
लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने म्यांमार के संसदीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए द्विपक्षीय सहयोग, शांति प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।
मुख्य बातें
- म्यांमार संसद की अंतरराष्ट्रीय संबंध समिति के चेयरपर्सन डॉ. पिंट सान के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भारत आया।
- लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्राइड (PRIDE) के क्षमता निर्माण कार्यक्रम में भाग ले रहे प्रतिनिधियों से वार्ता की।
- म्यांमार में दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच तीन चरणों में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय चुनाव आयोजित किए गए।
- म्यांमार चुनाव में पहली बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली का उपयोग हुआ।
भारत म्यांमार संबंध को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने म्यांमार के उच्चस्तरीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत हमेशा अपने पड़ोसी देश म्यांमार में शांति, स्थिरता और राष्ट्रीय सुलह की प्रक्रिया का समर्थन करता रहा है। संसद भवन में आयोजित इस बैठक के दौरान भारत ने म्यांमार को लोकतांत्रिक संस्थाओं के विकास में हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।
भारत म्यांमार संबंध किस तरह मजबूत हो रहे हैं?
भारत म्यांमार संबंध दोनों देशों के बीच प्राचीन सभ्यतागत, सांस्कृतिक और बौद्ध धर्म के ऐतिहासिक संपर्कों पर टिके हुए हैं। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने म्यांमार के संसदीय प्रतिनिधिमंडल से वार्ता में यह बात दोहराई कि भारत पड़ोसी देश में शांति निर्माण, राष्ट्रीय सुलह और लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने की यात्रा में एक मजबूत तथा भरोसेमंद साझेदार बना रहेगा।
भारत म्यांमार संबंध और विदेश नीति के तीन मुख्य स्तंभ
द्विपक्षीय चर्चा के दौरान लोक सभा अध्यक्ष ने रेखांकित किया कि म्यांमार भारत की विदेश नीति के केंद्र में स्थित है। भारत की तीन प्रमुख विदेश नीतियों—’एक्ट ईस्ट’, ‘नेबरहुड फर्स्ट’ (पड़ोसी प्रथम) और ‘इंडो-पैसिफिक’—में म्यांमार एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इन तीनों नीतियों के माध्यम से भारत अपने पूर्वी पड़ोसियों के साथ रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को लगातार विस्तार दे रहा है।
द्विपक्षीय सहयोग का यह दायरा केवल राजनीतिक स्तर तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचा विकास और मानवीय सहायता जैसे व्यापक क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी जारी है। भारत ने हमेशा कठिन परिस्थितियों में म्यांमार को प्राथमिकता देते हुए सबसे पहले राहत सामग्री और सहायता पहुंचाई है। प्रथम प्रतिक्रियादाता के रूप में भारत की यह भूमिका द्विपक्षीय भरोसे को गहराई प्रदान करती है।
संसदीय संस्थाओं का सशक्तीकरण और प्राइड कार्यक्रम
म्यांमार का यह संसदीय प्रतिनिधिमंडल संसद के ‘प्राइड’ (PRIDE) संस्थान द्वारा आयोजित एक क्षमता निर्माण कार्यक्रम में हिस्सा लेने भारत आया है। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व म्यांमार संसद की अंतरराष्ट्रीय संबंध समिति के अध्यक्ष डॉ. पिंट सान कर रहे हैं। पीआईबी के अनुसार, लोक सभा सचिवालय और प्राइड के माध्यम से भारतीय संसद विदेशी सांसदों तथा विधायी अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करती है।
ओम बिरला ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि भारत अपनी संसदीय प्रक्रियाओं, नियमों, विधायी परंपराओं और लोकतांत्रिक अनुभवों को म्यांमार के साथ साझा करने के लिए तत्पर है। भारत का उद्देश्य यह है कि म्यांमार में मजबूत, पारदर्शी और समावेशी लोकतांत्रिक संस्थाओं का निर्माण हो सके। संसदीय प्रक्रियाओं के इस आदान-प्रदान से दोनों देशों के विधायी निकायों के बीच आपसी समझ और अधिक प्रगाढ़ होगी।
म्यांमार में हालिया चुनाव और तकनीकी सुधार
बैठक के दौरान लोक सभा अध्यक्ष ने म्यांमार में संपन्न हुए हालिया आम चुनावों का विशेष रूप से उल्लेख किया। म्यांमार में दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच तीन चरणों में राष्ट्रीय संसद और राज्य/क्षेत्रीय विधानसभाओं के लिए मतदान आयोजित किए गए थे।
इन चुनावों की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इसमें पहली बार आनुपातिक प्रतिनिधित्व (Proportional Representation) प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) का इस्तेमाल किया गया। ओम बिरला ने इसे म्यांमार की चुनावी व्यवस्था का एक ऐतिहासिक पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और पारदर्शी चुनाव प्रणाली को अपनाना लोकतांत्रिक ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
भारत म्यांमार संबंध की मुख्य विशेषताएं
- प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व: म्यांमार संसद की अंतरराष्ट्रीय संबंध समिति के चेयरपर्सन डॉ. पिंट सान।
- प्रशिक्षण पहल: लोक सभा के प्राइड (PRIDE) द्वारा क्षमता निर्माण कार्यक्रम।
- कूटनीतिक प्राथमिकता: नेबरहुड फर्स्ट, एक्ट ईस्ट और इंडो-पैसिफिक नीति का प्रमुख हिस्सा।
- चुनावी सुधार: दिसंबर 2025-जनवरी 2026 के चुनावों में ईवीएम और आनुपातिक प्रतिनिधित्व का प्रयोग।
- सहयोग के क्षेत्र: सुरक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी, विकास कार्य और मानवीय सहायता।
सभ्यतागत विरासत और भविष्य की संभावनाएं
भारत और म्यांमार की भौगोलिक सीमाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक गतिविधियां गहराई से जुड़ी हैं। बौद्ध धर्म के माध्यम से दोनों देशों के नागरिकों के बीच सदियों पुराना सांस्कृतिक नाता है। शीर्ष नेतृत्व के बीच नियमित उच्चस्तरीय दौरों और बैठकों से भारत म्यांमार संबंध को नई गति मिली है।
लोक सभा अध्यक्ष ने विश्वास व्यक्त किया कि म्यांमार प्रतिनिधिमंडल की यह भारत यात्रा दोनों देशों के बीच विधायी सहयोग को नया आयाम देगी। आने वाले समय में संसदीय प्रतिनिधिमंडलों का यह आदान-प्रदान न केवल विधायी समझ बढ़ाएगा, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया में क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: म्यांमार के संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किसने किया?
उत्तर: इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व म्यांमार संसद की अंतरराष्ट्रीय संबंध समिति के अध्यक्ष डॉ. पिंट सान ने किया।
प्रश्न: लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने म्यांमार के किन चुनावों का उल्लेख किया?
उत्तर: उन्होंने दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच तीन चरणों में आयोजित राष्ट्रीय संसद और राज्य विधानसभा चुनावों का उल्लेख किया।
प्रश्न: म्यांमार के हालिया चुनाव में कौन सी नई तकनीकों का प्रयोग हुआ?
उत्तर: म्यांमार के हालिया चुनावों में पहली बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली का उपयोग किया गया।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






