रविवार, अगस्त 30, 2026

आईटीआर फाइल कैसे करें? जानिए ऑनलाइन इनकम टैक्स रिटर्न भरने का तरीका

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आईटीआर फाइल

आयकर विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आईटीआर भरने की पूरी चरण-दर-चरण प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और ई-वेरिफिकेशन की गाइड।

मुख्य बातें

  • आयकर विभाग का आधिकारिक पोर्टल incometax.gov.in पर पैन के माध्यम से लॉगिन करके रिटर्न दाखिल किया जाता है।
  • वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए ITR-1 (सहज) सबसे सामान्य फॉर्म है, जिसे फॉर्म 16 और AIS की मदद से भरा जाता है।
  • रिटर्न दाखिल करने के बाद 30 दिनों के भीतर आधार ओटीपी या नेट बैंकिंग से ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है।
  • अपनी आय और निवेश के अनुसार पुरानी या नई टैक्स व्यवस्था का विकल्प चुना जा सकता है।

घर बैठे ऑनलाइन आईटीआर फाइल करना अब बेहद सरल और पारदर्शी प्रक्रिया बन चुका है। आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल के माध्यम से देश का कोई भी करदाता बिना किसी मध्यस्थ या सीए की मदद के स्वयं अपना इनकम टैक्स रिटर्न जमा कर सकता है। समय पर रिटर्न दाखिल करने से न केवल आप कानून का पालन करते हैं, बल्कि होम लोन, वीजा आवेदन और टीडीएस (TDS) रिफंड प्राप्त करने में भी आसानी होती है। इस लेख में ऑनलाइन रिटर्न दाखिल करने की पूरी जानकारी दी गई है।

आईटीआर फाइल करने से पहले सही फॉर्म का चुनाव

इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय सही फॉर्म का चुनाव करना अत्यंत आवश्यक है। गलत फॉर्म चुनने पर आपका रिटर्न अमान्य घोषित हो सकता है। आयकर विभाग विभिन्न आय स्रोतों के आधार पर अलग-अलग फॉर्म उपलब्ध कराता है:

  • ITR-1 (सहज): यह फॉर्म उन निवासी व्यक्तियों के लिए है जिनकी कुल आय 50 लाख रुपये तक है और आय का मुख्य स्रोत वेतन, एक मकान संपत्ति, या अन्य स्रोतों (जैसे बैंक ब्याज) से है।
  • ITR-2: उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) के लिए जिनकी आय व्यापार या पेशे से नहीं है, लेकिन पूंजीगत लाभ (Capital Gains) या एक से अधिक मकान संपत्तियों से आय है।
  • ITR-3: व्यावसायिक या पेशेवर आय (Business or Profession Income) वाले व्यक्तियों और HUF के लिए।
  • ITR-4 (सुगम): सम्भावित आय योजना (Presumptive Taxation Scheme) का लाभ उठाने वाले व्यक्तियों, HUF और फर्मों के लिए जिनकी कुल आय 50 लाख रुपये तक है।

पुराना या नया टैक्स ढांचा: सही विकल्प चुनें

रिटर्न दाखिल करते समय करदाताओं को पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) और नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) में से किसी एक को चुनने का विकल्प मिलता है। नई कर व्यवस्था में कर की दरें कम रखी गई हैं, लेकिन इसमें अधिकांश छूट और कटौती (जैसे धारा 80C, 80D, HRA) का लाभ नहीं मिलता। वहीं पुरानी कर व्यवस्था में आप विभिन्न कटौतियों का दावा करके अपनी कर योग्य आय कम कर सकते हैं। अपनी वित्तीय स्थिति और बचत के अनुसार सही व्यवस्था का चयन करें।

आईटीआर फाइल करने के लिए जरूरी दस्तावेज

ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू करने से पहले अपने सभी आवश्यक दस्तावेजों को एकत्रित कर लें ताकि आवेदन के समय किसी प्रकार की बाधा न आए। जरूरी दस्तावेजों की सूची निम्नलिखित है:

  • पैन कार्ड (PAN Card) और आधार कार्ड: दोनों का आपस में लिंक होना अनिवार्य है।
  • फॉर्म 16 (Form 16): वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए नियोक्ता द्वारा जारी किया जाने वाला टीडीएस प्रमाण पत्र।
  • फॉर्म 26AS और AIS/TIS: आयकर पोर्टल से डाउनलोड किया जाने वाला वार्षिक सूचना विवरण जिसमें आपकी कुल आय और कटे हुए टीडीएस का ब्योरा होता है।
  • बैंक खाता विवरण: सभी सक्रिय बैंक खातों की पासबुक या स्टेटमेंट, जिस पर मिला ब्याज दर्ज हो।
  • निवेश और छूट के प्रमाण: एलआईसी, पीपीएफ, ईपीएफ, होम लोन, हेल्थ इंश्योरेंस तथा दान से जुड़े रसीदें एवं दस्तावेज।

ऑनलाइन आईटीआर फाइल करने का चरण-दर-चरण तरीका

यदि आपके पास सभी दस्तावेज तैयार हैं, तो नीचे दिए गए चरणों का पालन करके आप आसानी से अपना रिटर्न जमा कर सकते हैं:

  1. पोर्टल पर लॉगिन करें: आयकर विभाग की आधिकारिक ई-फाइलिंग वेबसाइट (incometax.gov.in) पर जाएं। अपने पैन (PAN) को यूजर आईडी बनाकर और पासवर्ड दर्ज करके लॉगिन करें।
  2. ई-फाइल मेन्यू में जाएं: मुख्य डैशबोर्ड पर पहुंचने के बाद ‘e-File’ टैब पर क्लिक करें, इसके बाद ‘Income Tax Returns’ और फिर ‘File Income Tax Return’ विकल्प को चुनें।
  3. मूल्यांकन वर्ष का चयन करें: संबंधित वित्तीय वर्ष के लिए उपयुक्त एसेसमेंट ईयर (जैसे AY 2026-27) चुनें और ‘Online’ मोड सिलेक्ट करके आगे बढ़ें।
  4. फाइलिंग स्टेटस और फॉर्म चुनें: अपनी स्थिति (Individual/HUF) चुनें और अपनी आय के अनुसार उपयुक्त फॉर्म (जैसे ITR-1) का चयन करें।
  5. पूर्व-भरे डेटा की जांच करें: आपकी आय, कटे हुए टैक्स और बैंक खातों का विवरण पहले से भरा हुआ दिखाई देगा। इसे अपने फॉर्म 16 और AIS से अच्छी तरह मिलाकर सत्यापित करें।
  6. टैक्स गणना और ब्योरा: यदि आपका कोई कर दायित्व बनता है तो उसका ऑनलाइन भुगतान करें। यदि आपका टैक्स अधिक कटा है, तो रिफंड का दावा करें।
  7. सत्यापन और सबमिशन: विवरण की समीक्षा करने के बाद पोर्टल पर आईटीआर फाइल सबमिट करें और अंतिम चरण में ई-वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी करें।

आईटीआर फाइल के बाद ई-वेरिफिकेशन क्यों आवश्यक है?

रिटर्न ऑनलाइन सबमिट कर देना ही अंतिम चरण नहीं है। आईटीआर फाइल के बाद ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य होता है। जब तक आप अपने रिटर्न को सत्यापित नहीं करते, आयकर विभाग उसे संसाधित (Process) नहीं करता है।

आप ई-वेरिफिकेशन कई तरीकों से कर सकते हैं:

  • आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी (Aadhaar OTP) के माध्यम से।
  • नेट बैंकिंग (Net Banking) या बैंक खाता संख्या द्वारा उत्पन्न इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड (EVC) से।
  • डीमैट खाते के जरिए।
  • यदि ऑनलाइन माध्यम संभव न हो, तो आईटीआर-वी (ITR-V) की हस्ताक्षरित भौतिक प्रति को स्पीड पोस्ट से सीपीसी, बंगलुरु भेजकर।

ध्यान रखें कि रिटर्न दाखिल करने की तिथि से 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन पूरा करना जरूरी है, अन्यथा आपका दाखिल किया गया रिटर्न अमान्य माना जाएगा।

आईटीआर फाइल करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

रिटर्न दाखिल करते समय छोटी सी असावधानी के कारण आयकर विभाग से नोटिस आ सकता है। इसलिए निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखें:

  • हमेशा अपने सभी सक्रिय बैंक खातों की जानकारी फॉर्म में दर्ज करें, चाहे उनमें न्यूनतम शेष राशि ही क्यों न हो।
  • आयकर विभाग के पास उपलब्ध AIS (Annual Information Statement) और Form 26AS से अपनी सभी प्राप्तियों का मिलान अवश्य करें।
  • निर्धारित अंतिम तिथि से पहले सही वित्तीय वर्ष चुनकर आईटीआर फाइल करें ताकि विलंब शुल्क (Late Fee) और ब्याज से बचा जा सके।
  • अपनी बचत खाते के ब्याज, एफडी ब्याज और शेयर बाजार या म्यूचुअली फंड से प्राप्त पूंजीगत लाभ को छिपाने का प्रयास न करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: क्या कम आय होने पर भी आईटीआर फाइल करना चाहिए?
उत्तर: यदि आपकी कुल आय कर योग्य सीमा से कम है, तब भी शून्य रिटर्न (Nil ITR) दाखिल करना फायदेमंद रहता है। इससे लोन मिलने में आसानी होती है, वीजा प्रक्रिया सरल बनती है और टीडीएस रिफंड प्राप्त किया जा सकता है।

प्रश्न: देर से आईटीआर फाइल करने पर कितना जुर्माना लगता है?
उत्तर: निर्धारित तिथि के बाद बिलैटेड रिटर्न दाखिल करने पर आयकर अधिनियम की धारा 234F के तहत नियमानुसार विलंब शुल्क और ब्याज देना पड़ सकता है।

प्रश्न: यदि आईटीआर फाइल में कोई गलती हो जाए तो क्या करें?
उत्तर: यदि दाखिल किए गए रिटर्न में कोई त्रुटि रह जाती है, तो आप आयकर अधिनियम की धारा 139(5) के तहत संशोधित रिटर्न (Revised Return) दाखिल कर सकते हैं।

यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, निवेश या वित्तीय सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले किसी योग्य/सेबी-पंजीकृत सलाहकार से परामर्श करें।

आधिकारिक जानकारी और नवीनतम अपडेट के लिए: https://www.incometax.gov.in

यह लेख आज पत्रिका की एक्सप्लेनर डेस्क द्वारा सामान्य जागरूकता के लिए तैयार किया गया है। नियम और प्रक्रियाएं समय-समय पर बदल सकती हैं — कृपया आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें। सुधार/सुझाव: corrections@aajpatrika.com

अभिषेक सिंह
अभिषेक सिंह
अभिषेक सिंह आज पत्रिका के समाचार संपादक हैं और अर्थव्यवस्था, बाज़ार, रोज़गार तथा शिक्षा से जुड़ी खबरें देखते हैं।

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