
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुंबई में समीक्षा बैठक के दौरान 6 करोड़ महिलाओं को लखपति बनाने का लक्ष्य रखा और बैंक लोन प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए नया रोडमैप जारी किया।
मुख्य बातें
- लखपति दीदी योजना के तहत 3.5 करोड़ महिलाएं लखपति बन चुकी हैं, अब लक्ष्य बढ़ाकर 6 करोड़ कर दिया गया है।
- अगले 5 वर्षों में स्वयं सहायता समूहों को 10 लाख करोड़ रुपये और व्यक्तिगत दीदियों को 1 लाख करोड़ रुपये का बैंक लोन मिलेगा।
- लोन प्रक्रिया में आने वाली बाधाओं और शिकायतों के निवारण के लिए हेल्प लाइन शुरू करने के निर्देश दिए गए।
- कमिटमेंट्स की समयबद्ध मॉनिटरिंग के लिए हर 3 महीने में वर्चुअल और हर 6 महीने में प्रत्यक्ष समीक्षा बैठक होगी।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय ने लखपति दीदी योजना के तहत 6 करोड़ ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का नया लक्ष्य निर्धारित किया है। मुंबई में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वयं सहायता समूहों को त्वरित, पर्याप्त और सुलभ बैंक लोन उपलब्ध कराने के लिए विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की। इस बैठक में ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े अधिकारियों, रिज़र्व बैंक और नाबार्ड के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर लोन प्रक्रिया की बाधाओं को दूर करने पर सहमति बनी।
लखपति दीदी योजना क्या है और नया लक्ष्य क्या है?
लखपति दीदी योजना केंद्र सरकार का एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों की ग्रामीण महिलाओं की वार्षिक आय को कम से कम 1 लाख रुपये तक पहुंचाना है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत अब तक 3.5 करोड़ महिलाएं यह उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं। सरकार ने अब 6 करोड़ महिलाओं को इस योजना के दायरे में लाकर लखपति बनाने का बड़ा लक्ष्य रखा है।
मुंबई की इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि विकसित भारत का निर्माण तभी संभव है जब ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक न्याय मिले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी संकल्प के अनुरूप लखपति दीदी योजना को अधिक व्यापक बनाया जा रहा है। बैठक में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी, कमलेश पासवान, महाराष्ट्र के ग्रामीण विकास मंत्री जयकुमार गोरे और राज्य मंत्री योगेश कदम मौजूद रहे। प्रशासनिक स्तर पर ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रोहित कंसल, संयुक्त सचिव अमित कुमार शुक्ला और स्वाति शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इसके अलावा नीति आयोग, भारतीय रिज़र्व बैंक, नाबार्ड और पीएफआरडीए के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में भाग लिया।
बैंक लोन और 11 लाख करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता
दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत अब तक देश की 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाएं 92 से 93 लाख स्वयं सहायता समूहों में संगठित हो चुकी हैं। बैंकिंग तंत्र द्वारा इन समूहों को अब तक 13.67 लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऋण वितरित किया जा चुका है। पीआईबी के अनुसार, नए वित्तीय रोडमैप के तहत अगले 5 वर्षों की कार्ययोजना तय की गई है:
- स्वयं सहायता समूहों को अगले 5 वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त बैंक लोन दिया जाएगा।
- व्यक्तिगत महिला उद्यमियों के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की लोन व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
- बैंकों द्वारा लक्ष्य से डेढ़ से दो गुना अधिक क्रेडिट आवंटन हासिल करने पर बैंकरों की सराहना की गई।
- वित्तीय समावेशन 2.0 के तहत उच्चस्तरीय वित्तीय सेवाएं ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाई जाएंगी।
लखपति दीदी योजना में बैंक स्तर की समस्याओं का समाधान
समीक्षा बैठक के दौरान ग्रामीण स्तर पर महिलाओं को लोन मिलने में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों पर भी चर्चा की गई। बैंक शाखाओं में कागजी कार्रवाई की जटिलता, लोन स्वीकृति में देरी और छोटी क्रेडिट लिमिट जैसी बाधाओं को दूर करने के लिए विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। केंद्रीय मंत्री ने बैंक शाखा के स्तर पर अधिकारियों को संवेदनशील बनाने और प्रशिक्षण देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लखपति दीदी योजना को सफल बनाने के लिए जिला स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठकों में निजी बैंकों की भागीदारी अनिवार्य होगी। महिला उद्यमियों की शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए एक समर्पित हेल्पलाइन शुरू करने का निर्देश भी दिया गया है।
योजना की प्रगति और प्रतिबद्धताओं की समीक्षा के लिए समयबद्ध मॉनिटरिंग ढांचा तैयार किया गया है। नाबार्ड, आरबीआई, बैंकरों और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा तय किए गए लक्ष्यों की हर 3 महीने में वर्चुअल माध्यम से और हर 6 महीने में प्रत्यक्ष बैठक के जरिए समीक्षा की जाएगी।
गरीबी उन्मूलन और वित्तीय समावेशन 2.0 का दृष्टिकोण
बैठक में लखपति दीदी योजना के अंतर्गत वित्तीय समावेशन 2.0 के एक्शन प्लान पर विस्तृत खाका खींचा गया, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में उच्चस्तरीय वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाना है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब तक 3.5 करोड़ दीदियों को लखपति बनाना अपेक्षाकृत आसान था, क्योंकि कई महिलाओं की आय पहले से ही 60 से 80 हजार रुपये थी। हालांकि, 6 करोड़ के नए लक्ष्य तक पहुंचने के लिए 30 हजार, 40 हजार और 50 हजार रुपये कमाने वाली कम आय वाली दीदियों को भी लखपति बनाना होगा।
सरकारी प्राथमिकताओं के तहत उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जहां गरीबी का प्रभाव अधिक है। अक्सर बैंक शाखाएं समृद्ध क्षेत्रों में आसानी से लोन दे देती हैं, लेकिन जहां अधिक जरूरत है वहां ध्यान कम जाता है। मंत्री चौहान ने ‘चलो जलाएं दीप वहां, जहां अभी भी अंधेरा है’ का आह्वान करते हुए बैंकरों से सामाजिक दायित्व की भावना के साथ काम करने की अपील की। उन्होंने दुष्यंत कुमार की पंक्तियों ‘कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो’ को याद करते हुए सभी अधिकारियों और बैंकरों का उत्साहवर्धन किया।
लखपति दीदी योजना की प्रगति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
लखपति दीदी योजना केवल एक वित्तीय सहायता कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के पुनरुत्थान का मुख्य आधार बन रही है। जब ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बनती हैं, तो उनकी आय का सीधा प्रभाव परिवार के स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर पर दिखाई देता है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं कृषि, डेयरी, हस्तशिल्प, स्थानीय विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में नए उपक्रम शुरू कर रही हैं। बैंक क्रेडिट लिंकेज और व्यक्तिगत वित्तपोषण से महिला सशक्तीकरण को गति मिल रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी की दर को तेजी से कम करने में मदद मिल रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? लखपति दीदी योजना का मुख्य लक्ष्य क्या है?
उत्तर: इस योजना का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों की महिला सदस्यों को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और बैंक क्रेडिट प्रदान करके उनकी वार्षिक आय को कम से कम 1 लाख रुपये तक पहुंचाना है। सरकार ने अब तक 3.5 करोड़ महिलाओं को लखपति बनाया है और 6 करोड़ का नया लक्ष्य रखा है।
प्रश्न? अगले 5 वर्षों में स्वयं सहायता समूहों को कितना बैंक लोन दिया जाएगा?
उत्तर: सरकार द्वारा तैयार किए गए नए रोडमैप के तहत अगले 5 वर्षों में स्वयं सहायता समूहों को 10 लाख करोड़ रुपये का बैंक लोन और व्यक्तिगत महिला उद्यमियों के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का लोन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रश्न? लखपति दीदी योजना के तहत समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
उत्तर: बैंक शाखाओं में लोन मिलने में हो रही देरी और कागजी बाधाओं को दूर करने के लिए एक हेल्पलाइन शुरू करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा बैंक अधिकारियों को प्रशिक्षित करने और हर 3 महीने में प्रगति की ऑनलाइन समीक्षा करने का प्रावधान किया गया है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






