
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में युवाओं से ज्ञान अर्जित करने और संवैधानिक साधनों के माध्यम से बदलाव लाने का आह्वान किया।
मुख्य बातें
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 29 अगस्त 2026 को लखनऊ में बीबीएयू के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।
- युवाओं को डॉ. बी.आर. अंबेडकर के विचारों के अनुरूप संवैधानिक तरीकों से अन्याय पर सवाल उठाने की सलाह दी।
- देश में पिछले 12 वर्षों के दौरान अनुसंधान और विकास खर्च दोगुना होने तथा 34 साल बाद NEP लागू होने की बात कही।
- अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की प्रगति और निजी स्टार्टअप्स की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला।
- समारोह में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल भी मौजूद रहे।
राजनाथ सिंह का भाषण उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (BBAU) के दीक्षांत समारोह में युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण प्रेरणास्रोत के रूप में सामने आया है। 29 अगस्त 2026 को आयोजित इस समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने युवाओं से ज्ञान अर्जित करने, अन्याय पर हिंसा के बजाय संवैधानिक साधनों से सवाल उठाने और लोकतांत्रिक तरीकों से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। पीआईबी के अनुसार, रक्षा मंत्री ने कहा कि देश के निर्माण और सामाजिक परिवर्तन के लिए संवैधानिक मार्ग ही सबसे सटीक और प्रभावी माध्यम है।
डॉ. अंबेडकर के सिद्धांतों पर केंद्रित राजनाथ सिंह का भाषण
लखनऊ में आयोजित दीक्षांत समारोह में राजनाथ सिंह का भाषण पूरी तरह से बाबासाहेब डॉ. बी.आर. अंबेडकर के जीवन मूल्यों और उनके प्रसिद्ध मंत्र ‘शिक्षित हो, संगठित हो और संघर्ष करो’ के वास्तविक अर्थ की व्याख्या पर आधारित रहा। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस मंत्र का मूल संदेश ज्ञान प्राप्त करना और समाज में फैली विषमताओं तथा अन्याय पर सवाल उठाना है। उन्होंने कहा कि जब संविधान द्वारा लोकतांत्रिक और कानूनी रास्ते उपलब्ध कराए गए हैं, तो किसी भी स्थिति में हिंसा या असंवैधानिक तरीकों का सहारा नहीं लिया जाना चाहिए।
संविधान सभा में डॉ. अंबेडकर द्वारा दिए गए अंतिम भाषण का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने स्मरण कराया कि सामाजिक और आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए केवल संवैधानिक साधनों का ही प्रयोग किया जाना चाहिए। डॉ. अंबेडकर ने असंवैधानिक तरीकों और हिंसा को ‘अराजकता का व्याकरण’ कहा था, जिसे पूरी तरह से त्याग देना अनिवार्य है। विश्वविद्यालय की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों का प्रमुख उद्देश्य युवाओं के मस्तिष्क में न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के आदर्शों को स्थापित करना होना चाहिए ताकि वे देश की प्रगति में अपना सार्थक योगदान दे सकें।
चरित्र निर्माण और समग्र शिक्षा की आवश्यकता
दीक्षांत समारोह के दौरान रक्षा मंत्री ने शिक्षा के वास्तविक अर्थ और उसके व्यापक प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि सच्ची शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह व्यक्ति में सोचने-समझने की क्षमता और व्यावहारिक समस्या-समाधान कौशल को विकसित करती है। शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वह व्यक्ति को अपने ज्ञान का उपयोग संपूर्ण समाज के कल्याण के लिए करना सिखाती है। ज्ञान और उपलब्धियां तभी सार्थक होती हैं जब वे उच्च नैतिक मूल्यों और अनुशासित आचरण पर टिकी हों।
स्वामी विवेकानंद के महान विचारों का उदाहरण देते हुए रक्षा मंत्री ने स्नातक हो रहे युवाओं का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को केवल अपने व्यक्तिगत करियर और सफलता तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें जॉब सीकर के बजाय जॉब क्रिएटर, समस्या समाधानकर्ता और समाज में सकारात्मक परिवर्तन के उत्प्रेरक बनना चाहिए। तेजी से बदलती इस दुनिया में नई तकनीकों और नवाचारों के कारण नए अवसर पैदा हो रहे हैं, इसलिए निरंतर सीखने और खुद को नए कौशलों के अनुरूप ढालने की प्रवृत्ति ही भविष्य में सफलता की कुंजी साबित होगी।
राजनाथ सिंह का भाषण: अनुसंधान और नवाचार इकोसिस्टम में अभूतपूर्व प्रगति
अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने देश के शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार इकोसिस्टम में पिछले 12 वर्षों के दौरान हुए बदलावों को रेखांकित किया। राजनाथ सिंह का भाषण इस बात पर जोर देता है कि भारत में शोध और विकास (R&D) पर होने वाला खर्च पिछले वर्षों की तुलना में दोगुना हो चुका है। इसके साथ ही 34 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद देश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) लागू की गई है, जिससे शिक्षा प्रणाली को आधुनिक और प्रासंगिक बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आज भारतीय युवा केवल देश के भीतर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाडों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। युवा नए स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं, यूनिकॉर्न कंपनियां बना रहे हैं और आधुनिक तकनीकों का विकास कर रहे हैं। भारत वैश्विक नवाचार सूचकांक (Global Innovation Index) में लगातार ऊपर चढ़ रहा है और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बनकर उभरा है। सरकार देश में एक ऐसा वातावरण तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां युवा नई खोजें कर सकें, नवाचार को बढ़ावा दे सकें और समाज की समस्याओं का व्यावहारिक समाधान खोज सकें।
‘टीम इंडिया’ के रूप में वर्ष 2047 के लक्ष्य की ओर कदम
राष्ट्रीय प्रगति के लिए एकजुटता के महत्व पर बल देते हुए राजनाथ सिंह का भाषण युवाओं को ‘टीम इंडिया’ के सदस्य के रूप में काम करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत प्रयास किसी भी क्षेत्र में विकास ला सकते हैं, लेकिन जब पूरा देश सामूहिक संकल्प के साथ आगे बढ़ता है, तो विकास की गति कई गुना बढ़ जाती है। वर्ष 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने का जो साझा लक्ष्य रखा गया है, उसे प्राप्त करने में युवाओं की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण होगी।
अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत द्वारा हासिल की गई उपलब्धियों का जिक्र करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि सीमित संसाधनों से अपने अभियानों की शुरुआत करने वाला भारत आज गगनयान जैसे मानव अंतरिक्ष उड़ान और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन जैसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों पर काम कर रहा है। इसमें निजी क्षेत्र और भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स की भागीदारी बहुत तेजी से बढ़ी है, जो प्रक्षेपण यानों और उपग्रह प्रौद्योगिकियों के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
राजनाथ सिंह का भाषण: आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक आत्मविश्वास का संदेश
संबोधन के अंतिम चरण में राजनाथ सिंह का भाषण देश की सांस्कृतिक विरासत, भाषाओं और स्वाभिमान की सुरक्षा पर केंद्रित रहा। उन्होंने कहा कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की यात्रा केवल आर्थिक आंकड़ों या विकास दर से तय नहीं हो सकती। आर्थिक समृद्धि किसी देश को धनवान बना सकती है, लेकिन उसकी सांस्कृतिक ताकत और आत्मविश्वास ही उसे विश्व में महान बनाता है। आज देश में भारतीय भाषाओं और ज्ञान परंपराओं को पुनर्जीवित करने का कार्य बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।
पीआईबी की रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत आज केवल एक बड़ी अर्थव्यवस्था ही नहीं है, बल्कि एक ऐसा देश बन चुका है जिसे अपनी सभ्यता और क्षमताओं पर पूरा भरोसा है। आज जब भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी बात रखता है, तो पूरी दुनिया उसे ध्यान से सुनती है। भारत अब केवल वैश्विक नियमों का पालन करने वाला राष्ट्र नहीं रहा, बल्कि नियमों को आकार देने वाला देश बन गया है। राजनाथ सिंह का भाषण स्पष्ट करता है कि यही ‘नए भारत’ की पहचान है और इसी भावना ने ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों को सफलता की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।
बीबीएयू दीक्षांत समारोह की प्रमुख विशेषताएं
लखनऊ में आयोजित इस गरिमामय समारोह में कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया और छात्रों का उत्साहवर्धन किया। राजनाथ सिंह का भाषण इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा। कार्यक्रम की प्रमुख बातें निम्नलिखित हैं:
- आयोजन स्थल और तिथि: बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (BBAU), लखनऊ, 29 अगस्त 2026।
- मुख्य अतिथि: केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह।
- विशेष उपस्थिति: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राज कुमार मित्तल।
- प्रमुख संदेश: 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए ज्ञान, संवैधानिक मूल्यों, अनुसंधान और नवाचार पर बल।
- विशेष उपलब्धियां: अनुसंधान व्यय में दोगुनी वृद्धि, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति और स्टार्टअप इकोसिस्टम का विस्तार।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? राजनाथ सिंह ने दीक्षांत समारोह में युवाओं को क्या मुख्य संदेश दिया?
उत्तर। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने युवाओं को ज्ञान अर्जित करने, हिंसा के बजाय संवैधानिक और लोकतांत्रिक माध्यमों से अन्याय पर सवाल उठाने और 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए एकजुट होकर काम करने का संदेश दिया।
प्रश्न? डॉ. बी.आर. अंबेडकर के किस मंत्र की रक्षा मंत्री ने व्याख्या की?
उत्तर। रक्षा मंत्री ने डॉ. अंबेडकर के मंत्र ‘शिक्षित हो, संगठित हो और संघर्ष करो’ की व्याख्या करते हुए कहा कि इसका अर्थ ज्ञान प्राप्त करना, संवैधानिक साधनों से अन्याय का विरोध करना और लोकतांत्रिक तरीकों से समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है।
प्रश्न? लखनऊ के इस कार्यक्रम में कौन-कौन से प्रमुख अतिथि शामिल थे?
उत्तर। इस दीक्षांत समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अलावा उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और बीबीएयू के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल सहित कई संकाय सदस्य और छात्र उपस्थित थे।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






