
वित्त मंत्रालय में वित्तीय सेवाएं विभाग के सचिव संजय लोहिया ने सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों के कामकाज की समीक्षा की।
मुख्य बातें
- बैठक की अध्यक्षता वित्त मंत्रालय में वित्तीय सेवाएं विभाग (डीएफएस) सचिव श्री संजय लोहिया ने की।
- यह समीक्षा बैठक 02 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित की गई थी।
- कंपनियों को लाभदायक व्यावसायिक क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने और इनकर्ड क्लेम अनुपात (ICR) कम करने की सलाह दी गई।
- बैठक में एनआईसीएल, यूआईआईसीएल, ओआईसीएल और एआईसीआईएल के सीएमडी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों के वित्तीय और व्यावसायिक प्रदर्शन की समीक्षा के लिए 02 सितंबर 2026 को एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले वित्तीय सेवाएं विभाग (डीएफएस) के सचिव श्री संजय लोहिया ने इस बैठक की अध्यक्षता की। बैठक के दौरान सभी व्यावसायिक क्षेत्रों में बीमा कंपनियों के प्रदर्शन, प्रमुख प्रदर्शन संकेतक (केपीआई), डिजिटल पहल और विभिन्न कार्यान्वयन से जुड़े मुद्दों का विस्तार से जायजा लिया गया। सरकार का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की कार्यकुशलता को बढ़ाना और वित्तीय स्थिति को मजबूत करना है।
बीमा कंपनियों के प्रदर्शन की समीक्षा
सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों के लिए वित्त मंत्रालय की यह बैठक बेहद अहम रही जिसमें वित्तीय वर्ष 2026 के लक्ष्यों और उपलब्धियों पर चर्चा की गई। पीआईबी के अनुसार, सचिव महोदय ने सभी कंपनियों को लाभदायक व्यावसायिक क्षेत्रों पर अपना ध्यान पूरी तरह से केंद्रित करने की सलाह दी। इसके साथ ही, इनकर्ड क्लेम अनुपात (ICR) को कम करने के लिए तुरंत उपयुक्त उपाय अपनाने को कहा गया ताकि कंपनियों के वित्तीय स्वास्थ्य में सुधार हो सके।
बैठक में सूचना प्रौद्योगिकी और अन्य डिजिटल पहलों पर होने वाले खर्च को अनुकूलित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों से कहा गया कि वे प्रौद्योगिकी के अधिक से अधिक इस्तेमाल और त्वरित डिजिटलीकरण को अपनाएं ताकि ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिल सकें। सचिव ने विभिन्न बीमा उत्पादों के बारे में जनता के बीच जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
बीमा कंपनियों की पहुंच बढ़ाने पर जोर
कम सेवा प्राप्त क्षेत्रों और वर्गों में बीमा कंपनियों की पहुंच बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया और अन्य मंचों का उपयोग करने की बात कही गई। संचार, प्रचार और ग्राहक संपर्क तंत्र में सुधार की जरूरत को रेखांकित करते हुए सचिव ने कहा कि आम जनता तक पहुंचना आज की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
- लाभदायक व्यावसायिक क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की सलाह।
- इनकर्ड क्लेम अनुपात (ICR) को कम करने के लिए उपाय अपनाना।
- डिजिटल पहलों और प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देना।
- त्रैमासिक आधार पर केपीआई फ्रेमवर्क के माध्यम से निगरानी।
कंपनियों को बीमा कवरेज और सघनता बढ़ाने के साथ-साथ सुरक्षा अंतराल को कम करने की सलाह भी दी गई। सभी सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों में एक सुदृढ़ और मानकीकृत केपीआई फ्रेमवर्क के माध्यम से प्रदर्शन निगरानी को मजबूत करने पर बल दिया गया। यह तय किया गया कि केपीआई कंपनियों के वित्तीय और गैर-वित्तीय प्रदर्शन का एक समान मूल्यांकन सुनिश्चित करें और इनकी समीक्षा हर तिमाही में की जानी चाहिए।
शिकायत निवारण और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति
ग्राहकों की शिकायतों के शीघ्र निवारण को सुनिश्चित करने और निवारण की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान केंद्रित करने की बात कही गई। बैठक में श्रीमती राजेश्वरी सिंह मुनि (सीएमडी, एनआईसीएल), श्री भूपेश एस. राहुल (सीएमडी, यूआईआईसीएल), श्री संजय जोशी (सीएमडी, ओआईसीएल), डॉ. लावण्या आर. मुंडयूर (सीएमडी, एआईसीआईएल) और श्री एस. शिवशंकर (ईडी, एनआईएसीएल) उपस्थित रहे। इसके अलावा डीएफएस के अतिरिक्त सचिव डॉ. देबासिस प्रुस्टी और विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर मौजूद थे।
सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा व्यवस्था का इतिहास और पृष्ठभूमि
भारत में सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों का इतिहास देश के आर्थिक ढांचे से गहराई से जुड़ा हुआ है। सरकार ने अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करने और जोखिम कवरेज को आम जनता तक पहुंचाने के लिए बीमा क्षेत्र का राष्ट्रीयकरण किया था। समय-समय पर सरकार द्वारा इन संस्थानों के कामकाज की समीक्षा की जाती है ताकि वित्तीय अनुशासन बना रहे और पॉलिसीधारकों के हितों की रक्षा हो सके। आज के दौर में जब डिजिटल परिवर्तन तेजी से हो रहा है, इन कंपनियों के लिए तकनीक को अपनाना और परिचालन लागत को नियंत्रित करना अनिवार्य हो गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? इस समीक्षा बैठक की अध्यक्षता किसने की थी? उत्तर। इस बैठक की अध्यक्षता वित्त मंत्रालय में वित्तीय सेवाएं विभाग (डीएफएस) के सचिव श्री संजय लोहिया ने की थी।
प्रश्न? बैठक में मुख्य रूप से किन मुद्दों पर चर्चा हुई? उत्तर। बैठक में वित्तीय प्रदर्शन, केपीआई, डिजिटल पहल, दावा अनुपात और ग्राहक शिकायत निवारण जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






