
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में वित्तीय संस्थानों द्वारा दिए जाने वाले राहत उपायों की रिपोर्टिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब यह जानकारी CIMS पोर्टल के जरिए देनी होगी।
मुख्य बातें
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने प्राकृतिक आपदा राहत रिपोर्टिंग के लिए नया निर्देश जारी किया है।
- सभी विनियमित संस्थाओं को अब CIMS पोर्टल पर अर्धवार्षिक रिटर्न दाखिल करना होगा।
- सितंबर छमाही का रिटर्न 30 अक्टूबर तक और मार्च छमाही का रिटर्न 30 अप्रैल तक जमा करना होगा।
- अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के लिए पुरानी मासिक रिटर्न व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से बंद कर दी गई है।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में दिए जाने वाले वित्तीय राहत उपायों की रिपोर्टिंग प्रक्रिया को पूरी तरह से सुव्यवस्थित कर दिया गया है। केंद्रीय बैंक के ताजा निर्देशों के अनुसार, अब सभी विनियमित संस्थाओं (Regulated Entities) को आपदा राहत से जुड़े आंकड़े एक विशेष डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से साझा करने होंगे। इस कदम का उद्देश्य वित्तीय निगरानी प्रणाली को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से उन्नत बनाना है ताकि देश के विभिन्न हिस्सों में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मिलने वाली वित्तीय सहायता पर सटीक नजर रखी जा सके।
रिजर्व बैंक द्वारा नई रिपोर्टिंग व्यवस्था की शुरुआत
भारतीय रिज़र्व बैंक के नियमों के तहत, प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में राहत उपायों के लिए एक संशोधित विनियामक ढांचा तैयार किया गया है। पूर्व में जारी किए गए संशोधनों के आधार पर यह नई व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से प्रभावी हो चुकी है। इसके अंतर्गत, सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, लघु वित्त बैंकों, स्थानीय क्षेत्र बैंकों, सहकारी बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) को नए नियमों का पालन करना होगा। केंद्रीय बैंक का मानना है कि इस बदलाव से रिपोर्टिंग में आने वाली अशुद्धियां दूर होंगी और एक केंद्रीकृत मंच के माध्यम से आंकड़ों का संकलन तेजी से किया जा सकेगा।
वित्तीय संस्थानों को अब अपनी सभी गतिविधियों की जानकारी सेंट्रल इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (CIMS) पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। यह पोर्टल बैंक और वित्तीय संस्थानों के लिए डेटा जमा करने का मुख्य केंद्र बन चुका है। इसके जरिए बैंक आपदा प्रभावित ग्राहकों को दिए गए कर्ज के पुनर्गठन, स्थगन या अन्य राहत पैकेजों की पूरी जानकारी समय पर नियामक तक पहुंचाएंगे। संस्थाओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे जो भी डेटा पोर्टल पर दर्ज कर रही हैं, वह पूरी तरह से सटीक, सत्यापित और पूर्ण हो।
CIMS पोर्टल पर अर्धवार्षिक रिटर्न जमा करने के नियम
नई व्यवस्था के तहत, बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को अब मासिक के बजाय अर्धवार्षिक (Half-Yearly) आधार पर रिटर्न दाखिल करना होगा। भारतीय रिज़र्व बैंक के निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक छमाही समाप्त होने के 30 दिनों के भीतर यह रिपोर्ट सौंपनी अनिवार्य होगी। उदाहरण के लिए, 30 सितंबर को समाप्त होने वाली छमाही का रिटर्न 30 अक्टूबर तक जमा करना होगा, जबकि 31 मार्च को समाप्त होने वाली छमाही के लिए अंतिम तिथि 30 अप्रैल तय की गई है। इस समयावधि का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार की देरी से बचा जा सके।
आंतरिक निगरानी प्रणालियों को मजबूत करने के लिए संस्थानों से कहा गया है कि वे समय पर डेटा संग्रह, सत्यापन और समेकन के लिए उचित कदम उठाएं। पुरानी मासिक रिटर्न प्रणाली, जो मुख्य रूप से अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और लघु वित्त बैंकों पर लागू होती थी, उसे 1 जुलाई 2026 से आधिकारिक रूप से बंद कर दिया गया है। अब सभी संस्थाओं को केवल CIMS पोर्टल पर ही अपनी रिपोर्टिंग सुनिश्चित करनी होगी, जिससे देश भर में आपदा राहत उपायों का आकलन करना आसान हो जाएगा।
- सभी विनियमित संस्थाओं को CIMS पोर्टल पर अर्धवार्षिक आंकड़े देने होंगे।
- सितंबर छमाही का रिटर्न 30 अक्टूबर तक जमा करना अनिवार्य है।
- मार्च छमाही का रिटर्न जमा करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल तय की गई है।
- पुरानी मासिक रिटर्न व्यवस्था को 1 जुलाई 2026 से समाप्त कर दिया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? नई रिपोर्टिंग व्यवस्था किस तारीख से लागू हुई है?
उत्तर। यह संशोधित व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से प्रभावी हो चुकी है।
प्रश्न? रिपोर्ट किस पोर्टल पर जमा करनी होगी?
उत्तर। सभी विनियमित संस्थाओं को Centralised Information Management System (CIMS) पोर्टल पर रिपोर्ट जमा करनी होगी।
यह रिपोर्ट RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






