मंगलवार, सितम्बर 1, 2026

पी ए संगमा की जयंती पर संविधान सदन में ओम बिरला ने दी श्रद्धांजलि

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पी ए संगमा

पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पी ए संगमा की जयंती के अवसर पर संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई, जहां ओम बिरला और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने पुष्पांजलि अर्पित की।

मुख्य बातें

  • लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पूर्व अध्यक्ष पी ए संगमा की जयंती पर संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में पुष्पांजलि अर्पित की।
  • वर्ष 1996 में पी ए संगमा सर्वसम्मति से 11वीं लोकसभा के अध्यक्ष चुने गए थे और विपक्ष से इस पद पर पहुंचने वाले पहले सदस्य थे।
  • वे नौ बार लोकसभा के सदस्य चुने गए और उन्होंने मेघालय के मुख्यमंत्री तथा विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों के मंत्री के रूप में कार्य किया।
  • उनका निधन 4 मार्च 2016 को हुआ था और संविधान सदन की लॉबी में लगा उनका चित्र 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा अनावरित किया गया था।

पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पी ए संगमा की जयंती के अवसर पर नई दिल्ली स्थित संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में एक विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। पीआईबी के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पूर्व अध्यक्ष पी ए संगमा के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर संसद के दोनों सदनों के प्रमुख अधिकारियों, सांसदों और गणमान्य व्यक्तियों ने उपस्थित होकर देश और संसदीय लोकतंत्र में उनके अतुलनीय योगदान को याद किया।

संसदीय परंपराओं के अनुरूप आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, कई वर्तमान व पूर्व सांसद और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह और राज्यसभा के महासचिव पी. सी. मोदी सहित दोनों सचिवालयों के अधिकारियों ने भी पूर्व अध्यक्ष को अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए। पी ए संगमा का पूरा जीवन सार्वजनिक सेवा, संसदीय गरिमा और पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए समर्पित रहा।

पी ए संगमा की जयंती पर संविधान सदन में श्रद्धांजलि

प्रत्येक वर्ष पूर्व अध्यक्षों और राष्ट्रनायकों की जयंती पर संविधान सदन में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पी ए संगमा की जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उनके तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। ओम बिरला ने सोशल मीडिया पर अपने संदेश में कहा कि संगमा जी का सार्वजनिक जीवन, समृद्ध संसदीय अनुभव और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अटूट प्रतिबद्धता भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी।

इस अवसर पर उपस्थित सभी गणमान्य लोगों ने पूर्वोत्तर के इस महान नेता द्वारा भारतीय राजनीति में स्थापित उच्च आदर्शों को याद किया। पी ए संगमा ने अपने दीर्घकालिक राजनीतिक जीवन में सदैव संसदीय नियमों की मर्यादा और सदन के निष्पक्ष संचालन को प्राथमिकता दी। संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में उनका चित्र भारतीय लोकतंत्र की समृद्ध विरासत और समावेशी भावना का प्रतीक माना जाता है।

पी ए संगमा का संसदीय और राजनीतिक सफर

मेघालय से आने वाले पी ए संगमा एक सुविख्यात सांसद, कुशल प्रशासक और जनप्रिय नेता के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने वर्ष 1977 में पहली बार संसद में प्रवेश किया और इसके बाद राष्ट्रीय राजनीति में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई। अपने राजनीतिक जीवन के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार के विभिन्न महत्वपूर्ण मंत्रालयों और विभागों में केंद्रीय मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इसके साथ ही उन्होंने मेघालय के मुख्यमंत्री पद का कार्यभार भी संभाला और राज्य के समग्र विकास में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।

पी ए संगमा अपने राजनीतिक करियर में कुल नौ बार लोकसभा के सदस्य चुने गए, जो उनकी असीम लोकप्रियता और जनता के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है। उन्होंने पूर्वोत्तर भारत, विशेषकर मेघालय के दूरदराज क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में व्यापक कार्य किया। उनकी दूरदर्शी नीतियों के कारण उन्हें न केवल पूर्वोत्तर बल्कि पूरे देश में व्यापक सम्मान प्राप्त हुआ।

11वीं लोकसभा के अध्यक्ष के रूप में पी ए संगमा का योगदान

वर्ष 1996 में भारतीय संसदीय इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ा जब पी ए संगमा को सर्वसम्मति से 11वीं लोकसभा का अध्यक्ष चुना गया। वह विपक्ष से चुने जाने वाले पहले ऐसे सदस्य थे जिन्होंने लोकसभा अध्यक्ष के प्रतिष्ठित कार्यभार को संभाला। एक विपक्षी सदस्य होने के बावजूद, सभी राजनीतिक दलों ने उनकी निष्पक्षता, योग्यता और संसदीय परंपराओं के प्रति निष्ठा को देखते हुए उनका सर्वसम्मति से समर्थन किया था।

लोकसभा अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने संसदीय नियमों का कड़ाई से पालन कराया और सदन की गरिमा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। पी ए संगमा ने सदन के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए सभी दलों के साथ संवाद की नीति अपनाई। उन्होंने अंतर-संसदीय संबंधों को मजबूत करने और विभिन्न देशों की व्यवस्थापिकाओं के साथ अनुभव साझा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा, उन्होंने विधानमंडलों में महिलाओं के अधिक प्रतिनिधित्व और भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए।

पूर्वोत्तर और वंचित वर्गों के उत्थान में पी ए संगमा की भूमिका

पूर्वोत्तर भारत की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने में पी ए संगमा का योगदान अद्वितीय रहा है। उन्होंने विशेष रूप से जनजातीय समुदायों, वंचित वर्गों और श्रमिक वर्ग के कल्याण के लिए जीवनपर्यंत काम किया। उनका मानना था कि जब तक पूर्वोत्तर और देश के पिछड़े क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास नहीं होगा, तब तक राष्ट्रीय प्रगति अधूरी रहेगी। उन्होंने संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह उपेक्षित और पिछड़े समाज के अधिकारों के लिए पुरजोर आवाज उठाई।

श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और जनजातीय समाज के सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण के लिए उनके द्वारा किए गए कार्यों की व्यापक सराहना की गई। एक प्रशासक के रूप में भी उन्होंने नीतियों के निर्माण में समाज के अंतिम व्यक्ति के हितों को प्राथमिकता दी। यही कारण है कि उन्हें आज भी जन-जन के नेता के रूप में याद किया जाता है। 4 मार्च 2016 को नई दिल्ली में उनका निधन हो गया, जिससे भारतीय राजनीति में एक अपूरणीय क्षति हुई।

संविधान सदन में पी ए संगमा के चित्र का इतिहास

संविधान सदन की बाहरी लॉबी में स्थापित पी ए संगमा का चित्र भारत के महान संसदीय व्यक्तित्वों में से एक के सम्मान में लगाया गया है। इस भव्य तैलचित्र को प्रसिद्ध कलाकार श्री विजेंद्र शर्मा द्वारा तैयार किया गया था। इस चित्र का आधिकारिक अनावरण भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने 10 फरवरी 2014 को किया था। यह चित्र संविधान सदन में आने वाले सांसदों और देश-विदेश के प्रतिनिधियों को उनके महान योगदान की याद दिलाता है।

संसदीय परंपराओं में पूर्व अध्यक्षों और महान नेताओं के चित्रों का अनावरण उनके राष्ट्रनिर्माण में दिए गए योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक जरिया है। पी ए संगमा का तैलचित्र न केवल उनके व्यक्तित्व की छाप छोड़ता है, बल्कि यह देश के भावी जन प्रतिनिधियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। संविधान सदन में उनके इस चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर आज पूरे देश ने उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न? पी ए संगमा कौन थे और उनका प्रमुख योगदान क्या था?
उत्तर: पी ए संगमा मेघालय के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री और 11वीं लोकसभा के अध्यक्ष थे। वे नौ बार लोकसभा सांसद रहे और उन्होंने पूर्वोत्तर के विकास व संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रश्न? पी ए संगमा 11वीं लोकसभा के अध्यक्ष कब चुने गए थे?
उत्तर: पी ए संगमा को वर्ष 1996 में सर्वसम्मति से 11वीं लोकसभा का अध्यक्ष चुना गया था, और वे विपक्ष के पहले ऐसे सदस्य बने जिन्होंने यह पद संभाला।

प्रश्न? संविधान सदन में पी ए संगमा के चित्र का अनावरण किसने और कब किया था?
उत्तर: पी ए संगमा के चित्र का अनावरण भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 10 फरवरी 2014 को किया था, जिसे कलाकार विजेंद्र शर्मा ने बनाया था।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका के राजनीतिक संपादक हैं। वे संसद, सरकार और राज्यों की राजनीति पर नज़र रखते हैं।

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