शुक्रवार, सितम्बर 4, 2026

तिरंगे का इतिहास और राष्ट्रीय ध्वज फहराने के नियम

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तिरंगे का इतिहास

तिरंगे का इतिहास हमारे स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय गौरव की कहानी कहता है। जानिए इसके सफर और फहराने के कानूनी नियमों को।

मुख्य बातें

  • तिरंगे का इतिहास कई पड़ावों से गुजरा है, जिसमें पहला रूप 1921 में सामने आया था।
  • वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज को 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा की बैठक में अपनाया गया था।
  • ध्वज का डिजाइन पिंगली वेंकैया ने तैयार किया था, जिसमें लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 है.
  • भारतीय ध्वज संहिता और राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम के तहत झंडा फहराने के कड़े नियम हैं।

तिरंगे का इतिहास भारत के स्वतंत्रता संग्राम, त्याग, शांति और समृद्धि के संकल्प की जीवंत कहानी है। आधुनिक भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को आज के स्वरूप में पहुंचने के लिए कई वैचारिक और राजनीतिक बदलावों से गुजरना पड़ा।

तिरंगे का इतिहास क्या है?

तिरंगे का इतिहास मुख्य रूप से स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान विकसित हुआ। साल 1921 में विजयवाड़ा में आयोजित कांग्रेस के सत्र के दौरान पिंगली वेंकैया ने एक झंडे का प्रारूप तैयार किया था, जो लाल और हरे रंग की दो पट्टियों से बना था। इसके बाद महात्मा गांधी के सुझाव पर इसमें सफेद पट्टी और चरखा जोड़ा गया। समय के साथ रंगों के अर्थ और डिजाइन में बदलाव होते रहे। अंततः 22 जुलाई 1947 को आयोजित संविधान सभा की बैठक में वर्तमान तिरंगे को स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में आधिकारिक तौर पर अपनाया गया।

राष्ट्रीय ध्वज का डिजाइन और बनावट

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज में तीन समान चौड़ाई की क्षैतिज पट्टियां हैं। सबसे ऊपर केसरिया रंग, बीच में सफेद रंग और सबसे नीचे हरा रंग होता है। सफेद पट्टी के केंद्र में गहरे नीले रंग का अशोक चक्र है, जिसमें 24 तीलियां होती हैं। इस चक्र को सारनाथ के अशोक स्तंभ से लिया गया है, जो गति और प्रगति का प्रतीक है। ध्वज की लंबाई और चौड़ाई का अनुपात हमेशा 3:2 होना अनिवार्य है। इसे केवल खादी, सूती, सिल्क या पॉलिएस्टर के हाथ से बने या मशीन से बने कपड़े से ही बनाया जा सकता है।

भारतीय ध्वज संहिता के मुख्य नियम

तिरंगे के सम्मान और उसके सही उपयोग के लिए भारतीय ध्वज संहिता (Flag Code of India) बनाई गई है। यह संहिता ध्वज को फहराने, प्रदर्शित करने और उपयोग करने के तौर-तरीके तय करती है। हर नागरिक को इन नियमों का पालन करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत तिरंगे के अपमान पर सजा का प्रावधान है।

झंडा फहराने और उतारने की प्रक्रिया

  1. सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच ही खुले स्थान पर राष्ट्रीय ध्वज को फहराया जाना चाहिए।
  2. ध्वज को हमेशा सम्मानजनक स्थिति में और तेजी से ऊपर उठाया जाना चाहिए, तथा नीचे उतारते समय पूरी सावधानी बरती जानी चाहिए।
  3. ध्वज कभी भी जमीन को नहीं छूना चाहिए और न ही पानी में गिरना चाहिए।
  4. फटे, कटे या मैले तिरंगे को फहराने की सख्त मनाही है।
  5. किसी अन्य झंडे को तिरंगे से ऊपर या उसके बराबर नहीं लगाया जा सकता।

राष्ट्रीय शोक और क्षतिग्रस्त ध्वज के नियम

देश में राष्ट्रीय शोक के घोषित होने पर राष्ट्रपति भवन, संसद भवन और सरकारी कार्यालयों पर तिरंगा आधा झुका रहता है। यदि कोई ध्वज पुराना या क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित किए बिना एकांत में पूरी गरिमा के साथ या तो जलाकर या जमीन में दफनाकर नष्ट किया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न? तिरंगे का डिजाइन किसने तैयार किया था? उत्तर। वर्तमान तिरंगे का डिजाइन पिंगली वेंकैया ने तैयार किया था।

प्रश्न? तिरंगे में अशोक चक्र का क्या अर्थ है? उत्तर। अशोक चक्र धर्म और न्याय के मार्ग पर आगे बढ़ने तथा निरंतर प्रगति करने का प्रतीक है।

प्रश्न? क्या रात के समय तिरंगा फहराया जा सकता है? उत्तर। नियमों में संशोधन के बाद अब खुले आसमान के नीचे या ऊंचे पोल पर रात के समय भी पर्याप्त रोशनी में तिरंगा फहराया जा सकता है।

यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी कानूनी विषय या नियम में बदलाव की स्थिति में आधिकारिक सरकारी स्रोतों की जांच अवश्य करें।

आधिकारिक जानकारी और नवीनतम अपडेट के लिए: https://www.mha.gov.in

यह लेख आज पत्रिका की एक्सप्लेनर डेस्क द्वारा सामान्य जागरूकता के लिए तैयार किया गया है। नियम और प्रक्रियाएं समय-समय पर बदल सकती हैं — कृपया आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें। सुधार/सुझाव: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक मामलों के संपादक हैं। वे संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही, सरकारी नीतियों, चुनाव, और भारत से जुड़ी बड़ी राष्ट्रीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्य-आधारित, संतुलित और स्रोत-सहित रिपोर्टिंग पर रहता है — हर लेख में वे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), संबंधित मंत्रालयों की विज्ञप्तियों और आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हैं। राय और विश्लेषण को वे समाचार से स्पष्ट रूप से अलग रखते हैं। सुझाव या तथ्य-सुधार के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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