
लखनऊ में कौशल विकास मंत्रालय और यूपी सरकार के साझा उद्योग सम्मेलन में पीएम-सेतु पहल पर चर्चा हुई, जिसका उद्देश्य आईटीआई को अत्याधुनिक केंद्र बनाना है।
मुख्य बातें
- कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने लखनऊ में यूपी सरकार के साथ मिलकर पीएम-सेतु उद्योग सम्मेलन आयोजित किया।
- पीएम-सेतु क्लस्टर प्रोजेक्ट में 241 करोड़ रुपये तक का निवेश संभव है, जिसमें 50% केंद्र, 33% राज्य और 17% उद्योग देगा।
- एसपीवी मॉडल में एंकर उद्योग साझेदारों को 51% मालिकाना हक मिलेगा, जबकि केंद्र और राज्य के पास 24.5% स्वामित्व होगा।
- उत्तर प्रदेश में 8 क्लस्टरों के तहत 32 आईटीआई चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से 7 क्लस्टर सहयोग के लिए खुले हैं।
- एनएसडीसी और लखनऊ छावनी बोर्ड के बीच शौर्य अकादमी स्थापित करने के लिए समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए गए।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा आयोजित एक प्रमुख कार्यक्रम के दौरान पीएम सेतु योजना पर विस्तृत चर्चा की गई। इस सम्मेलन का आयोजन उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से किया गया, जिसमें देश के कई रक्षा उपक्रमों, औद्योगिक दिग्गजों और बहुपक्षीय संगठनों ने सहभागिता की। इस रणनीतिक बैठक का मुख्य लक्ष्य भारत के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को अंतरराष्ट्रीय स्तर के उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में विकसित करना है। व्यावसायिक शिक्षा में उद्योगों की प्रत्यक्ष भागीदारी बढ़ाने और युवाओं को नई तकनीकों में प्रशिक्षित करने की दिशा में इस पहल को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सम्मेलन के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और राज्य के व्यावसायिक शिक्षा मंत्री कपिल देव अग्रवाल उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल), ब्रह्मोस एयरोस्पेस और अशोक लेलैंड जैसी दिग्गज कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त विश्व बैंक और विभिन्न सेक्टर स्किल काउंसिल के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
पीएम सेतु योजना और औद्योगिक क्लस्टर मॉडल की संरचना
इस सम्मेलन के दौरान पीएम सेतु योजना के तहत आईटीआई के पुनरुद्धार और आधुनिकीकरण के लिए प्रस्तावित क्लस्टर मॉडल की बारीकियाँ साझा की गईं। इस मॉडल के अंतर्गत एक हब आईटीआई और चार स्पोक आईटीआई वाले प्रत्येक क्लस्टर प्रोजेक्ट में 241 करोड़ रुपये तक के निवेश का प्रावधान किया गया है। इस वित्तीय व्यवस्था में केंद्र सरकार 50 प्रतिशत, संबंधित राज्य सरकार 33 प्रतिशत और सहयोगी उद्योग साझेदार 17 प्रतिशत की वित्तीय मदद प्रदान करेंगे। इस तरह से पीएम सेतु योजना सरकारी फंडिंग और निजी भागीदारी का बेहतरीन तालमेल पेश करती है।
इसके अलावा, पीएम सेतु योजना में एक विशेष प्रयोजन वाहन यानी स्पेशल पर्पस व्हीकल (एसपीवी) की व्यवस्था की गई है। इस नई संरचना के तहत एंकर इंडस्ट्री पार्टनर्स को क्लस्टर में 51 प्रतिशत का मालिकाना हक दिया जाएगा। वहीं केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों के पास 24.5-24.5 प्रतिशत का स्वामित्व रहेगा। पीएम सेतु योजना के इस अनोखे मॉडल के माध्यम से उद्योगों को आईटीआई के प्रबंधन, पाठ्यक्रम निर्धारण और दैनिक संचालन में मुख्य भूमिका निभाने का सीधा अवसर मिलेगा।
पीएम सेतु योजना के तहत उत्तर प्रदेश में विकास के अवसर
उत्तर प्रदेश सरकार के व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के अनुसार, राज्य में अब तक 8 क्लस्टरों के अंतर्गत 32 आईटीआई संस्थानों को चिन्हित किया जा चुका है। इनमें से 7 क्लस्टर अभी भी औद्योगिक साझेदारों के सहयोग के लिए खुले हैं। पीएम सेतु योजना के जरिए उत्तर प्रदेश के कौशल विकास ढांचे को उद्योग की तात्कालिक मांगों से सीधे जोड़ा जा रहा है। रक्षा गलियारे (डिफेंस कॉरिडोर) और तेजी से बढ़ते विनिर्माण क्षेत्र को देखते हुए राज्य को भविष्य के लिए तैयार कार्यबल तैयार करने में इस योजना से बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।
कौशल विकास मंत्रालय के अनुसार, पीएम सेतु योजना के तहत स्वीकृत उद्योग भागीदारी के प्रस्ताव फिलहाल पांच अलग-अलग राज्यों के सात समूहों में 1,500 करोड़ रुपये से अधिक के उद्योग-नेतृत्व वाले निवेश को दर्शाते हैं। कई अन्य प्रस्ताव भी वर्तमान में सरकार की विचाराधीन प्रक्रिया में हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत को वैश्विक विनिर्माण और प्रौद्योगिकी महाशक्ति बनाने का सपना केवल उच्च कुशल मानव संसाधन की मदद से ही पूरा हो सकता है।
कौशल विकास और उद्योगों की बढ़ती मांग
सुरक्षा और रक्षा विनिर्माण, ड्रोन टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, सटीक इंजीनियरिंग, मेकाट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे आधुनिक क्षेत्रों में तीव्र गति से बदलाव आ रहे हैं। ऐसे में उद्योग-अकादमिक संबंधों को सुदृढ़ बनाना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है। पीएम सेतु योजना इसी खाई को पाटने के लिए डिजाइन की गई है ताकि युवा जो कौशल सीखें, वह सीधे रोजगार में परिवर्तित हो सके। कौशल प्रमाण-पत्र की वास्तविक सार्थकता तभी है जब वह युवाओं के लिए सम्मानजनक और टिकाऊ रोजगार के दरवाजे खोले।
कार्यक्रम के दौरान नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनएसडीसी) और लखनऊ छावनी बोर्ड के बीच एक विशेष समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत लखनऊ में ‘शौर्य अकादमी’ की स्थापना की जाएगी। यह अकादमी सशस्त्र बलों, पुलिस और अन्य वर्दीधारी सेवाओं में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं को विशेषज्ञ प्रशिक्षण प्रदान करेगी। इस तरह की पहल युवाओं के जनसांख्यिकीय लाभांश को उत्पादक लाभांश में बदलने के राष्ट्रीय संकल्प को बल देती है।
व्यावसायिक शिक्षा में पीएम सेतु योजना का दीर्घकालिक प्रभाव
व्यावसायिक प्रशिक्षण को आधुनिक तकनीक से जोड़ना भारत के विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धी क्षमता को बढ़ाने के लिए आवश्यक है। परंपरागत रूप से आईटीआई में मिलने वाली ट्रेनिंग और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली मशीनों के बीच एक बड़ा अंतर देखा जाता रहा है। पीएम सेतु योजना के तहत निजी उद्योगों की सीधी भागीदारी से लैब्स का आधुनिकीकरण होगा और प्रशिक्षुओं को सीधे औद्योगिक वातावरण में सीखने का मौका मिलेगा। इससे कंपनियों को तैयार और कुशल जनशक्ति मिलेगी, जबकि युवाओं को जॉब मार्केट में तत्काल अवसर मिलेंगे।
कौशल विकास प्रणाली को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित न रखकर इसे एक राष्ट्रीय मिशन के रूप में देखा जा रहा है। पीएम सेतु योजना के लागू होने से न केवल बुनियादी ढांचे का विकास होगा बल्कि अप्रेंटिसशिप (शिक्षुता) के नए अवसर भी पैदा होंगे। उद्योग-नेतृत्व वाले इस मॉडल से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले छात्रों को सीधे कंपनियों में व्यावहारिक अनुभव मिलेगा, जो उनके करियर के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा।
पीएम सेतु योजना के मुख्य आकर्षण
- वित्तीय ढांचा: क्लस्टर परियोजना के लिए 241 करोड़ रुपये तक का प्रावधान (50% केंद्र, 33% राज्य, 17% उद्योग)।
- प्रबंधन संरचना: एसपीवी में एंकर उद्योगों के पास 51% स्वामित्व और सरकारों के पास 49% कुल हिस्सेदारी।
- उत्तर प्रदेश की स्थिति: 8 क्लस्टरों में 32 आईटीआई की पहचान, 7 क्लस्टर नए उद्योग साझेदारों के लिए उपलब्ध।
- कुल निवेश दायरा: पांच राज्यों के 7 समूहों में 1,500 करोड़ रुपये से अधिक का प्रतिबद्ध निजी और औद्योगिक निवेश।
- शौर्य अकादमी: एनएसडीसी और लखनऊ छावनी बोर्ड द्वारा सशस्त्र बलों व पुलिस की तैयारी हेतु साझेदारी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: पीएम सेतु योजना की मुख्य फंडिंग व्यवस्था क्या है?
उत्तर: पीएम सेतु योजना के तहत एक क्लस्टर प्रोजेक्ट के लिए 241 करोड़ रुपये तक का बजट तय है, जिसमें केंद्र सरकार 50%, राज्य सरकार 33% और उद्योग साझेदार 17% निवेश करते हैं।
प्रश्न: पीएम सेतु योजना के तहत एंकर इंडस्ट्री पार्टनर्स को कितना स्वामित्व मिलता है?
उत्तर: स्पेशल पर्पस व्हीकल (एसपीवी) मॉडल के अंतर्गत एंकर उद्योग साझेदारों को 51% मालिकाना हक दिया जाता है, जबकि केंद्र और राज्य सरकारों के पास 24.5-24.5% हिस्सेदारी होती है।
प्रश्न: उत्तर प्रदेश में पीएम सेतु योजना के तहत कितने आईटीआई और क्लस्टर चिन्हित किए गए हैं?
उत्तर: उत्तर प्रदेश में 8 क्लस्टरों के तहत 32 आईटीआई संस्थानों को चिन्हित किया गया है, जिनमें से 7 क्लस्टर औद्योगिक सहयोग के लिए खुले हैं।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






