
बेंगलुरु में आयोजित तीसरे निवेशक गोलमेज सम्मेलन में कंपनियों ने ग्वालियर प्रोजेक्ट में गहरी रुचि दिखाई। 48 घंटे में समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया गया।
मुख्य बातें
- बेंगलुरु में आयोजित तीसरे निवेशक गोलमेज सम्मेलन में ₹700 करोड़ से ₹800 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए।
- मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 170 एकड़ भूमि पर भारत का पहला एकीकृत दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र विकसित किया जा रहा है।
- केंद्र सरकार चरण-1 के लिए ₹493 करोड़ की पूर्ण वित्तीय सहायता दे रही है, जबकि मध्य प्रदेश सरकार लगभग ₹8,000 करोड़ के प्रोत्साहन प्रदान कर रही है।
- प्रोजेक्ट के लिए बने विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) में मध्य प्रदेश सरकार की 51% और दूरसंचार विभाग की 49% हिस्सेदारी है।
- इससे पूर्व दिल्ली और मुंबई रोडशो में ₹5,500 करोड़ के निवेश और 18,000 रोजगार सृजन की प्रतिबद्धता मिल चुकी है।
दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दूरसंचार विभाग (DoT) ने कर्नाटका की राजधानी बेंगलुरु में तीसरे निवेशक गोलमेज सम्मेलन का सफल आयोजन किया। इस सम्मेलन का मुख्य केंद्र मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्थापित हो रहे भारत के पहले एकीकृत दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र में निवेश के नए अवसरों को पेश करना था। इस बैठक की सह-अध्यक्षता केंद्रीय संचार एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की।
ग्वालियर में दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र से क्या बदलेगा?
ग्वालियर में आकार ले रहा यह दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र भारत का पहला एकीकृत प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक क्लस्टर है। यह क्लस्टर 5जी और 6जी तकनीक, मोबाइल उपकरण, ऑप्टिकल फाइबर और सेमीकंडक्टर आधारित उपकरणों के निर्माण तथा अनुसंधान को एक ही छत के नीचे लाकर देश को दूरसंचार के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगा।
कार्यक्रम में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने कहा कि भारत अब केवल सेवाओं पर निर्भर रहने वाला देश नहीं रहा, बल्कि उत्पाद निर्माण करने वाले राष्ट्र के रूप में स्थापित हो रहा है। उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर सहकारी संघवाद की मिसाल पेश कर रही हैं। मध्य प्रदेश सरकार इस परियोजना के लिए निवेशकों को लगभग 8,000 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन और सब्सिडी प्रदान कर रही है।
दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र में ₹800 करोड़ के नए प्रस्ताव
बेंगलुरु में आयोजित रोडशो निवेशक संपर्क अभियान के पहले चरण का अंतिम पड़ाव था। इस तीसरे सम्मेलन में उद्योग जगत की कंपनियों की ओर से 700 करोड़ रुपये से 800 करोड़ रुपये तक के निवेश प्रस्ताव रखे गए हैं। कंपनियों के प्रबंधन द्वारा आंतरिक मूल्यांकन के बाद इन प्रस्तावों पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। कई टेक कंपनियों ने परियोजना स्थल का दौरा करने की योजना बनाई है।
केंद्रीय मंत्री ने निवेशकों को आश्वस्त किया कि यदि किसी भी कंपनी को इस परियोजना से जुड़ी कोई समस्या या प्रश्न होता है, तो सरकार 48 घंटों के भीतर उसका समाधान सुनिश्चित करेगी। उनका लक्ष्य ग्वालियर को केवल एक कारखाना केंद्र बनाना नहीं, बल्कि एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है जहां उद्योग और सरकार सीधे साझेदार के रूप में कार्य करें।
ग्वालियर टेलीकॉम क्लस्टर की मुख्य विशेषताएं
ग्वालियर के इस प्रोजेक्ट को विश्व स्तरीय औद्योगिक केंद्र के रूप में डिजाइन किया जा रहा है। इसकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- मुफ्त भूमि आवंटन: मध्य प्रदेश सरकार ने इस क्लस्टर के निर्माण के लिए 170 एकड़ भूमि मुफ्त उपलब्ध कराई है।
- केंद्रीय वित्तीय मदद: केंद्र सरकार पहले चरण के इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए ₹493 करोड़ की शत-प्रतिशत वित्तीय सहायता दे रही है।
- प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर: कंपनियों को तुरंत उत्पादन शुरू करने के लिए पहले से तैयार बुनियादी ढांचा मिलेगा।
- अनुसंधान और विकास केंद्र: यहाँ केवल असेंबलिंग नहीं होगी, बल्कि ‘डिजाइन इन इंडिया’ के तहत बौद्धिक संपदा (IP) का निर्माण होगा।
- आधुनिक तकनीक: 5जी, 6जी, ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क और सेमीकंडक्टर विनिर्माण पर विशेष जोर रहेगा।
दिल्ली और मुंबई गोलमेज सम्मेलन का रिपोर्ट कार्ड
बेंगलुरु से पहले दूरसंचार विभाग ने दिल्ली और मुंबई में भी निवेशक गोलमेज सम्मेलनों का आयोजन किया था। इन दोनों सम्मेलनों को मिलाकर उद्योग जगत से लगभग ₹5,500 करोड़ के निवेश का आश्वासन प्राप्त हुआ था। अनुमान है कि इस शुरुआती निवेश से क्षेत्र में 18,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
उल्लेखनीय है कि 30 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में दूरसंचार विभाग और मध्य प्रदेश सरकार के बीच प्रथम चरण की स्थापना के लिए एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे। तीन बड़े शहरों में हुए रोडशो के माध्यम से अब तक 24 से अधिक प्रमुख कंपनियों के साथ सीधी बातचीत पूरी की जा चुकी है।
क्वालकॉम का दौरा और सेमीकंडक्टर पर चर्चा
निवेशक गोलमेज बैठक की शुरुआत से पहले केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बेंगलुरु स्थित प्रसिद्ध सेमीकंडक्टर और दूरसंचार कंपनी क्वालकॉम के परिसर का दौरा किया। वहाँ उन्होंने कंपनी के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ स्वदेशी उत्पाद विकास और सेमीकंडक्टर क्षमता के विस्तार पर विचार-विमर्श किया।
सरकार का प्रयास है कि चिप डिजाइनिंग और अगली पीढ़ी की संचार प्रौद्योगिकियों में भारतीय कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़े। क्वालकॉम के साथ हुई बैठक में यह चर्चा की गई कि किस प्रकार वैश्विक टेक दिग्गज भारत के घरेलू विनिर्माण ढांचे के साथ तालमेल बिठा सकते हैं।
यह भी जानें: एसपीवी मॉडल और इसका असर
ग्वालियर में दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र के कुशल संचालन के लिए एक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) गठित किया गया है। इस एसपीवी में मध्य प्रदेश सरकार की 51 प्रतिशत और केंद्रीय दूरसंचार विभाग की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यह संस्थागत ढांचा यह तय करता है कि केंद्र और राज्य दोनों की प्रशासनिक शक्तियां प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने में इस्तेमाल हों।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य की भौगोलिक स्थिति देश के मध्य में होने के कारण लॉजिस्टिक्स के लिहाज से बेहद अनुकूल है। ग्वालियर में बुनियादी ढांचे का विस्तार होने से मध्य भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम सेक्टर का नया हब बनेगा, जिससे स्थानीय युवाओं को उच्च स्तरीय तकनीकी रोजगार प्राप्त होंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: देश का पहला एकीकृत दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र कहाँ बनाया जा रहा है?
उत्तर: यह मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 170 एकड़ भूमि पर विकसित किया जा रहा है।
प्रश्न 2: बेंगलुरु निवेशक सम्मेलन में कितना निवेश प्रस्तावित हुआ है?
उत्तर: तीसरे गोलमेज सम्मेलन में ₹700 करोड़ से ₹800 करोड़ के बीच के निवेश प्रस्ताव सामने आए हैं।
प्रश्न 3: इस परियोजना का संचालन कौन सी संस्था कर रही है?
उत्तर: इसके संचालन के लिए एक एसपीवी (SPV) बनाया गया है, जिसमें मध्य प्रदेश सरकार की 51% और दूरसंचार विभाग की 49% हिस्सेदारी है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






