
जापानी एजेंसी जेसीआर ने भारत की दीर्घकालिक रेटिंग ट्रिपल बी+ से बढ़ाकर ए- की और आउटलुक स्थिर रखा, कंट्री सीलिंग भी ‘ए’ पर पहुंची।
मुख्य बातें
- जापानी एजेंसी जेसीआर ने भारत की क्रेडिट रेटिंग ट्रिपल बी+ से बढ़ाकर ए- (A-) कर दी है।
- भारत की कंट्री सीलिंग को भी एक पायदान बढ़ाकर ‘ए’ श्रेणी में स्थान दिया गया है।
- वित्त वर्ष 2026 और वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही।
- राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2025 के 4.7 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2026 में 4.4 प्रतिशत दर्ज किया गया।
- पिछले एक वर्ष में एसएंडपी, मॉर्निंगस्टार डीबीआरएस और आरएंडआई जैसी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी रेटिंग बढ़ा चुकी हैं।
भारत की अंतरराष्ट्रीय आर्थिक साख को मजबूत करते हुए जापान की प्रमुख रेटिंग एजेंसी जेसीआर ने देश की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को एक पायदान बढ़ाकर ‘ए-‘ (A-) कर दिया है। वित्त मंत्रालय और पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) के अनुसार, जापानी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (JCR) ने भारत की दीर्घकालिक विदेशी मुद्रा और स्थानीय मुद्रा जारीकर्ता रेटिंग को ट्रिपल बी+ (BBB+) से अपग्रेड करके ए- किया है, साथ ही देश के आर्थिक परिदृश्य को ‘स्थिर’ बताया है। इसके अलावा एजेंसी ने भारत की कंट्री सीलिंग को भी बढ़ाकर ‘ए’ (A) कर दिया है। भारत सरकार ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मिले इस महत्वपूर्ण उन्नयन का स्वागत किया है।
कंट्री सीलिंग में इस तरह के सुधार से भारतीय निजी कंपनियों और सरकारी उपक्रमों के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों से कम ब्याज दरों पर पूंजी और कर्ज जुटाना काफी आसान हो जाएगा। क्रेडिट रेटिंग में हुआ यह सुधार वैश्विक निवेशकों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता और ऋण चुकाने की मजबूत क्षमता पर मुहर लगाता है।
सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग में सुधार के मुख्य आर्थिक कारण
जेसीआर द्वारा जारी आकलन के अनुसार, भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग में यह बढ़त देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि और विकास का आधार मजबूत करने में सरकारी नीतियों की प्रभावशीलता के कारण संभव हुई है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि वित्त वर्ष 2026 में भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत पर बेहद मजबूत रही। इसके अलावा, वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भी आर्थिक विकास की गति बनी रही और जीडीपी में 7.8 प्रतिशत की दर्ज की गई वृद्धि ने देश की आर्थिक मजबूती को साबित किया है।
एजेंसी ने विशेष रूप से उल्लेख किया है कि मजबूत निजी उपभोग और सरकार द्वारा सार्वजनिक निवेश में लगातार की जा रही वृद्धि ने भारतीय अर्थव्यवस्था को तेज गति प्रदान की है। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) के विस्तार और वस्तु एवं सेवा कर (GST) जैसे ढांचागत सुधारों ने देश की आर्थिक नींव को अभूतपूर्व मजबूती दी है, जिससे भारत में उत्पादकता और आर्थिक विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है।
राजकोषीय प्रबंधन और बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती
जापान की क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने भारत सरकार के बेहतर राजकोषीय प्रबंधन और व्यय की गुणवत्ता में आए सुधार की विशेष सराहना की है। जेसीआर के अनुसार, भारत सरकार ने बुनियादी ढांचे में पूंजीगत व्यय को उच्च स्तर पर बनाए रखते हुए भी राजकोषीय घाटे को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया है। सरकार का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2025 में 4.7 प्रतिशत था, जो वित्त वर्ष 2026 में घटकर 4.4 प्रतिशत के स्तर पर आ गया।
- जीडीपी वृद्धि दर: वित्त वर्ष 2026 और वित्त वर्ष 2027 की Q1 दोनों में 7.8% की शानदार विकास दर।
- राजकोषीय घाटा: वित्त वर्ष 2025 के 4.7% से सुधरकर वित्त वर्ष 2026 में 4.4% हुआ।
- कंट्री सीलिंग: एक पायदान बढ़कर ‘A’ श्रेणी में पहुंची, जिससे विदेशी कर्ज सस्ता होगा।
- बैंकिंग ढांचा: आईबीसी और रिजर्व बैंक की कड़ी निगरानी से बैंक संपत्तियों की गुणवत्ता में ऐतिहासिक सुधार।
- विदेशी मुद्रा भंडार: अल्पकालिक विदेशी कर्ज की तुलना में प्रचुर रिजर्व उपलब्ध, जिससे बाह्य झटकों से सुरक्षा।
वित्तीय प्रणाली के संदर्भ में, दिवाला और ऋण शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के प्रभावी कार्यान्वयन, बैंकों में सरकारी पूंजी निवेश और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मजबूत निगरानी व्यवस्था से बैंकिंग क्षेत्र की परिसंपत्ति गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है। कमर्शियल बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) दोनों की पूंजी पर्याप्तता और लाभप्रदता मजबूत स्थिति में बनी हुई है।
वैश्विक अनिश्चितता के दौर में सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग का महत्व
वर्तमान समय में जब पूरी दुनिया आर्थिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनावों और उच्च मुद्रास्फीति से जूझ रही है, तब भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग में यह अपग्रेड अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बाह्य क्षेत्र के मोर्चे पर, सेवा निर्यात से मिलने वाले अधिशेष के कारण भारत का चालू खाता घाटा पूरी तरह से नियंत्रित सीमा में है। देश के पास मौजूद प्रचुर विदेशी मुद्रा भंडार अल्पकालिक विदेशी ऋण से बहुत अधिक है, जो किसी भी बाह्य आर्थिक झटके से निपटने के लिए एक मजबूत सुरक्षा ढांचा (बफर) प्रदान करता है।
उल्लेखनीय है कि पिछले एक वर्ष के दौरान भारत की क्रेडिट रेटिंग में लगातार सुधार देखा गया है। इससे पहले मई 2025 में मॉर्निंगस्टार डीबीआरएस (Morningstar DBRS) ने भारत का दर्जा सुधारा था। इसके बाद अगस्त 2025 में अमेरिकी एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पूअर्स (S&P Global Ratings) और सितंबर 2025 में रेटिंग एंड इन्वेस्टमेंट इंफॉर्मेशन (R&I) जापान ने भी भारत की रेटिंग में अपग्रेड की घोषणा की थी। जेसीआर का यह हालिया कदम भारत के आर्थिक बुनियादी सिद्धांतों पर अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों के लगातार बढ़ते विश्वास को प्रदर्शित करता है।
क्या होती है सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग और आम लोगों पर इसका प्रभाव?
किसी भी देश की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग उस देश की सरकार की वित्तीय साख और उसके द्वारा लिए गए ऋण को समय पर चुकाने की क्षमता का एक स्वतंत्र मूल्यांकन होती है। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियां किसी देश की आर्थिक स्थिरता, जीडीपी वृद्धि, राजकोषीय घाटा, राजनीतिक स्थिरता और वित्तीय नीतियों का गहन अध्ययन करके यह रेटिंग तय करती हैं।
जब किसी देश की क्रेडिट रेटिंग सुधरती है, तो अंतरराष्ट्रीय निवेशक उस देश को निवेश के लिए सुरक्षित और आकर्षक मानने लगते हैं। इससे देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) बढ़ता है। भारतीय कंपनियों को विदेश से कम ब्याज दर पर पूंजी मिलती है, जिससे नए उद्योग स्थापित होते हैं, ढांचागत निर्माण तेज होता है और अंततः देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: जेसीआर ने भारत की रेटिंग में क्या बदलाव किया है?
उत्तर: जापानी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (JCR) ने भारत की दीर्घकालिक जारीकर्ता रेटिंग को ट्रिपल बी+ से बढ़ाकर ‘ए-‘ (A-) कर दिया है और आउटलुक को स्थिर रखा है।
प्रश्न: कंट्री सीलिंग में सुधार से भारतीय कंपनियों को क्या फायदा होगा?
उत्तर: कंट्री सीलिंग ‘ए’ होने से भारतीय कंपनियों के लिए वैश्विक बाजारों से कम ब्याज दरों और बेहतर शर्तों पर कर्ज जुटाना आसान हो जाएगा।
प्रश्न: वित्त वर्ष 2026 में भारत का राजकोषीय घाटा कितना रहा?
उत्तर: भारत का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2025 के 4.7 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2026 में 4.4 प्रतिशत पर आ गया है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






