
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री रामकृष्ण हेगड़े के जन्म शताब्दी समारोह में उनके योगदान और सुशासन के आदर्शों को याद किया।
मुख्य बातें
- उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने बेंगलुरु के विधान सौध में पूर्व मुख्यमंत्री रामकृष्ण हेगड़े की 100वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
- वर्ष 1985 के कर्नाटक पंचायत अधिनियम के माध्यम से विकेंद्रीकरण में हेगड़े के ऐतिहासिक योगदान को याद किया गया।
- समारोह में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार, पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू, केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया उपस्थित रहे।
- उपराष्ट्रपति ने कर्नाटक में लोकायुक्त को मजबूत करने और जवाबदेह शासन स्थापित करने में हेगड़े की भूमिका का उल्लेख किया।
रामकृष्ण हेगड़े जयंती के पावन अवसर पर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु स्थित विधान सौध में एक विशेष जन्म शताब्दी समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें देश के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, उपराष्ट्रपति ने कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज राजनेता श्री रामकृष्ण हेगड़े को उनकी 100वीं जयंती पर भावभरी श्रद्धांजलि अर्पित की। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने स्वर्गीय हेगड़े को एक महान राष्ट्रवादी, कुशल राजनेता और भावी नेताओं का निर्माण करने वाला व्यक्तित्व करार दिया। उन्होंने कहा कि हेगड़े जी के दूरदर्शी नेतृत्व में कर्नाटक शासन-व्यवस्था के क्षेत्र में संपूर्ण देश के लिए एक अनुकरणीय और आदर्श राज्य के रूप में उभरा था।
रामकृष्ण हेगड़े जयंती पर विधान सौध में विशेष कार्यक्रम
बेंगलुरु के ऐतिहासिक विधान सौध परिसर में आयोजित रामकृष्ण हेगड़े जयंती समारोह में देश की राजनीति और शासन-प्रशासन की कई प्रमुख हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस अवसर पर भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू, कर्नाटक के मुख्यमंत्री श्री डी. के. शिवकुमार, केंद्रीय मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी तथा राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री श्री सिद्धारमैया सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और श्री हेगड़े के परिवारजन एवं मित्र उपस्थित रहे।
समारोह के दौरान वक्ताओं ने श्री रामकृष्ण हेगड़े के जीवन, उनके राजनीतिक सफर और सार्वजनिक जीवन में स्थापित उच्च मानदंडों को याद किया। उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि महान नेता न केवल अपने समय में बल्कि आने वाली पीढ़ियों के मार्गदर्शन के लिए अमिट छाप छोड़ते हैं। हेगड़े जी ने अपने कार्यकाल के दौरान राज्य में पारदर्शिता, प्रशासनिक जवाबदेही और जन-केंद्रित शासन की जो नींव रखी थी, वह आज भी भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में अत्यंत प्रासंगिक मानी जाती है।
रामकृष्ण हेगड़े जयंती पर विकेंद्रीकरण और सुशासन पर जोर
अपने विस्तृत भाषण में उपराष्ट्रपति ने लोकतंत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में श्री हेगड़े के ऐतिहासिक योगदान का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण हेगड़े जयंती हमें लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण के उस दूरदर्शी मॉडल की याद दिलाती है जिसे उन्होंने कर्नाटक में लागू किया था। वर्ष 1985 में लाया गया ‘कर्नाटक ज़िला परिषद, तालुक पंचायत समिति, मंडल पंचायत और न्याय पंचायत अधिनियम’ भारत में स्थानीय स्वशासन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित हुआ था।
इस अधिनियम ने शासन प्रणाली को सीधे आम जनता के दरवाज़े तक पहुँचाने का काम किया। उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि बाद में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए 73वें संविधान संशोधन के ज़रिए इसी विज़न को राष्ट्रीय स्तर पर संवैधानिक मान्यता और मजबूती प्रदान की गई, जिससे पूरे देश में पंचायती राज संस्थाएं सशक्त होकर उभरीं।
लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण वास्तव में सत्ता को जनता के हाथों में सौंपने की एक प्रक्रिया है। जब निर्णय लेने का अधिकार स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों और नागरिकों को मिलता है, तो विकास योजनाएं अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बन जाती हैं। हेगड़े जी का मानना था कि जब तक भारत के गांव और स्थानीय पंचायतें आत्मनिर्भर और मजबूत नहीं होंगी, तब तक एक सशक्त राष्ट्र की कल्पना अधूरी रहेगी।
रामकृष्ण हेगड़े जयंती का संदेश और सादगी के मूल्य
उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने रामकृष्ण हेगड़े जयंती के इस मंच से अपनी एक बेहद व्यक्तिगत याद साझा करते हुए स्वर्गीय हेगड़े जी की जीवनशैली और विचारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हेगड़े जी धन-संपदा को लेकर बहुत ही व्यावहारिक और सरल दृष्टिकोण रखते थे। श्री हेगड़े कहा करते थे कि पैसे की सीधी और सरल परिभाषा केवल यह है कि व्यक्ति के पास एक अच्छा घर हो, बेहतर स्वास्थ्य हो, बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा हो और एक आरामदायक कार के साथ शांतिपूर्ण जीवन हो। उन्होंने सवाल उठाया था कि आखिर पैसे की इससे ज्यादा और क्या जरूरत हो सकती है?
उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह साधारण सी बात हेगड़े जी की सादगी, ईमानदारी और जीवन के प्रति उनके संतुलित दृष्टिकोण को पूरी तरह से प्रतिबिंबित करती है। आज के समय में, जब भौतिकवाद और अनियंत्रित महत्वाकांक्षाएं बढ़ रही हैं, तब यह सीख सार्वजनिक जीवन में सादगी और संतोष के महत्व को रेखांकित करती है।
इसके अलावा, उपराष्ट्रपति ने सार्वजनिक पदों पर आसीन व्यक्तियों की जवाबदेही पर बल दिया। उन्होंने याद दिलाया कि कर्नाटक में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लोकायुक्त जैसी संस्था को अभूतपूर्व शक्ति और स्वायत्तता प्रदान करने का श्रेय भी श्री हेगड़े को ही जाता है। उनका दृढ़ विश्वास था कि सार्वजनिक पद कोई अधिकार नहीं, बल्कि जनता के विश्वास का प्रबंधन करने की एक पवित्र ज़िम्मेदारी है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था और रामकृष्ण हेगड़े जयंती का महत्व
संघीय ढांचे और त्रि-स्तरीय शासन प्रणाली पर श्री हेगड़े के सिद्धांतों को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि मजबूत राज्य ही एक मजबूत भारत का निर्माण करते हैं। इसी तरह, मजबूत स्थानीय सरकारें राज्यों को स्थिरता और मजबूती प्रदान करती हैं, जबकि सशक्त और जागरूक नागरिक स्थानीय निकायों को सामर्थ्य प्रदान करते हैं। यह वैचारिक श्रृंखला भारतीय लोकतंत्र को नीचे से ऊपर की ओर सशक्त बनाने का मूल मंत्र है।
समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने संस्था निर्माण की प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा, “महान नेता किसी एक अवसर या पल को बदल सकते हैं, लेकिन जो महान संस्था-निर्माता होते हैं, वे आने वाली कई पीढ़ियों के भविष्य को बदल देते हैं।” हेगड़े जी एक ऐसे ही संस्था-निर्माता थे जिन्होंने न केवल नीतियां बनाईं, बल्कि स्वायत्त और टिकाऊ संस्थानों को जन्म दिया।
उपराष्ट्रपति ने देश की युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि वे रामकृष्ण हेगड़े जयंती के अवसर पर उनके जीवन मूल्यों—ईमानदारी, साहस, निष्पक्षता और जनसेवा के प्रति अटूट समर्पण को अपने जीवन में अपनाएं। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग में ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना का संचार होना अत्यंत आवश्यक है और स्वर्गीय हेगड़े की विरासत के प्रति सबसे सच्ची और अर्थपूर्ण श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके स्थापित आदर्शों पर चलें।
सुशासन और रामकृष्ण हेगड़े जयंती का ऐतिहासिक संदर्भ
भारत में प्रशासनिक सुधारों और स्थानीय स्वशासन के इतिहास में कर्नाटक राज्य की भूमिका हमेशा से उल्लेखनीय रही है। रामकृष्ण हेगड़े जयंती के संदर्भ में यह समझना महत्वपूर्ण है कि 1980 के दशक में कर्नाटक द्वारा अपनाए गए प्रशासनिक मॉडल ने देश के अन्य राज्यों के लिए भी मार्गदर्शक का कार्य किया था। न्याय पंचायतों और मंडल पंचायतों के गठन से ग्रामीण क्षेत्रों में त्वरित न्याय और स्थानीय समस्याओं का त्वरित समाधान संभव हो सका था।
सार्वजनिक जीवन में सत्यनिष्ठा और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करते हुए श्री हेगड़े ने अपने कार्यकाल में हमेशा संवाद और जन-सहभागिता को प्राथमिकता दी। यही कारण है कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समाज के सभी वर्गों और विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के नेताओं द्वारा उनका सदैव आदर किया जाता रहा है। आज जब भारत एक विकसित राष्ट्र बनने के संकल्प की ओर अग्रसर है, तब स्थानीय निकायों का सशक्तीकरण और प्रशासनिक जवाबदेही और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? रामकृष्ण हेगड़े जयंती समारोह का आयोजन कहाँ और कब किया गया?
उत्तर। रामकृष्ण हेगड़े के 100वें जन्म शताब्दी समारोह का आयोजन 29 अगस्त 2026 को बेंगलुरु स्थित विधान सौध में किया गया, जिसमें उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
प्रश्न? इस समारोह में कौन-कौन से प्रमुख नेता उपस्थित थे?
उत्तर। समारोह में पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार, केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए।
प्रश्न? श्री रामकृष्ण हेगड़े का पंचायती राज व्यवस्था में क्या योगदान था?
उत्तर। श्री हेगड़े ने 1985 में कर्नाटक ज़िला परिषद, तालुक पंचायत समिति, मंडल पंचायत और न्याय पंचायत अधिनियम लागू करके विकेंद्रीकरण को बढ़ावा दिया, जिसने बाद में 73वें संविधान संशोधन की नींव मजबूत की।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com





