
प्रधानमंत्री स्मृति चिन्ह ई-नीलामी 2026 के आठवें संस्करण में देश भर की कलाकृतियों संग गुजरात की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पेश की गई है।
मुख्य बातें
- ई-नीलामी 2026 के आठवें संस्करण में कुल 1,498 स्मृति चिन्ह शामिल किए गए हैं।
- नीलामी प्रक्रिया 17 सितंबर 2026 से आधिकारिक वेब पोर्टल पर शुरू हुई है।
- नीलामी से प्राप्त राशि का उपयोग नमामि गंगे राष्ट्रीय मिशन के लिए किया जाएगा।
- जनवरी 2019 से अब तक इस पहल के जरिए 50 करोड़ रुपये से अधिक जुटाए जा चुके हैं।
- संस्कृति मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा (NGMA) इसका आयोजन कर रही है।
ई-नीलामी 2026 के आठवें संस्करण की शुरुआत के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिले 1,498 उपहारों की ऑनलाइन बिक्री की प्रक्रिया जारी है। संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित इस नीलामी में देश की कलात्मक परंपराओं, पारंपरिक शिल्प, आध्यात्मिक प्रतीकों और खेल जगत की उपलब्धियों से जुड़े स्मृति चिन्ह रखे गए हैं। इस बार की प्रदर्शनी में गुजरात की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आधुनिक विकास यात्रा को दर्शाने वाली वस्तुओं को विशेष स्थान मिला है।
ई-नीलामी 2026 क्या है और इसमें क्या खास है?
ई-नीलामी 2026 में भारत के प्रधानमंत्री को देश-विदेश के विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान मिले स्मृति चिन्हों की ऑनलाइन बोली लगाई जा रही है। इस सार्वजनिक प्रक्रिया में कोई भी भारतीय नागरिक या संस्थान भाग लेकर आधिकारिक वेबसाइट से अपनी पसंद की कलाकृति खरीद सकता है। बिक्री से मिलने वाला पूरा पैसा नमामि गंगे कार्यक्रम को दिया जाता है।
गुजरात की सांस्कृतिक और आधुनिक उपलब्धियों का प्रदर्शन
पीआईबी के अनुसार, इस वर्ष के संग्रह में गुजरात के ऐतिहासिक धरोहरों से लेकर तकनीकी प्रगति तक को समाहित किया गया है। संग्रह में वडनगर स्थित 17वीं शताब्दी के हटकेश्वर महादेव मंदिर का स्थापत्य मॉडल शामिल है, जिसमें रामायण और महाभारत से जुड़ी नक्काशी की गई है। इसके अतिरिक्त, पारंपरिक माता-नी-पछेडी वस्त्र चित्रकला भी प्रदर्शित की गई है, जो जीवन चक्र और समृद्धि के संबंध को दर्शाती है।
मध्य गुजरात के राठवा, भील और भीलला जनजातीय समुदायों से जुड़ी पिथोरा कलाकृतियां भी नीलामी का हिस्सा हैं। आधुनिक भारत की झलक पेश करते हुए मोढेरा सूर्य मंदिर के उत्कीर्णित कांच के साथ बनाई गई भारत की पहली सोलर टाइल भी इस संग्रह में रखी गई है। खेलों के क्षेत्र से टेबल टेनिस खिलाड़ी मानव ठक्कर द्वारा भेंट की गई खेल सामग्री और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की सेमीकंडक्टर पट्टिका ‘चरखा से चिप्स’ भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
नीलामी में शामिल मुख्य वस्तुएं और ऐतिहासिक प्रतीक
संग्रह में गुजरात और देश के अन्य हिस्सों की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक धरोहरों को दर्शाने वाली कई अन्य वस्तुएं भी रखी गई हैं:
- सोमनाथ मंदिर, अंबाजी मंदिर और द्वारकाधीश जी की विभिन्न प्रतिमाएं।
- पारंपरिक भुजोड़ी शॉल और कच्छ की प्रसिद्ध लिप्पन कलाकृतियां।
- अडालज की वाव (बावड़ी) की लकड़ी से तैयार बहुपरत स्थापत्य प्रतिकृति।
- राजकोट स्थित ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) का प्रतिकृति मॉडल।
- विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले एथलीटों के स्मृति चिन्ह।
नमामि गंगे मिशन के लिए जुटाए गए 50 करोड़ रुपये
संस्कृति मंत्रालय नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा (NGMA) के माध्यम से इस पूरी प्रक्रिया का संचालन कर रहा है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, जनवरी 2019 में शुरू की गई इस पहल के तहत अब तक आयोजित पिछले सात संस्करणों के जरिए 50 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई जा चुकी है।
नीलामी से प्राप्त पूरी धनराशि गंगा नदी और उसके पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण, पुनरुद्धार तथा सफाई के लिए संचालित ‘नमामि गंगे’ राष्ट्रीय मिशन को समर्पित की जाती है। यह पहल सांस्कृतिक संरक्षण को देश के सबसे बड़े पर्यावरणीय अभियानों में से एक से सीधे जोड़ती है।
इसका असर: आम नागरिकों के लिए योगदान का अवसर
सामान्य तौर पर सरकारी उपहार और स्मृति चिन्ह अभिलेखागारों या संग्रहालयों के स्टोर रूम तक सीमित रह जाते हैं। हालांकि इस व्यवस्था के जरिए आम नागरिकों, कला प्रेमियों और निजी संस्थानों को प्रधानमंत्री को मिले उपहारों को अपने संग्रह में शामिल करने का पारदर्शी अवसर मिलता है। इससे न केवल ऐतिहासिक और जनजातीय कलाओं का सम्मान बढ़ता है, बल्कि गंगा संरक्षण जैसे राष्ट्रीय कार्य में जनभागीदारी भी सुनिश्चित होती है।
ई-नीलामी 2026 में भाग कैसे लें?
प्रधानमंत्री स्मृति चिन्ह ई-नीलामी 2026 में भाग लेने की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी रखी गई है। इच्छुक नागरिक और कला संग्रहकर्ता आधिकारिक वेब पोर्टल (pmmementos.gov.in) पर जाकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। पोर्टल पर हर स्मृति चिन्ह की शुरुआती कीमत, उसका विस्तृत इतिहास और तस्वीरें उपलब्ध कराई गई हैं। उपयोगकर्ता अपनी पसंद की वस्तु पर निर्धारित तिथि तक ऑनलाइन बोली लगा सकते हैं। उच्चतम बोली लगाने वाले व्यक्ति को वस्तु सौंप दी जाएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: ई-नीलामी 2026 की आधिकारिक वेबसाइट क्या है?
उत्तर: इस नीलामी में भाग लेने के लिए आधिकारिक वेब पोर्टल pmmementos.gov.in पर जाना होगा।
प्रश्न: इस नीलामी से मिलने वाला पैसा कहां खर्च किया जाता है?
उत्तर: नीलामी से प्राप्त होने वाली पूरी धनराशि गंगा नदी के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए संचालित ‘नमामि गंगे’ मिशन में दी जाती है।
प्रश्न: नीलामी का आयोजन किस संस्था द्वारा किया जा रहा है?
उत्तर: केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की देखरेख में नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा (NGMA) द्वारा इसका आयोजन किया जा रहा है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






