
करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। जानिए सरगी से लेकर चांद देखने तक की पूरी विधि।
मुख्य बातें
- व्रत की शुरुआत सूर्योदय से पहले सरगी खाकर की जाती है।
- पूरे दिन निर्जला उपवास रखा जाता है और शाम को कथा सुनी जाती है।
- चांद निकलने के बाद छलनी से दर्शन कर अर्घ्य दिया जाता है।
- स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं वाले लोगों को बिना पानी के उपवास से बचना चाहिए।
करवा चौथ विधि क्या है?
करवा चौथ विधि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर किए जाने वाले व्रत और पूजा के नियमों की पूरी प्रक्रिया है। इस परंपरा में महिलाएं अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु की कामना के लिए सूर्योदय से लेकर चंद्रदर्शन तक अन्न और जल का त्याग करती हैं।
करवा चौथ व्रत के लिए आवश्यक सामग्री
पूजा शुरू करने से पहले कुछ विशेष चीजों को इकट्ठा करना जरूरी होता है। सही सामग्री होने से अनुष्ठान बिना किसी बाधा के पूरा होता है।
- िमट्टी या पीतल का करवा और ढक्कन
- पूजा की थाली और छलनी
- दीपक, घी, और रुई की बत्ती
- रोली, अक्षत (चावल), और कुमकुम
- माता करवा के लिए श्रृंगार का सामान
- भोग के लिए मिठाई या फल
करवा चौथ विधि और चरण-दर-चरण तरीका
पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार इस व्रत को पूरे नियम के साथ पूरा किया जाता है। नीचे दिए गए चरणों का पालन करें।
- सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और सास द्वारा दी गई सरगी खाएं।
- पूरे दिन निर्जला या अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार उपवास रखें।
- शाम के समय घर के मंदिर या किसी स्वच्छ स्थान पर दीवार पर करवा चौथ का चित्र बनाएं या कैलेंडर लगाएं।
- मां गौरी, भगवान गणेश और करवा माता की मूर्ति स्थापित कर रोली और अक्षत से तिलक करें।
- करवे में जल भरकर और ढक्कन पर चीनी या शक्कर रखकर पूजा के स्थान पर रखें।
- संध्या के समय परिवार की बुजुर्ग महिला या कथावाचक से करवा चौथ की कथा सुनें।
- रात में चांद निकलने के बाद छलनी से चंद्रमा और पति का चेहरा देखें।
- चंद्रमा को अर्घ्य दें और पति के हाथों से जल ग्रहण करके व्रत खोलें।
करवा चौथ पूजा का महत्व
यह पर्व भारतीय संस्कृति में दाम्पत्य प्रेम और अटूट विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनती हैं और सोलह श्रृंगार करती हैं। आपसी रिश्तों में मिठास और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत बहुत खास माना गया है।
स्वास्थ्य और खानपान से जुड़ी सावधानियां
निर्जला व्रत रखना हर किसी के शरीर के अनुकूल नहीं होता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को बिना पानी का उपवास रखने से बचना चाहिए। आप चाहें तो फलाहार या केवल जल पीकर भी व्रत रख सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? करवा चौथ की शुरुआत किस समय होती है?
उत्तर। इस व्रत की शुरुआत सूर्योदय से पहले यानी ब्रह्म मुहूर्त में सरगी खाने के साथ होती है।
प्रश्न? क्या व्रत के दौरान पानी पिया जा सकता है?
उत्तर। पारंपरिक रूप से यह निर्जला व्रत है, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से जल या फल ग्रहण किए जा सकते हैं।
प्रश्न? करवा चौथ पर चांद देखना क्यों जरूरी है?
उत्तर। चंद्र दर्शन के बाद ही इस व्रत को पूरा माना जाता है और चांद को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है।
यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। कोई भी उपाय अपनाने, उपवास रखने या स्वास्थ्य संबंधी बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य विशेषज्ञ से सलाह ज़रूर लें।
यह लेख आज पत्रिका की एक्सप्लेनर डेस्क द्वारा सामान्य जागरूकता के लिए तैयार किया गया है। नियम और प्रक्रियाएं समय-समय पर बदल सकती हैं — कृपया आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें। सुधार/सुझाव: corrections@aajpatrika.com






