
पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय यंत्रीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र नमस्ते योजना के तहत स्वच्छता कर्मियों के लिए व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण का पहला बैच शुरू हुआ है।
मुख्य बातें
- दुर्गापुर नगर निगम के स्वच्छता कर्मियों के लिए नमस्ते योजना के तहत पहला प्रशिक्षण बैच शुरू हुआ।
- प्रशिक्षण कार्यक्रम पांच दिनों का होगा जिसमें 30 घंटे का सत्र शामिल है और 70 प्रतिशत उपस्थिति पर 1,000 रुपये का वजीफा मिलेगा।
- पश्चिम बंगाल में 7,630 सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों का प्रोफाइल तैयार करने का कार्य पूरा कर लिया गया है।
- यह पहल सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय तथा सीएसआईआर-सीएमईआरआई के तकनीकी सहयोग से आयोजित की जा रही है।
नमस्ते योजना क्या है और पश्चिम बंगाल में इसकी शुरुआत कैसे हुई?
पश्चिम बंगाल में नमस्ते योजना के तहत व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया है। पीआईबी के अनुसार, यह कार्यक्रम दुर्गापुर नगर निगम के स्वच्छता कर्मियों के पहले बैच के साथ शुरू हुआ है। भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की नमस्ते योजना का मुख्य उद्देश्य खतरनाक सफाई प्रथाओं को समाप्त करना और स्वच्छता कर्मियों को सुरक्षित, सम्मानजनक और यंत्रीकृत कार्य वातावरण प्रदान करना है। इस पहल को वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद-केंद्रीय यांत्रिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीएमईआरआई) के तकनीकी सहयोग से लागू किया जा रहा है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं और नियम
उद्घाटन समारोह के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार में शहरी विकास और नगर मामलों की प्रभारी मंत्री श्रीमती अग्निमित्रा पॉल उपस्थित थीं। उनके साथ राज्य शहरी विकास एजेंसी, आसनसोल नगर निगम, दुर्गापुर नगर निगम और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (एनएसकेएफडीसी) के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान सफाईमित्रों को पहचान पत्र बांटे गए और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों के सही उपयोग का प्रदर्शन दिखाया गया। अधिकारियों ने सीएसआईआर-सीएमईआरआई द्वारा विकसित स्वच्छ भारत परीक्षण स्थल और प्रशिक्षण सुविधा का भी दौरा किया।
- प्रशिक्षण कार्यक्रम पांच दिनों तक चलेगा जिसमें कुल 30 घंटे का पाठ्यक्रम शामिल है।
- प्रत्येक बैच में अधिकतम 45 स्वच्छता कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- कम से कम 70 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र और 1,000 रुपये का वजीफा मिलेगा।
- पहले चरण में यह प्रशिक्षण दुर्गापुर, आसनसोल, बर्दवान, विधाननगर और चंदननगर नगर निगमों में लागू हो रहा है।
नमस्ते योजना का दायरा और पश्चिम बंगाल में प्रगति
पश्चिम बंगाल राज्य में इस योजना के तहत अब तक 7,630 सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों का प्रोफाइल तैयार करने का कार्य पूरा कर लिया गया है। चिन्हित किए गए सभी कर्मियों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) किट भी वितरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा राज्य की 124 नगरपालिकाओं और तीन छावनी बोर्डों में खतरनाक स्वच्छता प्रथाओं की रोकथाम के लिए जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की गई हैं। आपात स्थिति से निपटने के लिए स्वच्छता कर्मियों के रक्त समूह का विवरण एकत्र कर एक आपातकालीन डेटाबेस भी तैयार किया गया है।
संस्थागत सहयोग और भविष्य की रूपरेखा
इस पूरी पहल के तहत सीएसआईआर-सीएमईआरआई को स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा और स्वच्छता के यंत्रीकरण के लिए वन-स्टॉप संस्थागत केंद्र के रूप में कार्य करने का प्रस्ताव है। यह मंच तकनीकी और सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुसार उपकरणों के परीक्षण, मूल्यांकन और सत्यापन की सुविधा देगा। नमस्ते योजना के तीन मूलभूत स्तंभ सुरक्षा, गरिमा और यंत्रीकरण हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि किसी भी स्वच्छता कर्मी को सीवर या सेप्टिक टैंक में खतरनाक तरीके से हाथ से प्रवेश करने की आवश्यकता न पड़े।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? नमस्ते योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर। इस योजना का उद्देश्य स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा, गरिमा और कल्याण को बढ़ावा देना तथा खतरनाक सफाई प्रथाओं का पूरी तरह से उन्मूलन करना है।
प्रश्न? पश्चिम बंगाल में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कितने दिनों का है?
उत्तर। यह व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम पांच दिनों का है जिसमें 30 घंटे का प्रशिक्षण शामिल है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






