनेजमेंट सिस्टम (iFMS) क्या है?

इंटीग्रेटेड फर्टिलाइज़र मैनेजमेंट सिस्टम (iFMS) नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर द्वारा विकसित एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो 14 करोड़ से अधिक आधार-लिंक्ड उर्वरक खरीदारों और 2.5 लाख से ज़्यादा खुदरा विक्रेताओं को जोड़ता है। यह उर्वरक आपूर्ति, किसानों के डेटा और सब्सिडी बिलों के इलेक्ट्रॉनिक प्रसंस्करण को एक जगह लाता है।

मुख्य बातें

  • इंटीग्रेटेड फर्टिलाइज़र मैनेजमेंट सिस्टम (iFMS) को नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) ने विकसित किया है।
  • यह सिस्टम 14 करोड़ से अधिक आधार-लिंक्ड उर्वरक खरीदारों और 2.5 लाख से ज्यादा खुदरा विक्रेताओं को कवर करता है।
  • 1 जनवरी 2026 को सब्सिडी बिलों के इलेक्ट्रॉनिक प्रसंस्करण और PFMS/e-Bill सिस्टम की शुरुआत की गई।
  • वाहन लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम (VLTS) के जरिए आपूर्ति श्रृंखला में उर्वरक के आवागमन की डिजिटल निगरानी की जा रही है।

भारत में फर्टिलाइज़र मैनेजमेंट का डिजिटल आधार, ‘इंटीग्रेटेड फर्टिलाइज़र मैनेजमेंट सिस्टम’ (iFMS) अब एक नए और उन्नत दौर में प्रवेश कर चुका है। पीआईबी के अनुसार, इस डिजिटल पहल का मुख्य उद्देश्य देश में उर्वरक की उपलब्धता में सुधार करना, पारदर्शिता बढ़ाना और सप्लाई चेन की अधिक असरदार व डेटा-आधारित निगरानी को संभव बनाना है। राष्ट्रीय इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) द्वारा उर्वरक विभाग के लिए विकसित यह तकनीकी मंच उत्पादन, आयात, आवागमन, स्टॉक, खुदरा बिक्री और सब्सिडी प्रोसेसिंग जैसे प्रमुख चरणों को आपस में जोड़ता है। आज यह राष्ट्रीय स्तर पर 14 करोड़ से ज़्यादा आधार-लिंक्ड खरीदारों और ढाई लाख से अधिक खुदरा विक्रेताओं के साथ सालाना लगभग 7 करोड़ मीट्रिक टन उर्वरक बिक्री के लेन-देन को संभाल रहा है।

फर्टिलाइज़र मैनेजमेंट में डेटा एनालिटिक्स और डैशबोर्ड की भूमिका

हाल के वर्षों में उर्वरक विभाग ने फर्टिलाइज़र मैनेजमेंट के दायरे को केवल ट्रांज़ैक्शन रिकॉर्ड करने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे एक व्यापक इंटीग्रेटेड मॉनिटरिंग और डिसीजन मेकिंग प्लेटफॉर्म बना दिया है। अधिकारियों के लिए नए डैशबोर्ड और एनालिटिकल टूल तैयार किए गए हैं, जो उत्पादन, आयात, डिस्पैच और स्टॉक की वास्तविक जानकारी एक साथ प्रदान करते हैं। इन उन्नत उपकरणों की मदद से राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर असामान्य ट्रेंड्स का शुरुआती दौर में ही पता लगाया जा सकता है। इसके अलावा, किसानों की श्रेणियों, भूमि के मालिकाना हक, फसलों और जिलों के आधार पर उर्वरक खरीद की गहराई से जांच करना भी संभव हो गया है।

किसान डेटा और एग्रीस्टैक के साथ एकीकरण

डेटा-आधारित उर्वरक प्रबंधन की दिशा में एक बड़ा कदम iFMS को राज्यों के किसान, भूमि और फसल डेटाबेस के साथ जोड़ना रहा है। हरियाणा में ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ (MFMB) के साथ एकीकरण और इसके बाद एग्रीस्टैक के साथ किए गए कार्यों ने उर्वरक लेन-देन को कृषि संबंधी जानकारियों से जोड़ने का बेहतरीन मार्ग प्रशस्त किया है। इन अनुभवों से खाद की जरूरतों और खपत की वास्तविक समझ विकसित हुई है। इसके आधार पर उर्वरक बिक्री के लिए एक नया फ्रेमवर्क तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से मोबाइल ऐप-आधारित बुकिंग प्रणाली को PoS इकोसिस्टम के साथ एकीकृत किया जा रहा है।

उर्वरक आवागमन और इलेक्ट्रॉनिक सब्सिडी प्रोसेसिंग

आसानी से और पारदर्शी तरीके से उर्वरक पहुंचाने के लिए ‘वाहन लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम’ (VLTS) के जरिए डिजिटल निगरानी को और मजबूत किया गया है। इससे परिवहन के दौरान फर्टिलाइज़र खेपों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग होती है और किसी भी प्रकार की देरी या असामान्य आवागमन का तुरंत पता लगाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, 1 जनवरी 2026 को सब्सिडी बिलों के इलेक्ट्रॉनिक प्रसंस्करण और PFMS/e-Bill प्रक्रियाओं की शुरुआत की गई है। इस कार्यप्रवाह के डिजिटलीकरण से मैनुअल दखल कम हुआ है, ट्रेसेबिलिटी में सुधार हुआ है और सब्सिडी दावों के भुगतान की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से हो रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न? iFMS क्या है और इसे किसने विकसित किया है?
उत्तर। iFMS (इंटीग्रेटेड फर्टिलाइज़र मैनेजमेंट सिस्टम) भारत में उर्वरक आपूर्ति, बिक्री और सब्सिडी के प्रबंधन के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) ने उर्वरक विभाग के लिए विकसित किया है।

प्रश्न? फर्टिलाइज़र मैनेजमेंट में एग्रीस्टैक का क्या उपयोग है?
उत्तर। एग्रीस्टैक और अन्य किसान डेटाबेस के एकीकरण से किसानों की भूमि और फसल संबंधी जानकारी का सत्यापन करके उन्हें उनकी वास्तविक आवश्यकता के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

अभिषेक सिंह
अभिषेक सिंह
अभिषेक सिंह आज पत्रिका में समाचार एवं व्यापार संपादक हैं। वे अर्थव्यवस्था, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), बैंकिंग, शेयर बाजार, सरकारी योजनाओं, रोज़गार और भर्ती से जुड़ी खबरों तथा पाठकों के काम आने वाली व्यावहारिक जानकारी (कैसे करें/स्टेप-बाय-स्टेप गाइड) की रिपोर्टिंग और संपादन करते हैं। वे सुनिश्चित करते हैं कि हर आँकड़ा, तिथि और प्रक्रिया आधिकारिक स्रोत से सत्यापित हो और लेख में मूल विज्ञप्ति या पोर्टल का लिंक दिया जाए। किसी गलती की सूचना के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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