
भारतीय रिज़र्व बैंक ने शहरी कोऑपरेटिव बैंकों के लिए निवेश पोर्टफोलियो नियमों में संशोधन किया है, जिससे बैंक अब आईडीपीआईसी की सदस्यता ले सकेंगे।
मुख्य बातें
- आरबीआई ने 2 सितंबर 2026 को जारी किए नए निर्देश
- शहरी कोऑपरेटिव बैंक आईडीपीआईसी की ले सकेंगे सदस्यता
- बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35ए के तहत दी गई शक्तियां
- गैर-एसएलआर प्रतिभूतियों में निवेश के नियमों में किया गया संशोधन
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने शहरी कोऑपरेटिव बैंकों के लिए निवेश पोर्टफोलियो नियमों में बड़ा बदलाव किया है जिसके तहत अब कोऑपरेटिव बैंक देश के केंद्रीय डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी प्लेटफॉर्म की सदस्यता प्राप्त कर सकेंगे। यह कदम डिजिटल लेनदेन को सुरक्षित बनाने और धोखाधड़ी से निपटने के लिए उठाया गया है। केंद्रीय बैंक की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इन नए निर्देशों का उद्देश्य यूसीबी क्षेत्र को मजबूत करना और तकनीकी सुरक्षा को बढ़ाना है।
कोऑपरेटिव बैंक और आईडीपीआईसी सदस्यता के नए नियम
कोऑपरेटिव बैंक भारतीय डिजिटल भुगतान खुफिया निगम यानी आईडीपीआईसी के शेयर हासिल करके अपनी सदस्यता पक्की कर सकते हैं। पीआईबी के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक ने 2 सितंबर 2026 को यह संशोधन निर्देश जारी किए हैं। ये निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू हो चुके हैं और देश भर के सभी शहरी सहकारी बैंकों पर लागू होते हैं। इस बदलाव से वित्तीय क्षेत्र में सुरक्षा का दायरा और अधिक व्यापक हो जाएगा।
बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35ए के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए आरबीआई ने यह कदम उठाया है। बैंक नियामक ने सार्वजनिक हित को सर्वोपरि रखते हुए मौजूदा निर्देशों में संशोधन करने का निर्णय लिया। इससे पहले नवंबर 2025 में जारी किए गए निवेश पोर्टफोलियो दिशा-निर्देशों के चैप्टर आठ में गैर-एस एल आर प्रतिभूतियों के संबंध में प्रावधान तय किए गए थे। अब उन प्रावधानों में आईडीपीआईसी और अंब्रेला संगठनों के शेयरों को शामिल किया गया है।
शहरी सहकारी बैंकों के लिए निवेश के नए विकल्प
- आईडीपीआईसी की सदस्यता के लिए इक्विटी शेयरों का अधिग्रहण करना
- बाजार बुनियादी ढांचा कंपनियों के शेयर खरीदना
- सहकारी बैंकों के लिए अंब्रेला संगठन के शेयरों में निवेश
- राज्य सहकारी बैंकों और केंद्रीय सहकारी बैंकों की सदस्यता लेना
डिजिटल भुगतान के बढ़ते दायरे के साथ सुरक्षा चुनौतियां भी तेजी से सामने आ रही हैं। ऐसे में भारतीय डिजिटल भुगतान खुफिया निगम को देश के केंद्रीय मंच के रूप में स्थापित किया गया है। कोऑपरेटिव बैंक इस प्लेटफॉर्म से जुड़कर धोखाधड़ी के मामलों की पहचान और रोकथाम में तेजी ला सकेंगे। आरबीआई के इस फैसले से सहकारी बैंकिंग ढांचे को तकनीक के मोर्चे पर एक नई मजबूती मिलने की पूरी उम्मीद है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? शहरी कोऑपरेटिव बैंकों के लिए नए संशोधन निर्देश कब से लागू हुए हैं?
उत्तर। भारतीय रिज़र्व बैंक के ये नए संशोधन निर्देश 2 सितंबर 2026 से प्रभावी हो गए हैं।
प्रश्न? कोऑपरेटिव बैंक किस संस्था की सदस्यता ले सकेंगे?
उत्तर। कोऑपरेटिव बैंक अब भारतीय डिजिटल भुगतान खुफिया निगम यानी आईडीपीआईसी की सदस्यता ले सकेंगे।
यह रिपोर्ट RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






