बुधवार, सितम्बर 16, 2026

सीएसआईआर प्रौद्योगिकी हस्तांतरण: उद्योगों को मिलीं 4 नई स्वदेशी तकनीकें

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सीएसआईआर प्रौद्योगिकी हस्तांतरण

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद ने चमड़ा प्रसंस्करण, इस्पात अपशिष्ट और सड़क सुरक्षा से जुड़ी चार स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का उद्योग में हस्तांतरण किया है।

मुख्य बातें

  • सीएसआईआर-सीएलआरआई ने क्रोमियम अपशिष्ट से प्रोटीन-आधारित सिंथेटिक आयरन बनाने की तकनीक उद्योग को सौंपी।
  • सीएसआईआर-सीआरआरआई ने चार पहिया वाहनों के लिए चकाचौंध कम करने वाला ‘क्लैरिविज़र’ उपकरण विकसित किया।
  • ऑनसाइट गड्ढे भरने के लिए दो पैकेट वाला ‘टू-पैक’ कोल्ड मिक्स पेश किया गया, जिसमें गर्म मिश्रण संयंत्र की आवश्यकता नहीं होती।
  • इस्तेमाल किए जा चुके पिकलिंग एसिड से पिगमेंट-ग्रेड आयरन ऑक्साइड और अमोनियम क्लोराइड प्राप्त करने की प्रक्रिया साझा की गई।

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में महत्वपूर्ण सीएसआईआर प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की प्रक्रिया संपन्न की। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य प्रयोगशालाओं में तैयार किए गए वैज्ञानिक शोधों को व्यावसायिक और औद्योगिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराना है। इस अवसर पर सीएसआईआर-केंद्रीय चमड़ा अनुसंधान संस्थान (CSIR-CLRI), चेन्नई और सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CSIR-CRRI), नई दिल्ली द्वारा विकसित चार प्रमुख स्वदेशी तकनीकों को उद्योग जगत को सौंपा गया।

सीएसआईआर प्रौद्योगिकी हस्तांतरण: मुख्य बातें क्या हैं?

सीएसआईआर प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के तहत भारतीय वैज्ञानिक संस्थानों द्वारा विकसित चार प्रमुख तकनीकों को व्यावसायिक उपयोग के लिए उद्योग जगत को हस्तांतरित किया गया है। इनमें चार पहिया वाहनों में चकाचौंध कम करने वाला क्लैरिविज़र उपकरण, सड़कों के गड्ढे भरने के लिए ऑनसाइट टू-पैक कोल्ड मिक्स, चमड़ा अपशिष्ट से प्रोटीन-आधारित सिंथेटिक टैनिन और इस्पात उद्योग के अपशिष्ट पिकलिंग एसिड से उपयोगी रसायन बनाने की प्रक्रिया शामिल है।

यह कार्यक्रम सीएसआईआर मुख्यालय के एसएसबी सभागार में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) की सचिव और सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी ने संबोधित किया। उन्होंने प्रयोगशालाओं में विकसित समाधानों को सीधे औद्योगिक उत्पादन से जोड़ने और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में योगदान देने की दिशा में इसे एक बड़ा कदम बताया।

सीएसआईआर-सीएलआरआई की दो प्रमुख अपशिष्ट प्रबंधन प्रौद्योगिकियां

केंद्रीय चमड़ा अनुसंधान संस्थान (CSIR-CLRI), चेन्नई ने औद्योगिक कचरे को उपयोगी संसाधनों में बदलने से जुड़ी दो नवोन्मेषी तकनीकें प्रस्तुत कीं। चमड़ा उद्योग में क्रोमियम के छिलके एक प्रमुख ठोस अपशिष्ट समस्या बने हुए हैं क्योंकि ये आसानी से जैविक रूप से नष्ट नहीं होते। हालांकि, इनमें उच्च गुणवत्ता वाला कोलेजन प्रोटीन मौजूद होता है। सीएलआरआई द्वारा विकसित नई प्रक्रिया के माध्यम से इस अपशिष्ट से क्रोमियम-मुक्त प्रोटीन हाइड्रोलाइसेट प्राप्त किया जाता है। इसके बाद इसे ऐक्रेलिक, फेनोलिक और मेलामाइन-आधारित सिंथेटिक आयरन में बदला जाता है, जिसका इस्तेमाल चमड़े की पुनः टैनिंग प्रक्रिया में सफलतापूर्वक किया जा सकता है।

संस्थान ने इस तकनीक का परीक्षण 100 से 200 किलोग्राम के पायलट पैमाने पर पूरा किया है, जबकि 1,500 किलोग्राम के वाणिज्यिक पैमाने पर भी इसका सफल सत्यापन हो चुका है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस तकनीक के प्रयोग से टैनिंग के बाद निकलने वाले अपशिष्ट जल में कुल घुलनशील ठोस (TDS) की मात्रा में 50 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। यह पेटेंट प्राप्त तकनीक पूरी तरह उद्योग द्वारा मान्य है और व्यावसायिक लाइसेंसिंग के लिए उपलब्ध है।

सीएलआरआई की दूसरी तकनीक इस्पात प्रसंस्करण के दौरान उत्पन्न होने वाले अत्यधिक अम्लीय अपशिष्ट, जिसे प्रयुक्त पिकलिंग एसिड कहा जाता है, के पुनर्मूल्य संवर्धन पर आधारित है। इस नई प्रक्रिया के माध्यम से खतरनाक पिकलिंग एसिड में मौजूद लोहे और क्लोराइड को अलग करके पिगमेंट-ग्रेड आयरन ऑक्साइड तथा अमोनियम क्लोराइड जैसे मूल्यवान रसायनों में परिवर्तित किया जा सकता है। यह तकनीक खतरनाक औद्योगिक कचरे के सुरक्षित निस्तारण के साथ-साथ पर्यावरण प्रदूषण को कम करने में मदद करती है।

सीएसआईआर-सीआरआरआई के नवाचार: सड़क सुरक्षा और त्वरित मरम्मत

केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CSIR-CRRI), नई दिल्ली ने सड़क अवसंरचना और यातायात सुरक्षा को बेहतर बनाने के उद्देश्य से दो प्रमुख प्रौद्योगिकियों का हस्तांतरण किया। पहला नवाचार चार पहिया वाहनों के लिए डिजाइन किया गया ‘क्लैरिविज़र’ है। यह वाहन के भीतर इस्तेमाल होने वाला एक चकाचौंध विरोधी उपकरण है, जो सामने से आने वाली तेज रोशनी को नियंत्रित करता है। इसे इस तरह तैयार किया गया है कि यह गाड़ी के मूल उपकरण निर्माता (OEM) सन वाइज़र के समान आसानी से फिट हो जाता है और इसके लिए वाहन की संरचना में कोई बदलाव नहीं करना पड़ता।

दूसरा नवाचार ‘टू-पैक ऑनसाइट पॉटहोल फिलिंग मिक्स’ है, जो सड़कों पर बने गड्ढों की मरम्मत के लिए ठंडे प्रयोग की सुविधा प्रदान करता है। इसमें प्रयुक्त सामग्री दो अलग-अलग पैकेट में दी जाती है, जिन्हें मरम्मत के स्थान पर तुरंत मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। पार पारंपरिक गर्म मिश्रण विधियों में हॉट मिक्स प्लांट और अत्यधिक ईंधन की आवश्यकता होती थी, जबकि इस कोल्ड मिक्स तकनीक से ऊर्जा की बचत होती है और कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है। सॉल्वेंट-मुक्त होने के कारण यह सामग्री पर्यावरण के अनुकूल है और इसके इस्तेमाल से यातायात को बहुत जल्द फिर से शुरू किया जा सकता है।

इसका असर: उद्योग और पर्यावरण पर व्यापक प्रभाव

हस्तांतरित की गई ये चारों प्रौद्योगिकियां सर्कुलर इकोनॉमी यानी चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों को मजबूत करती हैं। उद्योग जगत के लिए इनके उपयोग से उत्पादन लागत में कमी आने के साथ-साथ टिकाऊ मानकों का पालन करना आसान होगा।

  • अपशिष्ट जल में टीडीएस (TDS) के स्तर में 50 प्रतिशत तक की कमी से चमड़ा उद्योग की पर्यावरण संबंधी चिंताएं दूर होंगी।
  • सड़क मरम्मत में हॉट मिक्स प्लांट की निर्भरता समाप्त होने से ऊर्जा की खपत घटेगी।
  • औद्योगिक अम्लीय कचरे का मूल्यवान वर्णक (पिगमेंट) रसायनों में रूपांतरण होने से आयात निर्भरता कम होगी।
  • वाहन चालकों को चकाचौंध से मुक्ति मिलने से रात्रि कालीन सड़क दुर्घटनाओं में कमी आ सकती है।

सीएसआईआर प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का व्यापक दृष्टिकोण

सभागार को संबोधित करते हुए सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी ने इस बात पर जोर दिया कि अनुसंधान प्रयोगशालाओं और निजी उद्योग के बीच मजबूत साझेदारी ही वैज्ञानिक उपलब्धियों को जन-सामान्य तक पहुंचाने का मार्ग है। सीएसआईआर का लक्ष्य प्रयोगशालाओं में किए गए शोध को जल्द से जल्द वाणिज्यिक उत्पादन का हिस्सा बनाना है ताकि देश के बुनियादी ढांचे, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक संवर्द्धन में इसका प्रत्यक्ष लाभ दिखे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: सीएसआईआर प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम के तहत किन संस्थानों ने अपनी तकनीकें हस्तांतरित की हैं?
उत्तर: इस कार्यक्रम में चेन्नई स्थित सीएसआईआर-केंद्रीय चमड़ा अनुसंधान संस्थान (CSIR-CLRI) और नई दिल्ली स्थित सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CSIR-CRRI) ने अपनी तकनीकें उद्योग को सौंपी हैं।

प्रश्न: टू-पैक ऑनसाइट पॉटहोल फिलिंग मिक्स तकनीक पारंपरिक सड़क मरम्मत से कैसे अलग है?
उत्तर: पारंपरिक तरीकों में हॉट मिक्स प्लांट और उच्च तापमान की आवश्यकता होती है, जबकि टू-पैक ऑनसाइट मिक्स को बिना गर्म किए सीधे घटनास्थल पर दो पैकेट मिलाकर गड्ढे भरने के लिए प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न: क्रोमियम अपशिष्ट तकनीक से चमड़ा उद्योग को क्या फायदा होगा?
उत्तर: यह तकनीक क्रोमियम युक्त ठोस अपशिष्ट को प्रोटीन-आधारित टैनिंग एजेंट में बदल देती है और अपशिष्ट जल में टीडीएस (TDS) की मात्रा को 50 प्रतिशत तक घटाती है।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक मामलों के संपादक हैं। वे संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही, सरकारी नीतियों, चुनाव, और भारत से जुड़ी बड़ी राष्ट्रीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्य-आधारित, संतुलित और स्रोत-सहित रिपोर्टिंग पर रहता है — हर लेख में वे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), संबंधित मंत्रालयों की विज्ञप्तियों और आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हैं। राय और विश्लेषण को वे समाचार से स्पष्ट रूप से अलग रखते हैं। सुझाव या तथ्य-सुधार के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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