
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ‘जिला निर्यात केंद्र’ पहल के तहत देश के 770 से अधिक जिलों को निर्यात नियोजन इकाइयों में बदला जा रहा है।
मुख्य बातें
- भारत का कुल वस्तु एवं सेवा निर्यात 2024-25 में 825.25 बिलियन डॉलर रहा, जो 2025-26 में बढ़कर 863.11 बिलियन डॉलर पहुंचने का अनुमान है।
- जनवरी 2026 तक जिला निर्यात केंद्र पहल देश के 770 से अधिक जिलों को अपने दायरे में ले चुकी है।
- मार्च 2026 तक 590 जिलों के लिए जिला निर्यात कार्य योजना (DEAP) के मसौदे तैयार किए गए, जिनमें से 249 को औपचारिक रूप से अपना लिया गया है।
- 1 जून 2026 से 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में परिणाम-उन्मुख और चरणबद्ध कार्यान्वयन शुरू किया गया है।
- एक्जिम बैंक के ‘ग्रिड’ (GRID) कार्यक्रम के तहत अनंतपुर, रायपुर, सोलन, तिरुप्पुर, कानपुर और कोल्हापुर का चयन किया गया है।
भारत सरकार की जिला निर्यात केंद्र (DEH) पहल देश के प्रत्येक जिले को अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निर्यात नियोजन का मुख्य केंद्र बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का कुल वस्तु एवं सेवा निर्यात वित्त वर्ष 2024-25 में 825.25 बिलियन अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, जिसके वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर अनुमानित 863.11 बिलियन अमेरिकी डॉलर होने की संभावना है। इस आर्थिक बढ़त को अधिक समावेशी और टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से प्रत्येक जिले की स्थानीय विशेषताओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों से जोड़ा जा रहा है।
पारंपरिक रूप से भारत की निर्यात गतिविधियां कुछ बड़े औद्योगिक नगरों और तटीय बंदरगाह शहरों तक ही सीमित थीं। छोटे शहरों, ग्रामीण इलाकों और दूरदराज के जिलों के पास उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद होने के बावजूद वे अंतरराष्ट्रीय व्यापार की मुख्यधारा से बाहर रहते थे। उदाहरण के तौर पर छत्तीसगढ़ के बस्तर का लोहा शिल्प, महाराष्ट्र के जलगांव का केला और मेघालय के संतरे जैसे अनूठे उत्पाद वैश्विक पहचान से वंचित थे। जिला निर्यात केंद्र मॉडल ने इस अंतर को पाटकर स्थानीय उत्पादकों के लिए नए रास्ते खोले हैं।
जिला निर्यात केंद्र और ओडीओपी योजना का विकास
इस पूरी रणनीति का आधार ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) कार्यक्रम है। ओडीओपी का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक जिले के एक विशिष्ट उत्पाद की पहचान, ब्रांडिंग और विपणन करना था। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के मार्गदर्शन में वाणिज्य विभाग ने इस विचार का विस्तार करते हुए जिला निर्यात केंद्र पहल की शुरुआत की। इसका उद्देश्य केवल उत्पाद का प्रचार करना ही नहीं, बल्कि संपूर्ण जिला स्तरीय निर्यात पारितंत्र को सशक्त बनाना है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 तक जिला निर्यात केंद्र पहल देश भर के 770 से अधिक जिलों तक अपनी पहुंच बना चुकी है। यह पहल किसी नई पृथक वित्तीय योजना के स्थान पर एक मजबूत समन्वय ढांचे के रूप में कार्य करती है। यह केंद्र और राज्य सरकारों की विभिन्न मौजूदा योजनाओं के बजट और संसाधनों का एकीकरण करके जमीनी स्तर पर विनिर्माण, रोजगार सृजन और व्यापारिक बाधाओं को दूर करने का कार्य कर रही है।
जिला निर्यात केंद्र की तीन स्तरीय संस्थागत संरचना
इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए तीन स्तरीय संस्थागत ढांचा तैयार किया गया है। केंद्रीय स्तर पर वाणिज्य विभाग नीतिगत दिशानिर्देश जारी करता है और डीजीएफटी इसके क्रियान्वयन व निगरानी की कमान संभालता है। राज्य स्तर पर ‘राज्य निर्यात संवर्धन समितियां’ (SEPC) विभिन्न अंतर-विभागीय समन्वय को संभालती हैं। वहीं जिला स्तर पर ‘जिला निर्यात संवर्धन समितियां’ (DEPC) का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता जिला प्रशासन द्वारा की जाती है।
डीईपीसी का प्राथमिक कार्य ‘जिला निर्यात कार्य योजना’ (DEAP) तैयार करना है। इसमें जिले के निर्यात योग्य उत्पादों और सेवाओं का मानचित्रीकरण, लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे का मूल्यांकन और व्यापारिक बाधाओं की पहचान शामिल है। मार्च 2026 तक देश के 590 जिलों के लिए डीईएपी के मसौदे तैयार किए जा चुके हैं, जिनमें से 249 जिलों ने इन्हें औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। जिला निर्यात केंद्र ढांचा स्थानीय उद्यमियों को वैश्विक बाजारों से सीधे जोड़ने में मदद कर रहा है।
विशिष्ट उत्पाद और जिला निर्यात केंद्र की मैपिंग
देश के विभिन्न हिस्सों से गुणवत्तापूर्ण वस्तुओं की पहचान कर उन्हें अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढाला जा रहा है। जिला निर्यात केंद्र पहल के तहत पहचाने गए कुछ प्रमुख उत्पाद इस प्रकार हैं:
- साबरकांठा (गुजरात): सिरेमिक, टाइलें और आलू उत्पाद
- अरावली (गुजरात): खनिज, कृषि-प्रसंस्करण उत्पाद, कांच और टाइलें
- जलगांव (महाराष्ट्र): जलगांव केला और प्रसिद्ध जलगांव भरित बैंगन
- आगर मालवा (मध्य प्रदेश): संतरा और संबंधित फल उत्पाद
- बस्तर (छत्तीसगढ़): बस्तर लोहे का शिल्प, चावल, ज्वार और मक्का
- जामतारा (झारखंड): बांस का शिल्प और काजू प्रसंस्करण
इन उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरने के लिए गुणवत्ता परीक्षण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और जीआई (भौगोलिक संकेत) टैगिंग की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। जिला निर्यात केंद्र की सहायता से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को सीधे विदेशी खरीदारों तक पहुंच मिल रही है।
डिजिटल लॉजिस्टिक्स और वैश्विक बाजारों तक पहुंच
ई-कॉमर्स और डिजिटल तकनीक ने निर्यात प्रक्रियाओं को सुगम और पारदर्शी बना दिया है। जिला निर्यात केंद्र कार्यक्रम के अंतर्गत एमेज़ॉन, शिपरॉकेट और डीएचएल जैसे वैश्विक ई-कॉमर्स व लॉजिस्टिक्स दिग्गजों के साथ समझौता किया गया है। इससे छोटे उद्यमियों को माल ढुलाई में विशेष छूट और सुलभ कूरियर सेवाएं प्राप्त हो रही हैं। इसके अतिरिक्त ‘डाक घर निर्यात केंद्र’ दूरदराज के क्षेत्रों से छोटे पार्सलों के सीमा पार प्रेषण के लिए सस्ते और सुलभ साधन प्रदान कर रहे हैं।
निर्यातकों की क्षमता निर्माण के लिए डीजीएफटी के क्षेत्रीय कार्यालयों द्वारा नियमित कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। इसमें भारतीय निर्यात क्रेडिट गारंटी निगम (ECGC), हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (EPCH), भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (FIEO), एमएसएमई मंत्रालय और एक्जिम बैंक की सक्रिय भागीदारी है। एक्जिम बैंक ने अपने ‘ग्रिड’ (GRID) कार्यक्रम के तहत छह विशेष जिलों—अनंतपुर, रायपुर, सोलन, तिरुप्पुर, कानपुर और कोल्हापुर—का चयन किया है। इसके अलावा 1 जून 2026 से 27 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में 24 डीजीएफटी क्षेत्रीय प्राधिकरणों के साथ एक परिणाम-उन्मुख और केंद्रित चरणबद्ध अभियान चलाया जा रहा है।
1 ट्रिलियन डॉलर निर्यात लक्ष्य और जिला निर्यात केंद्र
भारत सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य देश के कुल निर्यात को 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने में जिला निर्यात केंद्र एक रीढ़ की हड्डी की तरह कार्य कर रहा है। जब देश का प्रत्येक जिला अपनी अनूठी क्षमता के साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार नेटवर्क में योगदान देगा, तब आर्थिक विकास केवल कुछ महानगरों तक सीमित न रहकर पूरे देश में समान रूप से फैलेगा।
यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के संकल्प को धरातल पर उतारने का एक प्रत्यक्ष उदाहरण है। इससे न केवल विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ेगा बल्कि स्थानीय स्तर पर लाखों नए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। जिला निर्यात केंद्र के माध्यम से ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत अब सीधे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का अहम हिस्सा बन रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? जिला निर्यात केंद्र (DEH) पहल क्या है?
उत्तर। यह भारत सरकार की एक रणनीति है जो देश के प्रत्येक जिले को निर्यात नियोजन इकाई में बदलती है। इसके तहत स्थानीय उत्पादों की पहचान कर उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ा जाता है।
प्रश्न? क्या जिला निर्यात केंद्र कोई नई वित्तीय अनुदान योजना है?
उत्तर। नहीं, यह कोई पृथक वित्तीय योजना नहीं है, बल्कि केंद्र और राज्यों की मौजूदा योजनाओं, निधियों और संसाधनों का एकीकरण करके निर्यात बढ़ाने का एक समन्वय ढांचा है।
प्रश्न? जिला निर्यात कार्य योजना (DEAP) कौन तैयार करता है?
उत्तर। जिला स्तर पर गठित ‘जिला निर्यात संवर्धन समिति’ (DEPC) जिला निर्यात कार्य योजना तैयार करती है, जिसमें जिले के उत्पादों का मानचित्रीकरण और निर्यात बाधाओं को दूर करने के उपाय शामिल होते हैं।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






