सोमवार, अगस्त 31, 2026

एकादशी व्रत कैसे रखें? जानिए पूजा विधि, नियम और पारण की सही प्रक्रिया

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एकादशी व्रत

एकादशी व्रत रखने के मुख्य नियम, पूजा सामग्री, संपूर्ण विधि और पारण का सही समय तथा तरीका आसान शब्दों में जानें।

मुख्य बातें

  • एकादशी व्रत महीने में दो बार (शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष) भगवान विष्णु की साधना के लिए रखा जाता है।
  • इस व्रत में अन्न, विशेष रूप से चावल का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है।
  • व्रत का संकल्प दशमी तिथि की संध्या से ही नियमों का पालन शुरू करके लिया जाता है।
  • व्रत की पूर्णता द्वादशी तिथि में सही पारण मुहूर्त के दौरान व्रत खोलने पर होती है।

हिंदू धर्म और वैदिक परंपरा में एकादशी व्रत का विशेष आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व माना गया है। यह पवित्र व्रत भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित होता है और प्रत्येक चंद्र मास (महीने) में दो बार—एक बार शुक्ल पक्ष और एक बार कृष्ण पक्ष में आता है। शास्त्रों के अनुसार एकादशी व्रत रखने से साधक का मन, विचार और शरीर शुद्ध होता है। यदि आप भी पहली बार इस व्रत को रखने का विचार कर रहे हैं या इसकी सही शास्त्रीय विधि जानना चाहते हैं, तो यह विस्तृत लेख आपके सभी प्रश्नों का उत्तर देगा।

एकादशी व्रत का महत्व और मुख्य नियम

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी व्रत को सभी व्रतों में अत्यधिक प्रभावशाली माना जाता है। पूरे वर्ष में कुल 24 एकादशी तिथियां आती हैं (अधिकमास के वर्ष में 26)। प्रत्येक एकादशी का अपना अलग नाम और विशिष्ट कथा होती है, परंतु सभी में मुख्य उद्देश्य भगवान विष्णु का ध्यान और सात्विकता का पालन होता है।

यदि आप एकादशी व्रत का पालन कर रहे हैं, तो कुछ मूलभूत नियमों का ध्यान रखना अनिवार्य है:

  • अन्न त्याग: एकादशी के दिन गेहूँ, चावल, जौ, दालें और किसी भी प्रकार के भारी अनाज का सेवन नहीं किया जाता है।
  • चावल का निषेध: पारंपरिक मान्यताओं में एकादशी के दिन चावल खाना पूरी तरह वर्जित है। माना जाता है कि इस दिन चावल में जल तत्व की मात्रा अधिक होने से मन की चंचलता बढ़ती है।
  • सात्विक आचरण: इस दिन लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा या किसी भी तामसिक वस्तु से दूर रहना चाहिए। साथ ही निंदा, क्रोध और असत्य वचन से बचना चाहिए।
  • ब्रह्मचर्य का पालन: व्रत के दौरान शरीर और मन दोनों से पवित्रता और संयम बनाए रखना आवश्यक है।

एकादशी व्रत की आवश्यक पूजा सामग्री

पूजा शुरू करने से पहले निम्नलिखित सामग्री एकत्रित कर लें ताकि पूजन बिना किसी विघ्न के संपन्न हो सके:

  • भगवान विष्णु या लड्डू गोपाल की मूर्ति/चित्र
  • चौकी और उस पर बिछाने के लिए पीला कपड़ा
  • पीले फूल, तुलसी के पत्ते (तुलसी पत्र एकादशी से एक दिन पहले ही तोड़ लें)
  • चंदन, गोपी चंदन या रोली
  • धूप, अगरबत्ती और देसी घी का दीपक
  • फल (केला, सेब आदि) और पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल)
  • अक्षत के स्थान पर सफेद तिल (एकादशी में चावल या अक्षत नहीं चढ़ाया जाता)
  • एकादशी व्रत कथा की पुस्तक

एकादशी व्रत करने का चरण-दर-चरण तरीका

शास्त्रों में एकादशी व्रत की प्रक्रिया केवल एक दिन की न होकर तीन दिनों (दशमी, एकादशी और द्वादशी) तक फैली मानी जाती है। सही परिणाम और आत्मिक शांति के लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन करें:

  1. दशमी तिथि की संध्या: एकादशी से एक दिन पहले यानी दशमी को सूर्यास्त के बाद सात्विक भोजन करें। इस दिन शाम के बाद भारी भोजन या चावल न खाएं ताकि एकादशी के दिन पेट पूरी तरह स्वच्छ रहे।
  2. प्रातःकाल स्नान और संकल्प: एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें। स्वच्छ (संभव हो तो पीले) वस्त्र धारण करें। हाथ में जल, तिल और पुष्प लेकर भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें कि आप निष्ठापूर्वक यह व्रत करेंगे।
  3. भगवान विष्णु की पूजा: घर के मंदिर में चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें पंचामृत से स्नान कराएं, पीले वस्त्र या मौली अर्पित करें। इसके बाद चंदन लगाएं, पीले फूल और तुलसी पत्र चढ़ाएं।
  4. धूप-दीप और कथा पाठ: देसी घी का दीपक जलाएं। संबंधित एकादशी की व्रत कथा का पाठ करें या श्रद्धापूर्वक सुनें। ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का निरंतर जाप करते रहें।
  5. दिनभर का आचरण और फलाहार: यदि आप निर्जला व्रत रख रहे हैं तो जल ग्रहण न करें। यदि फलाहारी व्रत रख रहे हैं तो दोपहर के समय दूध, फल या साबूदाना ले सकते हैं। दिनभर मन में भगवान का ध्यान रखें।
  6. संध्या आरती: शाम के समय पुनः स्नान या हाथ-पैर धोकर भगवान विष्णु की आरती करें, भोग लगाएं और दीप प्रज्वलित करें।

एकादशी व्रत के दौरान क्या खाएं और क्या न खाएं

एकादशी व्रत में खान-पान का विशेष ध्यान रखा जाता है। नियम न टूटे, इसके लिए सही खाद्य पदार्थों की जानकारी होना ज़रूरी है:

क्या खा सकते हैं: ताजा फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा, सेंधा नमक, आलू, लौकी और शकरकंद। पानी और नारियल पानी का सेवन भी पर्याप्त मात्रा में किया जा सकता है।

क्या न खाएं: चावल, गेहूँ, मैदा, बेसन, सभी प्रकार की दालें, बैंगन, शलजम, लहसुन, प्याज, साधारण नमक, टेबल सॉल्ट और बासी भोजन।

एकादशी व्रत के पारण का सही तरीका

व्रत की समाप्ति को ‘पारण’ कहा जाता है। पारण हमेशा द्वादशी तिथि में ही किया जाता है। गलत समय पर पारण करने से व्रत का पूर्ण लाभ प्राप्त नहीं होता।

द्वादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु की सामान्य पूजा करें। इसके बाद गरीबों या ब्राह्मणों को यथाशक्ति दान दें। फिर शुभ पारण मुहूर्त (जो पंचांग में दिया गया हो) के भीतर ही सात्विक भोजन या तुलसी दल युक्त जल ग्रहण करके व्रत खोलें। ध्यान रखें कि पारण हरि वासर समय बीत जाने के बाद ही किया जाना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1: क्या बीमार या बुजुर्ग व्यक्ति भी एकादशी का व्रत रख सकते हैं?
उत्तर: हाँ, शास्त्रों में बीमार, वृद्ध या गर्भवती महिलाओं के लिए नियमों में छूट दी गई है। वे निर्जला या कठोर व्रत के स्थान पर केवल एक समय फलाहार, दूध या आवश्यक दवाइयों के साथ हल्का व्रत रख सकते हैं।

प्रश्न 2: क्या एकादशी व्रत में तुलसी पत्र तोड़ना चाहिए?
उत्तर: नहीं, एकादशी और रविवार के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित माना गया है। पूजा के लिए तुलसी पत्र हमेशा एकादशी से एक दिन पहले (दशमी को) ही तोड़कर रख लेने चाहिए।

प्रश्न 3: एकादशी के दिन चावल क्यों नहीं खाना चाहिए?
उत्तर: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन चावल में महर्षि मेधा का अंश माना जाता है। वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से इस दिन चंद्रमा के प्रभाव के कारण शरीर में जल तत्व का संतुलन बनाए रखने के लिए चावल का त्याग किया जाता है।

प्रश्न 4: क्या पहली बार एकादशी व्रत किसी भी महीने से शुरू किया जा सकता है?
उत्तर: आमतौर पर नए व्रत की शुरुआत उत्पन्ना एकादशी, देवउठनी एकादशी या मार्गशीर्ष/कार्तिक मास की एकादशी से करना अति शुभ माना जाता है, हालांकि आप किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी से भी शुरुआत कर सकते हैं।

यह जानकारी केवल सामान्य धार्मिक जागरूकता और सांस्कृतिक मान्यताओं पर आधारित है। यदि आप किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या या शारीरिक स्थिति से ग्रस्त हैं, तो कोई भी उपवास या आहार परिवर्तन करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

यह लेख आज पत्रिका की एक्सप्लेनर डेस्क द्वारा सामान्य जागरूकता के लिए तैयार किया गया है। नियम और प्रक्रियाएं समय-समय पर बदल सकती हैं — कृपया आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें। सुधार/सुझाव: corrections@aajpatrika.com

दीक्षा कुमारी
दीक्षा कुमारी
दीक्षा कुमारी आज पत्रिका की वरिष्ठ संपादक हैं और खेल, मनोरंजन, धर्म तथा लाइफस्टाइल कवरेज का नेतृत्व करती हैं।

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