
पीआईबी के अनुसार, असम के कार्बी आंगलोंग जिले में एक युवा ने डिस्ट्रिक्ट डि-एडिक्शन सेंटर की मदद से नशे की लत और डिप्रेशन से उबरकर नया जीवन पाया है।
मुख्य बातें
- सिमहोन (बदला हुआ नाम) असम के कार्बी आंगलोंग जिले के 26 वर्षीय अनुसूचित जनजाति के लाभार्थी हैं।
- उन्हें 19 मई 2026 को ‘इंटीग्रेटेड सोसाइटी फॉर डेवलपमेंट’ डीडीएसी से मदद मिली थी।
- केंद्र ने उन्हें दवाइयों, ध्यान, काउंसलिंग, योग सत्रों और व्यावसायिक मार्गदर्शन का लाभ दिया।
- इस सहायता से उन्हें नशे की लत से बाहर निकलने और करियर के सपनों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिली।
असम के कार्बी आंगलोंग जिले में एक युवा ने नशा मुक्ति केंद्र के सहारे अपनी जिंदगी को नए सिरे से संवारने में बड़ी सफलता हासिल की है। पीआईबी के अनुसार, डिस्ट्रिक्ट डि-एडिक्शन सेंटर (डीडीएसी) से मिलने वाली समय पर मदद, काउंसलिंग और पुनर्वास सेवाओं ने युवाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है। असम के कार्बी आंगलोंग जिले के 26 वर्षीय अनुसूचित जनजाति के लाभार्थी सिमहोन (बदला हुआ नाम) ने नशे की लत और मानसिक तनाव से उबरकर एक नई दिशा की ओर कदम बढ़ाया है। इंटरमीडिएट तक शिक्षित सिमहोन पुलिस सेवा में शामिल होकर अपना भविष्य सुरक्षित करना चाहते थे, लेकिन गलत संगति और डिप्रेशन के कारण उनका जीवन प्रभावित हो गया था।
नशा मुक्ति केंद्र से कैसे बदली जिंदगी
नशा मुक्ति केंद्र की मदद से असम के कार्बी आंगलोंग के युवा सिमहोन ने नशे की लत और डिप्रेशन से रिकवरी का सफर तय किया है। सिमहोन को 19 मई 2026 को कार्बी आंगलोंग में डीडीएसी के रूप में संचालित सहायता-प्राप्त केंद्र ‘इंटीग्रेटेड सोसाइटी फॉर डेवलपमेंट’ से आवश्यक सहायता प्राप्त हुई थी। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक होने के बावजूद नशे की लत ने उनके सामने गंभीर चुनौतियाँ खड़ी कर दी थीं। इस केंद्र ने उन्हें दवाइयों, ध्यान, काउंसलिंग और योग सत्रों के माध्यम से एक व्यवस्थित और संरचित सहायता प्रदान की। नियमित फॉलो-अप सेवाओं ने उनके रिकवरी के संकल्प को और अधिक मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
कौशल और करियर का नया मार्ग
इलाज और काउंसलिंग के साथ-साथ युवाओं को आजीविका के अवसरों से जोड़ने के लिए व्यावसायिक मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाता है। केंद्र द्वारा दिए गए इस सहयोग ने सिमहोन को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनने और एक अर्थपूर्ण भविष्य के निर्माण के महत्व को समझने में मदद की। हालांकि अभी तक उनकी आय में किसी बदलाव की सूचना नहीं है, लेकिन उनमें दिशा की एक स्पष्ट समझ विकसित हो चुकी है। वे अब अपने करियर के सपनों को पूरा करने के लिए आवश्यक कदमों को बेहतर ढंग से समझ रहे हैं और रोजगार के अवसरों की तलाश के लिए खुद को पूरी तरह तैयार कर रहे हैं।
युवाओं के लिए पुनर्वास की महत्ता
नशीले पदार्थों के सेवन और मानसिक तनाव से जूझ रहे युवाओं के लिए समय पर उपचार पाना बेहद जरूरी होता है। नशा मुक्ति केंद्र जैसी संस्थाएं न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को सुधारती हैं, बल्कि मानसिक शांति और आत्मविश्वास बहाल करने में भी मदद करती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि जब किसी युवा को सही समय पर चिकित्सीय सलाह और पारिवारिक सहयोग मिलता है, तो वह समाज की मुख्यधारा में लौट सकता है। इस तरह के पुनर्वास केंद्र देश के विभिन्न हिस्सों में युवाओं को नशे के दलदल से बाहर निकालने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
- 19 मई 2026 को सिमहोन को केंद्र से सहायता मिली।
- केंद्र में योग, ध्यान और काउंसलिंग की सुविधा दी गई।
- युवा ने पुलिस सेवा में जाने का सपना देखा था।
- व्या व्यावसायिक मार्गदर्शन से रोजगार के अवसर तलाशने में मदद मिली।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? डीडीएसी का पूरा नाम क्या है और यह क्या करता है?
उत्तर। डीडीएसी का अर्थ डिस्ट्रिक्ट डि-एडिक्शन सेंटर है, जो नशीले पदार्थों के सेवन से प्रभावित युवाओं को उपचार, काउंसलिंग और पुनर्वास सेवाएं प्रदान करता है।
प्रश्न? सिमहोन को किस केंद्र से सहायता मिली थी?
उत्तर। उन्हें कार्बी आंगलोंग में संचालित सहायता-प्राप्त केंद्र ‘इंटीग्रेटेड सोसाइटी फॉर डेवलपमेंट’ से मदद मिली थी।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






