
गुजरात के लोथल में बन रहे राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर की दूसरी शासी परिषद की बैठक में केंद्रीय मंत्री सरबानंदा सोनोवाल ने निर्माण कार्यों और अंतरराष्ट्रीय समझौतों की समीक्षा की।
मुख्य बातें
- लोथल में समुद्री विरासत परिसर (NMHC) के चरण 1A का 82% कार्य पूरा हुआ, 31 अक्टूबर 2026 की नई समयसीमा तय की गई।
- पुर्तगाल, यूएई, नीदरलैंड और सिंगापुर समेत 13 देशों के साथ कलाकृतियों और शोध सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए।
- परिसर में 1,492 ऐतिहासिक कलाकृतियां स्थापित की जाएंगी, जिन्हें जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
- परियोजना में दुनिया का सबसे ऊंचा प्रकाशस्तंभ संग्रहालय, 5D डोम थिएटर, कोस्टल स्टेट पवेलियन और इको रिसॉर्ट शामिल होंगे।
- धोलेरा एक्सप्रेसवे का निर्माण पूरा हो गया है और एएसआई द्वारा लोथल में 70% उत्खनन कार्य पूरा कर लिया गया है।
गुजरात के ऐतिहासिक स्थल लोथल में बन रहे समुद्री विरासत परिसर (NMHC) के प्रथम चरण का लगभग 82 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सरबानंदा सोनोवाल ने राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर सोसाइटी की दूसरी शासी परिषद की बैठक की अध्यक्षता करते हुए इस परियोजना की विस्तृत समीक्षा की। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, कार्यान्वयन एजेंसियों को इस महत्वाकांक्षी परियोजना के चरण 1A को 31 अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
लोथल में बन रहे समुद्री विरासत परिसर का उद्देश्य क्या है?
गुजरात के लोथल में विकसित हो रहा समुद्री विरासत परिसर भारत की 5,000 वर्ष पुरानी समुद्री सभ्यता, नौवहन इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने की एक वैश्विक पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य प्राचीन लोथल बंदरगाह के ऐतिहासिक महत्व को पुनर्जीवित करना और भारत को समुद्री ज्ञान, शिक्षा, कूटनीति तथा अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
समुद्री विरासत परिसर के निर्माण की वर्तमान स्थिति
केंद्रीय मंत्री सरबानंदा सोनोवाल ने बताया कि जून 2025 में आयोजित पहली शासी परिषद की बैठक के बाद से परियोजना ने तेजी से प्रगति की है। सोसाइटी ने आयकर छूट, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और नीति आयोग के दर्पण पोर्टल पर पंजीकरण जैसी सभी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं। इससे भविष्य के लिए संस्थागत ढांचा मजबूत हुआ है।
साइट पर जारी निर्माण गतिविधियों में चरण 1A का कार्य अंतिम दौर में है। हालांकि, गैलरी 4 और गैलरी 6, लोथल टाउन का निर्माण तथा एक्वाटिक थीमिंग का काम अभी बाकी है, जिस पर तेजी से काम चल रहा है। प्रदर्शनी के लिए 1,492 प्रामाणिक कलाकृतियों को चिन्हित कर तैयार कर लिया गया है। मंत्री ने इन कलाकृतियों की शीघ्र स्थापना की मंजूरी देने के निर्देश दिए हैं ताकि आगंतुक निर्धारित समय पर भारत के समुद्री इतिहास को देख सकें।
13 देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समझौते
भारत की इस सांस्कृतिक पहल को वैश्विक स्तर पर बड़ा समर्थन मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत अब तक 13 प्रमुख देशों के साथ समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। इनमें शामिल देश हैं:
- पुर्तगाल और नीदरलैंड
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ओमान
- वियतनाम, थाईलैंड और सिंगापुर
- डेनमार्क, जर्मनी और इटली
- इज़राइल, दक्षिण कोरिया और न्यूजीलैंड
इसके अतिरिक्त 35 से अधिक अन्य देशों के साथ साझेदारी की बातचीत अग्रिम चरण में है। इन समझौतों के माध्यम से कलाकृतियों के आदान-प्रदान, जहाजों के प्रतिकृति मॉडलों, शोध साझेदारी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा। इसके जरिए यह परिसर समुद्री कूटनीति के एक प्रभावी माध्यम के रूप में उभर रहा है।
द्वितीय चरण: 5D डोम थिएटर और दुनिया का सबसे ऊंचा प्रकाशस्तंभ संग्रहालय
बैठक में चरण 1B और चरण 2 के मास्टर प्लान की समीक्षा भी की गई। इस भाग में पर्यटन और शिक्षा के आधुनिक घटकों को शामिल किया गया है। प्रकाशस्तंभ एवं प्रकाशयान महानिदेशालय (DGLL) के सहयोग से एक भव्य प्रकाशस्तंभ संग्रहालय बनाया जा रहा है, जिसमें दुनिया का सबसे ऊंचा प्रकाशस्तंभ संग्रहालय बनने की क्षमता है।
इसके अलावा भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय (IMU) के सहयोग से एक समुद्री अनुसंधान संस्थान (MRI) स्थापित किया जाएगा। पर्यटकों के लिए 5D डोम थिएटर, तटीय राज्यों के अलग-अलग पवेलियन, एक म्यूज़ियोटेल (संग्रहालय आधारित होटल) और इको-रिसॉर्ट का निर्माण भी इस योजना का हिस्सा है।
कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर में प्रगति
इस परिसर तक पहुंचने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। धोलेरा एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जिससे यात्रियों को सुगम मार्ग मिलेगा। वहीं हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की अंतिम योजना तैयार की जा रही है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा लोथल के प्राचीन टीले पर की जा रही खुदाई का लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। गुजरात सरकार बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क कनेक्टिविटी, बिजली आपूर्ति, जल व्यवस्था और पर्यटक सुविधाओं के विकास में निरंतर सहयोग दे रही है। शासी परिषद ने परियोजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए एनएमएचसी उपनियमों को भी अपनी मंजूरी दे दी है।
इसका असर: आम पर्यटकों और शोधकर्ताओं को क्या फायदा मिलेगा?
लोथल का यह परिसर सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि इतिहास प्रेमियों, छात्रों और पर्यटकों के लिए एक बड़ा अनुभव केंद्र बनने वाला है। सिंधु घाटी सभ्यता का लोथल बंदरगाह दुनिया के सबसे पुराने जहाजी गोदियों (डॉक्यार्ड) में से एक माना जाता है।
जब यह परिसर आम जनता के लिए खुलेगा, तो यहां आने वाले लोग हजारों साल पुरानी भारतीय नौवहन तकनीकों को जीवंत रूप में देख सकेंगे। इससे स्थानीय रोजगार, हस्तशिल्प और गुजरात के पर्यटन उद्योग को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही समुद्री विज्ञान और पुरातत्व के छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुसंधान केंद्र भारत में ही उपलब्ध होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर गुजरात में कहां स्थित है?
उत्तर: यह परिसर गुजरात के अहमदाबाद जिले में स्थित ऐतिहासिक सिंधु घाटी सभ्यता स्थल लोथल में बनाया जा रहा है।
प्रश्न: समुद्री विरासत परिसर के पहले चरण के पूरा होने की समयसीमा क्या है?
उत्तर: शासी परिषद के अनुसार इसके चरण 1A को पूरा करने की संशोधित समयसीमा 31 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है।
प्रश्न: क्या लोथल परियोजना में विदेशी देश भी सहयोग कर रहे हैं?
उत्तर: हां, पुर्तगाल, यूएई, सिंगापुर और नीदरलैंड समेत 13 देशों के साथ कलाकृतियों और तकनीक के आदान-प्रदान के लिए समझौते किए गए हैं।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






