सोमवार, सितम्बर 21, 2026

कैट जम्मू बेंच के नए परिसर का उद्घाटन, डॉ. जितेंद्र सिंह बोले- निपटारे में देश में आगे

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कैट जम्मू बेंच

केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण की जम्मू बेंच के नए परिसर का बहु प्लाजा में उद्घाटन हुआ, जहां 41 हजार से अधिक सेवा मामलों में से अधिकांश का निपटारा किया जा चुका है।

मुख्य बातें

  • केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बहु प्लाजा, जम्मू में कैट के नए परिसर का उद्घाटन किया।
  • कैट में देशभर में 30 जून 2026 तक दर्ज 10,01,177 मामलों में से 9,32,723 मामलों का निपटारा हुआ।
  • जम्मू और श्रीनगर बेंच में आए कुल 41,389 मामलों में से अधिकांश का समाधान किया गया।
  • कैट जम्मू बेंच के फैसलों के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की दर मात्र 8 प्रतिशत रही।

कैट जम्मू बेंच के नए कार्यालय-सह-न्यायालय परिसर का उद्घाटन बहु प्लाजा, जम्मू में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की जम्मू और श्रीनगर बेंचों ने सरकारी कर्मचारियों के सेवा से जुड़े मुकदमों के निपटारे में देश भर में शीर्ष प्रदर्शन किया है। इस न्यायाधिकरण का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों की शिकायतों को बिना किसी देरी के और कम खर्च में सुलझाना है।

कैट जम्मू बेंच के नए परिसर का क्या महत्व है?

कैट जम्मू बेंच सरकारी कर्मचारियों के सेवा संबंधी विवादों को तेजी से सुलझाने वाला एक प्रमुख प्रशासनिक मंच है। बहु प्लाजा स्थित इसके नए परिसर से न्यायाधिकरण की कार्यक्षमता और बढ़ेगी। जम्मू और श्रीनगर की बेंचों ने स्थानांतरण तथा नए आवेदनों के तहत आए दर्जनों हजार मुकदमों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया है।

जम्मू स्थित नए न्यायालय परिसर के चालू होने से वादियों और वकीलों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि जम्मू और श्रीनगर की बेंचों के पास जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय से बड़ी संख्या में पुराने मामले स्थानांतरित होकर आए थे। इसके बावजूद न्यायाधिकरण ने नए और पुराने दोनों तरह के मुकदमों का समयबद्ध निस्तारण किया है।

आंकड़ों के अनुसार, 30 जून 2026 तक जम्मू एवं कश्मीर उच्च न्यायालय से स्थानांतरित होकर 20,984 मामले कैट के पास आए थे। इनमें से 18,392 मुकदमों का फैसला सुनाया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, न्यायाधिकरण के समक्ष सीधे 20,405 नए मामले दायर किए गए थे, जिनमें से 13,952 मामलों का निस्तारण कर दिया गया है। कुल मिलाकर जम्मू और श्रीनगर बेंचों ने 41,389 मामलों की सुनवाई की और उनका समाधान निकाला।

कैट जम्मू बेंच में कम अपील दर और मामलों की स्थिति

न्यायाधिकरण की कार्यशैली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके फैसलों के खिलाफ उच्च न्यायालय जाने वाले मुकदमों की संख्या बेहद कम है। आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि कैट जम्मू बेंच द्वारा दिए गए फैसलों में से केवल 8 प्रतिशत मामले ही जम्मू एवं कश्मीर उच्च न्यायालय में चुनौती के लिए गए।

केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि अपील की कम दर इस बात का प्रमाण है कि कर्मचारियों को न्यायाधिकरण के फैसलों पर पूरा भरोसा है। जब वादी न्यायाधिकरण के फैसले से संतुष्ट होते हैं, तो वे ऊपरी अदालतों का रुख नहीं करते। इससे अदालती कार्यवाही की लंबी प्रक्रिया से राहत मिलती है और समय तथा धन दोनों की बचत होती है।

जम्मू बेंच के बढ़ते काम को देखते हुए इसमें हाल के वर्षों में एक अतिरिक्त डिवीजन बेंच जोड़ी गई है। वर्तमान में इस बेंच में दो न्यायिक सदस्य और दो प्रशासनिक सदस्य कार्यरत हैं। इससे मुकदमों की सुनवाई की रफ्तार और तेज हुई है।

मामला दर्ज करने की बेहद कम फीस और किफायती न्याय

सरकारी कर्मचारियों के लिए प्रशासनिक न्यायाधिकरण में याचिका लगाना काफी आसान और किफायती बनाया गया है। कैट में मूल आवेदन (Original Application) दाखिल करने के लिए केवल 50 रुपये की मामूली फीस ली जाती है।

इसके अलावा अन्य कई प्रकार की याचिकाओं पर कोई शुल्क नहीं लगता। वादी निम्नलिखित आवेदनों के लिए बिना कोई अतिरिक्त फीस दिए अपनी बात रख सकते हैं:

  • विविध आवेदन (Miscellaneous Applications)
  • पुनर्विचार याचिकाएं (Review Petitions)
  • अवमानना याचिकाएं (Contempt Petitions)

कम फीस के इस ढांचे के कारण कोई भी कर्मचारी वित्तीय बाधाओं के बिना अपने अधिकारों के लिए गुहार लगा सकता है। यह व्यवस्था उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय पर पड़ने वाले मुकदमों के बोझ को कम करने में मददगार साबित हुई है।

देशभर में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण का प्रदर्शन

प्रशासनिक न्यायाधिकरण अधिनियम, 1985 के तहत स्थापित केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) का सफर पिछले चार दशकों में काफी विस्तृत रहा है। 1985 में स्थापित इस संस्था का प्राथमिक लक्ष्य कर्मचारियों के सेवा संबंधी विवादों जैसे पदोन्नति, पेंशन, वेतन विसंगति और अनुशासनात्मक मामलों का शीघ्र समाधान करना था।

कैट के अखिल भारतीय प्रदर्शन के आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • 30 जून 2026 तक देशभर में दर्ज कुल मामले: 10,01,177
  • अब तक निपटाए गए कुल मामले: 9,32,723
  • कुल निस्तारण दर: लगभग 93.16 प्रतिशत

देश भर में 93 प्रतिशत से अधिक का निपटारा दर यह दर्शाता है कि यह व्यवस्था न्यायिक ढांचे में कितनी प्रभावी साबित हुई है। हाल के वर्षों में जबलपुर, मुंबई, लखनऊ और गुवाहाटी में भी न्यायाधिकरण के लिए नए और स्वतंत्र बुनियादी ढांचे का निर्माण किया गया है।

यह भी जानें: कैट में डिजिटल पहल और ऑनलाइन सुविधाएं

न्यायिक प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कैट ने कई डिजिटल प्रौद्योगिकियों को अपनाया है। कोविड-19 महामारी के समय से शुरू हुआ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का इस्तेमाल अब नियमित अदालती काम का हिस्सा बन चुका है।

अदालत में आने वाले वादियों और अधिवक्ताओं के लिए निम्नलिखित आधुनिक ऑनलाइन सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं:

  • एडवांस केस इन्फॉर्मेशन सिस्टम (ACIS) द्वारा मुकदमों की जानकारी
  • डिजिटल माध्यम से मुकदमों की ई-फाइलिंग और ई-लिस्टिंग
  • एसएमएस और ईमेल के जरिए केस अपडेट के अलर्ट
  • ऑनलाइन कोर्ट फीस भुगतान और प्रमाणित प्रति की डिलीवरी
  • मोबाइल ऐप द्वारा केस स्टेटस देखने की सुविधा

इसके अलावा कैट अपने कर्मचारियों और अधिकारियों के कौशल विकास के लिए ‘मिशन कर्मयोगी’ प्लेटफॉर्म के जरिए ऑनलाइन प्रशिक्षण दे रहा है। इसमें विभिन्न सरकारी विभागों से प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारियों को न्यायिक प्रक्रियाओं की बारीकियां सिखाई जाती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: कैट क्या है और इसकी स्थापना कब हुई थी?
उत्तर: केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की स्थापना प्रशासनिक न्यायाधिकरण अधिनियम, 1985 के तहत हुई थी। इसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के सेवा मामलों को जल्दी और सस्ते में सुलझाना है।

प्रश्न: कैट में याचिका दाखिल करने की फीस कितनी है?
उत्तर: कैट में मूल आवेदन दायर करने की फीस 50 रुपये है। पुनर्विचार, अवमानना और विविध आवेदनों के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता।

प्रश्न: कैट जम्मू बेंच के नए परिसर का उद्घाटन किसने और कहां किया?
उत्तर: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बहु प्लाजा, जम्मू में कैट की जम्मू बेंच के नए कार्यालय-सह-न्यायालय परिसर का उद्घाटन किया।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक मामलों के संपादक हैं। वे संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही, सरकारी नीतियों, चुनाव, और भारत से जुड़ी बड़ी राष्ट्रीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्य-आधारित, संतुलित और स्रोत-सहित रिपोर्टिंग पर रहता है — हर लेख में वे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), संबंधित मंत्रालयों की विज्ञप्तियों और आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हैं। राय और विश्लेषण को वे समाचार से स्पष्ट रूप से अलग रखते हैं। सुझाव या तथ्य-सुधार के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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