
राजस्थान के झुंझुनूं निवासी कैलाश चंद्र ने स्वच्छता उद्यमी योजना के तहत सक्शन मशीन खरीदकर खुद का व्यवसाय शुरू किया है।
मुख्य बातें
- राजस्थान के झुंझुनूं जिले के 63 वर्षीय कैलाश चंद्र ने सीवर सफाई का काम छोड़कर मशीनी स्वच्छता व्यवसाय शुरू किया।
- उन्हें ट्रैक्टर-कम-सक्शन मशीन खरीदने के लिए ₹11.86 लाख की कुल लागत पर ₹5.93 लाख की पूंजीगत सब्सिडी मिली।
- वे नगर पंचायत उदयपुरवाटी क्षेत्र में सेवाएं दे रहे हैं और उन्होंने 2 स्थानीय युवाओं को रोजगार भी दिया है।
- ईएमआई और सभी परिचालन खर्च चुकाने के बाद वे हर महीने ₹8,000 से ₹10,000 की बचत कर रहे हैं।
स्वच्छता उद्यमी योजना के माध्यम से देश भर में सफाई कर्मचारियों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। पीआईबी के अनुसार राजस्थान के झुंझुनूं जिले के गुढ़ा गोड़जी स्थित हरिजन बस्ती निवासी 63 वर्षीय कैलाश चंद्र ने अत्यधिक शारीरिक श्रम और जोखिम भरे सीवर सफाई के काम को छोड़कर अपना खुद का मशीनी स्वच्छता उद्यम शुरू किया है। अनुसूचित जाति-वाल्मीकि समुदाय से आने वाले कैलाश चंद्र ने अपनी सीमित शिक्षा और आर्थिक तंगी के बावजूद आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित इस पहल ने उनके जीवन में एक बड़ा बदलाव ला दिया है।
स्वच्छता उद्यमी योजना क्या है और इससे कैसे मिल रहा लाभ?
स्वच्छता उद्यमी योजना नमस्ते (NAMASTE) पहल के तहत सफाई कर्मचारियों को मैकेनाइज्ड स्वच्छता उपकरण और सक्शन मशीनें खरीदने के लिए पूंजीगत सब्सिडी व ऋण सहायता प्रदान करती है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य खतरनाक सीवर सफाई को पूरी तरह समाप्त करना और सफाई कर्मचारियों को स्वरोजगार देकर उद्यमी बनाना है। इसके तहत लाभार्थियों को मशीनी स्वच्छता व्यवसाय स्थापित करने के लिए वित्तीय मदद दी जाती है।
कैलाश चंद्र ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा केवल छठी कक्षा तक पूरी की थी। अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए उन्होंने जीवन का एक बड़ा हिस्सा सीवर सफाई और स्वच्छता कार्यों में बिताया। कम आय, शारीरिक जोखिम और अनिश्चित रोजगार के बावजूद वे कई दशकों तक इस कठिन पेशे में लगे रहे। बढ़ती उम्र के साथ उनका स्वास्थ्य और वित्तीय स्थिति दोनों प्रभावित हो रहे थे। इसके अलावा सामाजिक चुनौतियाँ और स्वावलंबन की इच्छा ने उन्हें एक नए अवसर की तलाश करने के लिए प्रेरित किया।
कैलाश चंद्र की सफलता में स्वच्छता उद्यमी योजना की भूमिका
स्वच्छता उद्यमी योजना के तहत कैलाश चंद्र को 24 सितंबर 2025 को एक बड़ा वित्तीय अवसर प्राप्त हुआ। उन्हें सक्शन मशीन से लैस ट्रैक्टर खरीदने के लिए अग्रिम पूंजीगत सब्सिडी और ऋण सहायता प्रदान की गई। इस मशीनी सेटअप ने उन्हें असुरक्षित मैन्युअल सीवर सफाई से निकालकर एक आधुनिक स्वच्छता-सेवा उद्यमी के रूप में स्थापित कर दिया। अब वे केवल एक मजदूर नहीं हैं, बल्कि अपनी खुद की मशीनी स्वच्छता इकाई के मालिक हैं।
इस आधुनिक सक्शन मशीन की मदद से कैलाश चंद्र अब नगर पंचायत उदयपुरवाटी और झुंझुनूं जिले के आसपास के इलाकों में पेशेवर तरीके से सीवर सफाई और स्वच्छता सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। इस उपकरण ने न केवल उनके काम को सुरक्षित और आसान बनाया है, बल्कि उनकी आय सृजन क्षमता में भी जबरदस्त वृद्धि की है। अब वे अपने काम को पूर्ण सम्मान और गरिमा के साथ संचालित कर रहे हैं।
परियोजना लागत, सब्सिडी और रोजगार सृजन का गणित
स्वच्छता उद्यमी योजना के अंतर्गत कैलाश चंद्र को मिली कुल वित्तीय सहायता का विवरण इस प्रकार है:
- कुल परियोजना लागत: ₹11.86 लाख (ट्रैक्टर-कम-सक्शन मशीन हेतु)
- पूंजीगत सब्सिडी: ₹5.93 लाख (सरकार द्वारा अग्रिम वित्तीय मदद)
- ऋण राशि: ₹5.93 लाख (आसान किस्तों पर उपलब्ध बैंक ऋण)
- मासिक ईएमआई: ₹8,267 की नियमित किस्त
- स्थानीय रोजगार: 1 ड्राइवर (₹12,000 प्रति माह वेतन) और 1 हेल्पर (₹8,000 प्रति माह वेतन)
- शुद्ध मासिक बचत: सभी परिचालन खर्चों और ईएमआई के भुगतान के बाद ₹8,000 से ₹10,000 प्रति माह
इस वित्तीय मॉडल ने कैलाश चंद्र को आर्थिक रूप से पूरी तरह स्थिर बना दिया है। अपनी कमाई से वे न केवल अपना और अपनी पत्नी का खर्च आसानी से उठा पा रहे हैं, बल्कि अपने ऋण की ईएमआई चुकाने के बाद भी हर महीने एक अच्छी राशि बचाने में सफल हो रहे हैं। उनके इस व्यवसाय से दो अन्य परिवारों को भी आजीविका का साधन मिला है।
नमस्ते और स्वच्छता उद्यमी योजना का व्यापक प्रभाव
नमस्ते (National Action for Mechanised Sanitation Ecosystem) और स्वच्छता उद्यमी योजना का प्राथमिक लक्ष्य भारत भर के शहरों और कस्बों में सीवर व सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई प्रक्रिया को शून्य करना है। केंद्र सरकार का उद्देश्य है कि किसी भी सफाई मित्र को सीवर या सेप्टिक टैंक के भीतर बिना सुरक्षात्मक गियर और मशीनों के प्रवेश न करना पड़े। इसके लिए सफाई मित्रों को मशीनी उपकरणों के स्वामित्व का अवसर देकर उन्हें उद्यमियों के रूप में सशक्त बनाया जा रहा है।
ऐसी योजनाओं का सीधा सामाजिक और आर्थिक प्रभाव देखने को मिलता है। पारंपरिक रूप से सफाई कार्य में लगे श्रमिकों को जब आधुनिक तकनीक, वाहन और वित्तीय सब्सिडी का सहारा मिलता है, तो उनका सामाजिक स्तर बेहतर होता है। कैलाश चंद्र का उदाहरण यह स्पष्ट करता है कि उचित सरकारी समर्थन मिलने पर 63 वर्ष की उम्र में भी कोई व्यक्ति अपनी किस्मत बदल सकता है और अपने बच्चों पर आर्थिक रूप से निर्भर हुए बिना स्वाभिमान के साथ जीवन जी सकता है।
सुरक्षित कार्य वातावरण और भविष्य की संभावनाएँ
स्वच्छता उद्यमी योजना के माध्यम से मशीनीकरण को बढ़ावा मिलने से नगर निकायों को भी काफी सुविधा हो रही है। उदयपुरवाटी नगर पंचायत और झुंझुनूं के आसपास के क्षेत्रों में अब सीवर लाइनों और सेप्टिक टैंकों की सफाई मशीनों द्वारा समय पर और कुशलतापूर्वक पूरी की जा रही है। इससे जनस्वास्थ्य में सुधार होता है और जलभराव या सीवर जाम की समस्याओं का त्वरित समाधान संभव हो पाता है।
नमस्ते योजना के तहत सफाई कर्मचारियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरण और वित्तीय मार्गदर्शन भी दिया जाता है। इससे वे केवल मशीन चलाने में ही कुशल नहीं होते, बल्कि अपने व्यवसाय के प्रबंधन, खातों के रख-रखाव और ग्राहकों के साथ अनुबंध करने में भी सक्षम बनते हैं। कैलाश चंद्र की यह कहानी अन्य सफाई मित्रों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी है, जो अपने पारंपरिक कठिन कार्य को छोड़कर तकनीक-आधारित व्यवसाय अपनाने का सपना देखते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: स्वच्छता उद्यमी योजना क्या है?
उत्तर: स्वच्छता उद्यमी योजना नमस्ते (NAMASTE) कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित एक सरकारी योजना है, जो सफाई कर्मचारियों को मशीनी स्वच्छता उपकरण और सक्शन वाहन खरीदने के लिए ऋण तथा पूंजीगत सब्सिडी प्रदान करती है।
प्रश्न: स्वच्छता उद्यमी योजना के तहत कितनी सब्सिडी मिलती है?
उत्तर: इस योजना के अंतर्गत परियोजना लागत का 50 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी के रूप में प्रदान किया जाता है। जैसे कैलाश चंद्र के ₹11.86 लाख के प्रोजेक्ट में ₹5.93 लाख की सब्सिडी दी गई थी।
प्रश्न: स्वच्छता उद्यमी योजना का लाभ कौन उठा सकता है?
उत्तर: सफाई कर्मचारी, सीवर/सेप्टिक टैंक सफाईकर्मी और उनके आश्रित इस योजना के तहत मशीनी स्वच्छता व्यवसाय शुरू करने के लिए पात्र हैं।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






