
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए दो सप्ताह का ऑनलाइन अल्पकालिक इंटर्नशिप कार्यक्रम शुरू किया है। इसमें 100 चयनित छात्र हिस्सा ले रहे हैं।
मुख्य बातें
- राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने सितंबर 2026 में दो सप्ताह का ऑनलाइन अल्पकालिक इंटर्नशिप कार्यक्रम शुरू किया।
- देशभर के 1,000 से अधिक आवेदकों में से विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमियों के 100 छात्रों का चयन किया गया।
- एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यन और अन्य आयोग सदस्यों ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
- दो सप्ताह की अवधि में 20 विशेषज्ञ वक्ताओं द्वारा 30 व्याख्यान दिए जाएंगे और पुलिस स्टेशन व तिहाड़ जेल का वर्चुअल दौरा होगा।
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए दो सप्ताह का ऑनलाइन अल्पकालिक एनएचआरसी इंटर्नशिप कार्यक्रम सितंबर 2026 में शुरू कर दिया है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, यह उद्घाटन समारोह नई दिल्ली स्थित आयोग के मुख्यालय मानव अधिकार भवन में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में देश भर के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के चयनित छात्र ऑनलाइन माध्यम से भाग ले रहे हैं।
एनएचआरसी इंटर्नशिप 2026 की प्रमुख विशेषताएं
एनएचआरसी इंटर्नशिप का यह दो सप्ताह का ऑनलाइन अल्पकालिक कार्यक्रम विश्वविद्यालय के 100 चयनित छात्रों के लिए शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम के लिए 1,000 से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। चयनित छात्रों को मानवाधिकारों के व्यावहारिक पहलुओं, संवैधानिक मूल्यों और प्रशासनिक चुनौतियों की समझ प्रदान करने के लिए विशेष व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे।
उद्घाटन समारोह में एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यन, आयोग के सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) विद्युत रंजन सारंगी, श्रीमती विजया भारती सायनी, महासचिव पीयूष गोयल, संयुक्त सचिव साइदिंगपुई छकछुआक और उप सचिव विनीथा ओट्टापुरक्कल कल्लाडा उपस्थित रहे।
समारोह का उद्घाटन और अध्यक्ष का संदेश
एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यन ने इंटर्नशिप में शामिल हुए छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें इस कार्यक्रम में शामिल होने के मूल उद्देश्य पर विचार करना चाहिए। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे सीखने के अवसरों का अधिकतम उपयोग करें। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम अपने उद्देश्य में तब सफल माना जाएगा जब छात्र समाज की घटनाओं और परिस्थितियों को मानवाधिकारों के दृष्टिकोण से देखना शुरू करेंगे।
न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यन ने कहा कि किसी भी एक खबर या घटना की अलग-अलग व्याख्याएं हो सकती हैं। इसीलिए सही जानकारी और जागरूकता बेहद जरूरी है, जिससे समाज में स्थिति की बेहतर समझ विकसित होती है और व्यक्ति सार्थक योगदान देने में सक्षम बनता है।
व्याख्यान श्रृंखला और वर्चुअल अध्ययन दौरे
संयुक्त सचिव साइदिंगपुई छकछुआक ने दो सप्ताह की इस कार्यशाला की रूपरेखा पेश की। इस ऑनलाइन प्रशिक्षण सत्र में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, शिक्षाविदों, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, एनएचआरसी अधिकारियों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों और विषय विशेषज्ञों सहित 20 प्रमुख वक्ता शामिल होंगे। ये विशेषज्ञ कुल 30 व्याख्यान देंगे।
केवल सैद्धांतिक जानकारी देने तक ही यह प्रशिक्षण सीमित नहीं रहेगा। छात्रों को प्रशासनिक और न्यायिक जमीनी हकीकत समझाने के लिए विशेष वर्चुअल दौरे भी कराए जाएंगे:
- पुलिस स्टेशन की कार्यप्रणाली, दैनिक प्रक्रियाओं और चुनौतियों को समझने के लिए आभासी दौरा।
- तिहाड़ जेल का वर्चुअल दौरा, जिससे कैदियों के अधिकारों और जेल प्रशासन की स्थिति का अध्ययन किया जा सके।
- मानवाधिकार संरक्षण से जुड़े विभिन्न नागरिक और न्यायिक संस्थानों की गतिविधियों का ऑनलाइन जायजा।
संवैधानिक मूल्यों और मानवाधिकारों का व्यावहारिक प्रयोग
आयोग के सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) विद्युत रंजन सारंगी ने कहा कि इंटर्न के जीवन में मानवाधिकारों के मूल भाव को समझना अत्यंत आवश्यक है। केवल किताबी जानकारी होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जीवन के हर पड़ाव पर मानवाधिकार मूल्यों को सही ढंग से लागू करने के लिए व्यावहारिक अनुभव हासिल करना पड़ता है।
आयोग की सदस्य विजया भारती सायनी ने जोर देकर कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को गरिमा के साथ जीने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे केवल कानून की किताबों तक सीमित न रहें। उन्हें जमीनी स्तर पर चीजों को देखने, सुनने, सवाल पूछने, उनका विश्लेषण करने और संवेदनशीलता के साथ काम करने की आदत डालनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व केवल संविधान की प्रस्तावना में लिखे शब्द नहीं हैं, बल्कि इन्हें दैनिक जीवन में उतारना आवश्यक है।
महासचिव पीयूष गोयल ने मानवाधिकारों को एक विस्तृत और संवेदनशील विषय बताया। उन्होंने छात्रों से एकजुट होकर काम करने और मानवीय गरिमा को मजबूत बनाने में अपना योगदान देने की अपील की।
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) के बारे में
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग भारत में मानवाधिकारों के संरक्षण और संवर्धन के लिए गठित एक स्वतंत्र स्वायत्त संस्था है। इसकी स्थापना मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत 12 अक्टूबर 1993 को की गई थी। आयोग का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।
एनएचआरसी का मुख्य कार्य देश में संविधान या अंतरराष्ट्रीय संधियों द्वारा गारंटीकृत जीवन, स्वतंत्रता, समानता और व्यक्तिगत गरिमा से जुड़े अधिकारों की रक्षा करना है। आयोग मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच करता है, पीड़ित व्यक्तियों को राहत दिलाने की सिफारिश करता है, और सरकारी तंत्र में मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य करता है।
छात्रों के लिए इसका असर और एनएचआरसी इंटर्नशिप का महत्व
इस तरह के अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों से कानून, सामाजिक कार्य, राजनीति विज्ञान, मानविकी और अन्य विषयों की पढ़ाई कर रहे छात्रों को मानवाधिकारों के कानूनी और सामाजिक पक्षों को सीधे समझने का अवसर मिलता है। चयन प्रक्रिया में विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमियों के छात्रों को शामिल किए जाने से आपस में विभिन्न दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान होता है।
ऑनलाइन प्रारूप होने के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले छात्र बिना यात्रा किए नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय आयोग के शीर्ष विशेषज्ञों से सीधे जुड़ पाते हैं। जेल और पुलिस स्टेशन के वर्चुअल दौरे से उन्हें बिना मौके पर जाए प्रशासनिक व्यवस्था की व्यावहारिक चुनौतियों को देखने का अवसर मिलता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: एनएचआरसी इंटर्नशिप 2026 की अवधि कितनी है?
उत्तर: यह सितंबर 2026 में आयोजित किया जा रहा दो सप्ताह का ऑनलाइन अल्पकालिक कार्यक्रम है।
प्रश्न: इस ऑनलाइन इंटर्नशिप के लिए कितने छात्रों का चयन किया गया है?
उत्तर: 1,000 से अधिक आवेदनों में से विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमियों के कुल 100 छात्रों को चुना गया है।
प्रश्न: एनएचआरसी इंटर्नशिप में किस प्रकार की गतिविधियां शामिल हैं?
उत्तर: इसमें 20 विशेषज्ञ वक्ताओं द्वारा 30 व्याख्यान दिए जाएंगे और पुलिस स्टेशन व तिहाड़ जेल का वर्चुअल दौरा कराया जाएगा।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






