गुरूवार, सितम्बर 3, 2026

जल शक्ति सम्मेलन: पीएम नरेंद्र मोदी ने दिया डेटा गवर्नेंस और एआई पर जोर

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जल शक्ति सम्मेलन

पीएम नरेंद्र मोदी ने जल शक्ति मंत्रालय के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में एआई आधारित जल डेटा गवर्नेंस और जन आंदोलन का आह्वान किया।

मुख्य बातें

  • पीआईबी के अनुसार, पीएम मोदी ने जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता की।
  • जल क्षेत्र के आंकड़ों के मानकीकृत विश्लेषण और डेटा प्रबंधन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग करने का सुझाव दिया।
  • शहरी निकायों के लिए ‘चिंतन शिविर’, जन जागरूकता के लिए ‘जल उत्सव’ और गाद निकालने के लिए स्पष्ट एसओपी बनाने का निर्देश दिया।
  • केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने जल ढांचागत परियोजनाओं में तेजी लाने और ग्रामीण पेयजल योजनाओं के संस्थागत रखरखाव पर बल दिया।

जल शक्ति सम्मेलन के समापन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में टिकाऊ जल प्रबंधन, सहकारी संघवाद और जन भागीदारी को मजबूत करने का आह्वान किया। पीआईबी के अनुसार, जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय सम्मेलन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जल मंत्रियों तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया। यह आयोजन केंद्र और राज्य सरकारों के बीच आपसी तालमेल बढ़ाकर जल सुरक्षा हासिल करने की दिशा में एक बड़ी पहल है।

जल शक्ति सम्मेलन में प्रधानमंत्री का संबोधन

जल शक्ति सम्मेलन के समापन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एकीकृत जल प्रबंधन अपनाने का निर्देश दिया। उन्होंने डेटा संग्रह के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करने, गाद निकालने की स्पष्ट नीति बनाने और जल उत्सव को जन आंदोलन के रूप में चलाने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण और प्रबंधन के लिए व्यापक कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए स्पष्ट किया कि इस सम्मेलन से निकले कार्यान्वयन योग्य प्रस्तावों की निरंतर समीक्षा की जानी चाहिए। जल सुरक्षा के प्रयास किसी एक बार की गतिविधि तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि इनके लिए लगातार अनुश्रवण और फॉलो-अप की स्थायी व्यवस्था स्थापित की जानी चाहिए।

अपने गुजरात के मुख्यमंत्री काल के अनुभवों का उल्लेख करते हुए पीएम ने बताया कि सही योजना, पक्के इरादों, पर्याप्त संसाधनों और कुशल अधिकारियों के सहयोग से जल संकट की चुनौती को एक अवसर में बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि पानी की कमी का सामना कर रहे क्षेत्रों में यदि एकीकृत योजना बनाई जाए, तो जल सुरक्षा का लक्ष्य आसानी से प्राप्त हो सकता है।

जल शक्ति सम्मेलन से निकले प्रमुख निर्देश

जल शक्ति सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने आम जनता को जल संरक्षण अभियानों से जोड़ने के लिए ‘जल उत्सव’ जैसी सामाजिक पहलों को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। उनका मानना है कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित न रहकर एक जन आंदोलन बनना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने अंतर-राज्यीय अध्ययन दौरों को शुरू करने पर बल दिया। इसके तहत जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और किसानों को दूसरे राज्यों के सफल जल प्रबंधन मॉडलों का अध्ययन करने का अवसर मिलेगा।

इस जल शक्ति सम्मेलन में उच्च शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों की भूमिका को भी रेखांकित किया गया। प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि देश के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में जल प्रबंधन और जल शासन से जुड़े पाठ्यक्रमों का विस्तार किया जाए। इससे जल क्षेत्र के लिए कुशल कार्यबल और शोध-आधारित समाधान तैयार करने में मदद मिलेगी।

तकनीक, एआई और डेटा गवर्नेंस पर पीएम का जोर

जल शक्ति सम्मेलन के दौरान आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर विशेष चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने मजबूत जल डेटा गवर्नेंस विकसित करने की जरूरत बताई। इसके अंतर्गत जल क्षेत्र से संबंधित सभी प्रकार के आंकड़ों को एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एकत्र, व्यवस्थित और विश्लेषित किया जाएगा। उन्होंने इस प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग करने की सिफारिश की ताकि डेटा का मानकीकृत विश्लेषण संभव हो सके।

पीएम ने पानी की बचत करने वाली अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने की हिदायत दी। भारतीय निर्माताओं को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रदर्शनियां और कार्यशालाएं आयोजित करने का सुझाव दिया गया, जिनमें वैश्विक स्तर की सर्वोत्तम प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया जाए। इसके अतिरिक्त कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों में उपचारित अपशिष्ट जल के व्यवस्थित उपयोग को नियोजित बनाने का निर्देश भी दिया गया।

शहरी निकायों, गाद निकालने और बांध सुरक्षा पर नीतियां

शहरीकरण से उत्पन्न जल चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए प्रधानमंत्री ने शहरी स्थानीय निकायों हेतु विशेष ‘चिंतन शिविर’ आयोजित करने का प्रस्ताव रखा। बढ़ती आबादी और भविष्य की पेयजल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए शहरी निकायों को समय रहते तैयार करना बेहद जरूरी है। इस जल शक्ति सम्मेलन के माध्यम से स्थानीय निकायों को आधुनिक जल प्रबंधन की नीतियों से जोड़ने का प्रयास किया गया है।

जल ढांचागत तंत्र को मजबूत बनाने के लिए जलाशयों से गाद निकालने (डिसिल्टिंग) की प्रक्रिया को एक नियमित प्रशासनिक कार्यक्रम बनाने का निर्देश दिया गया। इसके लिए स्पष्ट नियम और मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) तैयार की जाएंगी। बांध सुरक्षा पर चर्चा करते हुए पीएम ने कहा कि प्रत्येक मानसून से पहले सुरक्षा संबंधी सभी एहतियाती उपाय पूरे किए जाएं और स्कूली पाठ्यक्रम में इस विषय को शामिल किया जाए।

जल शक्ति सम्मेलन के मुख्य नतीजे और विजन

पीआईबी द्वारा जारी सूचना के अनुसार, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने इस राष्ट्रीय सम्मेलन के चार प्रमुख नतीजों के बारे में जानकारी दी:

  • परियोजनाओं में तेजी: जल क्षेत्र से जुड़ी सभी बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से तेजी से पूरा करना।
  • जन आंदोलन का निर्माण: जल संरक्षण को केवल सरकारी योजना न मानकर नागरिकों के लगातार चलने वाले आंदोलन में बदलना।
  • पेयजल स्रोतों की स्थायित्व: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पीने के पानी के स्रोतों की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • संस्थागत रखरखाव: ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजनाओं के प्रभावी संचालन और रखरखाव (O&M) को संस्थागत रूप देना।

जल शक्ति सम्मेलन के इन चारों स्तंभों का उद्देश्य भारत के हर नागरिक तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है। ग्रामीण क्षेत्रों में नल से जल पहुंचाने की योजनाओं को टिकाऊ बनाने के लिए स्थानीय समुदायों और पंचायत स्तर पर जवाबदेही तय करने पर सहमति बनी है।

जल प्रबंधन की आवश्यकता और प्रशासनिक रोडमैप

भारत में जल संसाधनों का वितरण असंतुलित है। कई राज्यों में जहां मानसून के दौरान बाढ़ की स्थिति बनती है, वहीं कुछ हिस्से पूरे वर्ष सूखे का सामना करते हैं। ऐसे में जल शक्ति सम्मेलन जैसी पहल केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए एक मजबूत मंच प्रदान करती है। सहकारी संघवाद के इस मॉडल के जरिए जल बंटवारे और संरक्षण की सामूहिक रणनीति बनाने में मदद मिलती है।

भविष्य की जरूरतों को देखते हुए भूजल के अति-दोहन को रोकना, वर्षा जल संचयन को अनिवार्य बनाना और कृषि में सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देना अनिवार्य हो गया है। जल शक्ति सम्मेलन में दी गई हिदायतों के अनुसार, यदि राज्यों द्वारा इन सुधारों को धरातल पर उतारा जाता है, तो देश की जल सुरक्षा को आने वाले दशकों के लिए सुनिश्चित किया जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न? जल शक्ति सम्मेलन का आयोजन किस मंत्रालय द्वारा किया गया था?
उत्तर। इस राष्ट्रीय विभागीय जल शक्ति सम्मेलन का आयोजन भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा किया गया था, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की।

प्रश्न? पीएम मोदी ने जल प्रबंधन में किस आधुनिक तकनीक का उपयोग करने का सुझाव दिया?
उत्तर। प्रधानमंत्री ने मजबूत जल डेटा गवर्नेंस स्थापित करने और समान प्रारूप में आंकड़े जुटाकर उनका विश्लेषण करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग का सुझाव दिया।

प्रश्न? जल शक्ति सम्मेलन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने किन बातों पर जोर दिया?
उत्तर। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने जल अवसंरचना परियोजनाओं को गति देने, जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने, पेयजल स्रोतों की निरंतरता सुनिश्चित करने और ग्रामीण जल योजनाओं के रखरखाव को संस्थागत बनाने पर बल दिया।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक मामलों के संपादक हैं। वे संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही, सरकारी नीतियों, चुनाव, और भारत से जुड़ी बड़ी राष्ट्रीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्य-आधारित, संतुलित और स्रोत-सहित रिपोर्टिंग पर रहता है — हर लेख में वे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), संबंधित मंत्रालयों की विज्ञप्तियों और आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हैं। राय और विश्लेषण को वे समाचार से स्पष्ट रूप से अलग रखते हैं। सुझाव या तथ्य-सुधार के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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