शुक्रवार, सितम्बर 4, 2026

ग्रीन शिपिंग को बढ़ावा: सोनोवाल ने हरित बंदरगाहों की प्रगति समीक्षा की

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ग्रीन शिपिंग

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने टेरी के ग्वाल पहाड़ी परिसर का दौरा कर शून्य-उत्सर्जन शिपिंग कॉरिडोर और बंदरगाहों की हरित ईंधन अवसंरचना की समीक्षा की।

मुख्य बातें

  • केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने 3 सितंबर 2026 को गुरुग्राम स्थित टेरी परिसर का दौरा किया।
  • दीनदयाल, पारादीप और वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट पर हरित ईंधन बंकरिंग हब विकसित किए जा रहे हैं।
  • कामराजार पोर्ट लिमिटेड के कोयला टर्मिनल अब तटवर्ती विद्युत आपूर्ति सुविधा से सुसज्जित हुए।
  • एनसीओईजीपीएस और आरएमआई शून्य-उत्सर्जन शिपिंग कॉरिडोर के लिए रणनीति तैयार कर रहे हैं।

ग्रीन शिपिंग की दिशा में भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाने के उद्देश्य से केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गुरुग्राम स्थित ऊर्जा और संसाधन संस्थान (टेरी) के ग्वाल पहाड़ी परिसर का दौरा किया। 3 सितंबर 2026 को हुए इस दौरे में केंद्रीय मंत्री ने समुद्री क्षेत्र को कार्बन-मुक्त करने और वैकल्पिक ईंधनों को तेजी से अपनाने की व्यापक समीक्षा की। पीआईबी के अनुसार, केंद्रीय मंत्री ने इस अवसर की याद में परिसर में एक पौधा भी लगाया और अनुसंधान संस्थानों व बंदरगाह अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की।

ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर क्या है और भारत की क्या तैयारी है?

ग्रीन शिपिंग के तहत समुद्री जहाजों और बंदरगाहों के संचालन में पारंपरिक डीजल और भारी ईंधन तेल के बजाय अमोनिया, हाइड्रोजन और मेथेनॉल जैसे हरित ईंधनों का उपयोग किया जाता है। ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर ऐसे व्यापारिक समुद्री मार्ग हैं जहाँ बुनियादी ढाँचा और जहाज शून्य-उत्सर्जन तकनीकों से लैस होते हैं, जिससे समुद्री परिवहन में प्रदूषण को न्यूनतम किया जा सके।

इस समीक्षा दौरे के दौरान ग्रीन पोर्ट्स एंड शिपिंग के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओईजीपीएस) ने पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय को समुद्री क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए अपने चल रहे प्रोजेक्ट्स और आगामी योजनाओं का विस्तृत ब्योरा प्रस्तुत किया। इसके अलावा, रॉकी माउंटेन इंस्टीट्यूट (आरएमआई) ने कम और शून्य-उत्सर्जन वाले पोत परिवहन मार्गों को विकसित करने की अपनी रणनीति सामने रखी। आरएमआई स्वच्छ ईंधनों और नई तकनीकों को अपनाने में तेजी लाने के लिए लगातार काम कर रहा है।

ग्रीन शिपिंग को बढ़ावा देने में भारतीय बंदरगाहों की प्रगति

देश के प्रमुख बंदरगाहों ने हरित ईंधनों को अपनाने और आवश्यक बुनियादी ढाँचा तैयार करने की अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें तीन प्रमुख बंदरगाह अधिकारियों – दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी, पारादीप पोर्ट अथॉरिटी और वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट अथॉरिटी – ने हरित ईंधन बंकरिंग हब के निर्माण और वैकल्पिक समुद्री ईंधनों के लिए अवसंरचना को मजबूत करने के दिशा-निर्देश साझा किए।

कामराजार पोर्ट लिमिटेड ने अपनी एक विशेष उपलब्धि की जानकारी देते हुए बताया कि उसके कोयला टर्मिनलों को अब तटवर्ती विद्युत आपूर्ति (तट से बिजली आपूर्ति) सुविधाओं से पूरी तरह लैस कर दिया गया है। इस व्यवस्था के माध्यम से बंदरगाह पर लंगर डाले खड़े जहाज अपने ऑनबोर्ड डीजल जनरेटरों और इंजनों को बंद करके सीधे किनारे से विद्युत प्राप्त कर सकते हैं। इससे बंदरगाह क्षेत्र में होने वाले धुएँ और हानिकारक उत्सर्जन में बहुत बड़ी कमी आई है।

समुद्री क्षेत्र के लिए प्रमुख उपलब्धियाँ और लक्ष्य

मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बंदरगाहों में पर्यावरण-अनुकूल परिवर्तन के लिए निम्नलिखित प्रमुख कदम उठाए जा रहे हैं:

  • दीनदयाल, पारादीप और वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट: हरित ईंधन बंकरिंग सुविधाओं और स्टोरेज हब का तेज़ी से विकास।
  • कामराजार पोर्ट लिमिटेड: कोयला टर्मिनलों पर तटवर्ती विद्युत आपूर्ति सुविधा लागू जिससे ऑनबोर्ड जनरेटर का उपयोग बंद हुआ।
  • एनसीओईजीपीएस और आरएमआई की भागीदारी: शून्य-उत्सर्जन समुद्री कॉरिडोर के लिए तकनीकी अनुसंधान और रणनीति का निर्माण।
  • स्वच्छ ईंधन अवसंरचना: भविष्य में अमोनिया, हरित हाइड्रोजन और मेथेनॉल बंकरिंग की तैयारी।

ग्रीन शिपिंग नीति और वैश्विक कार्बन-मुक्ति लक्ष्य

समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि ग्रीन शिपिंग अब केवल एक विकल्प नहीं रह गया है, बल्कि यह वह अनिवार्य दिशा है जिसकी ओर पूरा विश्व तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत इस वैश्विक बदलाव का नेतृत्व करने का इरादा रखता है। भारत के बंदरगाहों को भविष्य के स्वच्छ ईंधनों के लिए खुद को समय रहते तैयार करना होगा, और इसमें टेरी जैसे ज्ञान भागीदार और शोध संस्थान मदद कर रहे हैं।

समुद्री परिवहन क्षेत्र पूरी दुनिया में माल ढुलाई का मुख्य माध्यम है, लेकिन इसके साथ ही यह वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में भी हिस्सेदारी रखता है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) द्वारा तय किए गए कार्बन-मुक्ति के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए ग्रीन शिपिंग के मानकों को अपनाना बेहद जरूरी हो गया है। भारत अपनी विशाल तटरेखा और रणनीतिक समुद्री स्थिति का लाभ उठाकर हिंद महासागर क्षेत्र में हरित समुद्री व्यापार का प्रमुख केंद्र बनना चाहता है।

मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, ग्रीन शिपिंग एजेंडा केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय बंदरगाहों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी भी बनाता है। जो बंदरगाह समय पर हरित ईंधन बंकरिंग और तटीय बिजली सुविधा प्रदान करेंगे, वे भविष्य में वैश्विक जहाजरानी कंपनियों की पहली पसंद बनेंगे। इससे भारत के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की दक्षता में सुधार होगा और परिचालन लागत में भी लंबी अवधि में कमी आएगी।

ग्रीन शिपिंग से भारत की तटीय अर्थव्यवस्था को लाभ

भारतीय बंदरगाहों पर ग्रीन शिपिंग पहलों के लागू होने से न केवल वायु प्रदूषण और समुद्री प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि तटीय क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। बंदरगाहों के आसपास सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर का उत्सर्जन घटने से तटीय शहरों की हवा साफ होगी। इसके अतिरिक्त, हरित ईंधन उत्पादन, भंडारण और बंकरिंग सुविधाओं के विकास से देश में नए हरित रोजगारों का सृजन होगा।

टेरी के ग्वाल पहाड़ी परिसर में आयोजित कार्यक्रम का समापन मंत्री, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और भाग लेने वाले बंदरगाह प्रतिनिधियों के बीच एक संवाद सत्र और दोपहर के भोजन के साथ हुआ। इस संवाद के दौरान भविष्य में बंदरगाहों, शोध संस्थानों और निजी उद्योग के बीच अधिक समन्वय स्थापित करने पर सहमति बनी ताकि सभी पहलों को तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: ग्रीन शिपिंग का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: ग्रीन शिपिंग का मुख्य उद्देश्य समुद्री परिवहन और बंदरगाह संचालन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण को समाप्त करना तथा हरित ईंधनों का उपयोग बढ़ाना है।

प्रश्न: किस बंदरगाह के कोयला टर्मिनल पर तटवर्ती विद्युत आपूर्ति शुरू की गई है?
उत्तर: कामराजार पोर्ट लिमिटेड के कोयला टर्मिनल पर तटवर्ती विद्युत आपूर्ति सुविधा शुरू की गई है, जिससे खड़े जहाजों को ऑनबोर्ड इंजन चलाने की आवश्यकता नहीं होती।

प्रश्न: कौन से तीन प्रमुख बंदरगाह हरित ईंधन बंकरिंग हब विकसित कर रहे हैं?
उत्तर: दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी, पारादीप पोर्ट अथॉरिटी और वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट अथॉरिटी हरित ईंधन बंकरिंग हब विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक मामलों के संपादक हैं। वे संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही, सरकारी नीतियों, चुनाव, और भारत से जुड़ी बड़ी राष्ट्रीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्य-आधारित, संतुलित और स्रोत-सहित रिपोर्टिंग पर रहता है — हर लेख में वे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), संबंधित मंत्रालयों की विज्ञप्तियों और आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हैं। राय और विश्लेषण को वे समाचार से स्पष्ट रूप से अलग रखते हैं। सुझाव या तथ्य-सुधार के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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