
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की आर्थिक समावेशन पहल के तहत वंचित वर्गों को उद्यम शुरू करने के लिए करोड़ों रुपये की वित्तीय सहायता दी जा रही है।
मुख्य बातें
- अनुसूचित जातियों के लिए उद्यम पूंजी कोष की कुल राशि 750 करोड़ रुपये है, जो 4 प्रतिशत ब्याज पर 10 लाख से 15 करोड़ रुपये तक की सहायता देता है।
- पिछड़े वर्गों के लिए उद्यम पूंजी कोष 200 करोड़ रुपये का है जो 6 प्रतिशत ब्याज पर 20 लाख से 15 करोड़ रुपये तक की सहायता प्रदान करता है।
- अंबेडकर सामाजिक नवाचार और ऊष्मायन मिशन के तहत अनुसूचित जाति के युवा शोधकर्ताओं को 30 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाती है।
- स्माइल योजना के तहत भिक्षावृत्ति में लगे व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए 23 अक्टूबर 2023 से अब तक 46.16 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
देश के वंचित समुदायों के बीच उद्यमिता, आजीविका सृजन और पुनर्वास को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक समावेशन पहल के तहत सरकार द्वारा कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय अपने आर्थिक समावेशन प्रभाग के माध्यम से अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों के लोगों को अपने कारोबार खड़े करने के लिए रियायती दरों पर कर्ज और वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रहा है। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य समाज के हाशिये पर मौजूद लोगों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और उनके लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
आर्थिक समावेशन पहल क्या है और इससे किसे लाभ मिलता है?
आर्थिक समावेशन पहल के अंतर्गत सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय अनुसूचित जातियों के लिए उद्यम पूंजी कोष, पिछड़े वर्गों के लिए उद्यम पूंजी कोष और स्माइल योजना जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन करता है। इन योजनाओं का लाभ मुख्य रूप से अनुसूचित जाति (एससी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और भिक्षावृत्ति जैसे कार्यों में फंसे वंचित व्यक्तियों को मिलता है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल वित्तीय मदद देना नहीं, बल्कि इन समुदायों में उद्यमशीलता की संस्कृति विकसित करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
आर्थिक समावेशन प्रभाग की उप महानिदेशक सुश्री प्रतिमा गुप्ता के अनुसार, अनुसूचित जातियों के लिए उद्यम पूंजी कोष का कुल आकार 750 करोड़ रुपये है। यह कोष केवल 4 प्रतिशत की बेहद कम ब्याज दर पर 10 लाख रुपये से लेकर 15 करोड़ रुपये तक की भारी-भरकम वित्तीय सहायता प्रदान करता है। वित्त वर्ष 2014-15 से लेकर वित्त वर्ष 2025-26 के बीच इस कोष ने अनुसूचित जाति के उद्यमियों को नए व्यवसाय स्थापित करने और उत्पादक संपत्तियां तैयार करने में बड़ी मदद पहुंचाई है।
अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग के उद्यमियों के लिए कर्ज की स्थिति
मई 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, अनुसूचित जाति उद्यम पूंजी कोष से कुल 145 कंपनियों के लिए 613.02 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत की जा चुकी है, जिसमें से 437.74 करोड़ रुपये सीधे 123 कंपनियों को बांटे जा चुके हैं। इसके अलावा, 30 सितंबर 2020 को शुरू किए गए अंबेडकर सामाजिक नवाचार और ऊष्मायन मिशन के जरिए युवा शोधकर्ताओं और छात्रों के नवोन्मेषी विचारों को 30 लाख रुपये तक की मदद दी जाती है। इस मिशन के तहत 114 कंपनियों को 29.11 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है और 91 कंपनियों को 13.27 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं।
दूसरी ओर, पिछड़े वर्गों के लिए अलग से एक उद्यम पूंजी कोष अक्टूबर 2019 में शुरू किया गया था। इस 200 करोड़ रुपये के कोष के माध्यम से 6 प्रतिशत की ब्याज दर पर 20 लाख रुपये से लेकर 15 करोड़ रुपये तक का ऋण दिया जाता है। इस योजना के अंतर्गत अब तक 31 कंपनियों के लिए 142.88 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं और 19 कंपनियों को 70.23 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं। दोनों कोषों को मिलाकर लगभग 329 एससी उद्यमियों और 35 ओबीसी उद्यमियों को सीधा फायदा मिला है।
- अनुसूचित जाति उद्यम पूंजी कोष: कुल राशि 750 करोड़ रुपये, ब्याज दर 4 प्रतिशत।
- पिछड़ा वर्ग उद्यम पूंजी कोष: कुल राशि 200 करोड़ रुपये, ब्याज दर 6 प्रतिशत।
- अंबेडकर सामाजिक नवाचार मिशन: युवा शोधकर्ताओं को 30 लाख रुपये तक की सहायता।
- स्माइल योजना के तहत सहायता: 23 अक्टूबर 2023 से अब तक 46.16 करोड़ रुपये जारी।
रोजगार सृजन और स्माइल योजना का प्रभाव
इन तमाम सरकारी निवेशों और ऋण योजनाओं के जमीनी स्तर पर गहरे और सकारात्मक प्रभाव देखने को मिले हैं। इन कोषों के सहयोग से स्थापित उद्यमों ने करीब 800 करोड़ रुपये की स्थायी उत्पादक परिसंपत्तियों का निर्माण किया है। इन परिसंपत्तियों और व्यवसायों के जरिए लगभग 4,500 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं, जिससे अगले एक से डेढ़ दशक तक आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
इसके अतिरिक्त, सामाजिक न्याय मंत्रालय हाशिए पर पड़े व्यक्तियों की सहायता के लिए स्माइल योजना का भी संचालन कर रहा है। इस योजना का फोकस मुख्य रूप से भिक्षावृत्ति में जीवन बिताने वाले लोगों का व्यापक पुनर्वास करना है। इसमें उनकी पहचान करने से लेकर बचाव, सुरक्षित आश्रय, परामर्श, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और कौशल विकास जैसी जरूरी चीजें शामिल हैं। इस पहल के तहत 23 अक्टूबर 2023 से लेकर वित्त वर्ष 2025-26 तक केंद्र सरकार ने कुल 46.16 करोड़ रुपये की सहायता राशि जारी की है, जिसमें से अकेले वित्त वर्ष 2025-26 में 27.17 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? अनुसूचित जाति उद्यम पूंजी कोष के तहत कितनी ब्याज दर पर कर्ज मिलता है?
उत्तर। इस कोष के तहत केवल 4 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर 10 लाख रुपये से 15 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
प्रश्न? अंबेडकर सामाजिक नवाचार और ऊष्मायन मिशन कब शुरू किया गया था?
उत्तर। इस मिशन को 30 सितंबर 2020 को आरंभ किया गया था, जो अनुसूचित जाति के युवा शोधकर्ताओं और छात्रों को 30 लाख रुपये तक की सहायता देता है।
प्रश्न? स्माइल योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर। स्माइल योजना का मुख्य उद्देश्य भिक्षावृत्ति में लगे व्यक्तियों की पहचान, बचाव, आश्रय, कौशल विकास और आजीविका सहायता के जरिए उनका व्यापक पुनर्वास करना है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






