
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बाजार में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने ईरान के राष्ट्रपति की पुत्री जहरा पेज़ेशकियान का स्वागत किया और कला-शिल्प प्रदर्शनी दिखाई।
मुख्य बातें
- केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने नई दिल्ली के राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय में ब्रिक्स बाजार का दौरा कराया।
- ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान की पुत्री जहरा पेज़ेशकियान इस आयोजन में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं।
- भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत आयोजित इस बाजार में सदस्य और सहयोगी देशों की शिल्पकला प्रदर्शित की गई।
- केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सांस्कृतिक आदान-प्रदान और कला प्रदर्शनी की जानकारी दी।
केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय में आयोजित ब्रिक्स बाजार में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान की पुत्री जहरा पेज़ेशकियान का औपचारिक स्वागत किया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने उन्हें ब्रिक्स के सदस्य देशों और साझेदार राष्ट्रों द्वारा लगाई गई सांस्कृतिक और शिल्प प्रदर्शनियों का भ्रमण कराया। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, यह आयोजन भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शृंखला का एक हिस्सा है।
ब्रिक्स बाजार क्या है और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?
ब्रिक्स बाजार नई दिल्ली के राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय में आयोजित एक विशेष सांस्कृतिक और व्यापारिक प्रदर्शनी है, जहां ब्रिक्स समूह के सदस्य देशों की पारंपरिक कला, शिल्प और सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आपसी सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना तथा स्थानीय कारीगरों और दस्तकारों को एक अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करना है।
राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय में ब्रिक्स बाजार की खास झलकियां
नई दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय में आयोजित इस प्रदर्शनी में विभिन्न देशों के कारीगरों ने अपने पारंपरिक उत्पादों की स्टॉल लगाईं। केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने जहरा पेज़ेशकियान को भारत की समृद्ध हस्तशिल्प परंपराओं के साथ-साथ अन्य भागीदार देशों के पवेलियन दिखाए। इस भ्रमण के दौरान दोनों नेताओं और प्रतिनिधियों ने विभिन्न देशों की कलाकृतियों और पारंपरिक वस्त्रों के बारे में जानकारी ली।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात साझा करते हुए अन्नपूर्णा देवी ने लिखा कि ब्रिक्स बाजार कला, शिल्पकला और सांस्कृतिक संबंधों का एक बेहतरीन उत्सव रहा। उन्होंने कहा कि यह बाजार ब्रिक्स देशों और उनके साझेदार राष्ट्रों की समृद्ध परंपराओं तथा सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने का बड़ा अवसर प्रदान करता है, जिससे सदस्य देश एक-दूसरे के और करीब आते हैं।
ईरान और भारत के सांस्कृतिक रिश्तों में ब्रिक्स बाजार की भूमिका
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान की पुत्री जहरा पेज़ेशकियान की इस आयोजन में उपस्थिति कूटनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ब्रिक्स समूह के विस्तार के बाद ईरान इसका एक प्रमुख सदस्य देश बन चुका है। भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक रूप से व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं, और इस तरह के आयोजनों से दोनों देशों की नई पीढ़ी के बीच सांस्कृतिक समझ बढ़ती है।
राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय में प्रदर्शनी देखने के दौरान ईरानी प्रतिनिधि ने भारतीय हस्तशिल्प, लकड़ी की नक्काशी, पारंपरिक बुनाई और धातु कला में गहरी रुचि दिखाई। केंद्रीय मंत्री ने उन्हें भारत के विभिन्न राज्यों की लोक कलाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों के बारे में विस्तार से बताया।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 और सांस्कृतिक आदान-प्रदान
वर्ष 2026 में भारत ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता कर रहा है। इस अध्यक्षता के अंतर्गत आर्थिक और राजनीतिक बैठकों के साथ-साथ सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। भारत का प्रयास है कि ब्रिक्स के माध्यम से न केवल सरकारें बल्कि देशों के आम नागरिक, कलाकार और कारीगर भी एक-दूसरे से जुड़ें।
ब्रिक्स देशों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ नए जुड़े सदस्य देश शामिल हैं। इन सभी देशों में शिल्प और लोक कला का समृद्ध इतिहास रहा है। जब इन देशों की कलाएं एक ही मंच पर प्रदर्शित होती हैं, तो इससे अंतर-सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा मिलता है और वैश्विक स्तर पर पारंपरिक कारीगरों के लिए नए अवसर बनते हैं।
यह भी जानें: स्थानीय कारीगरों और हस्तशिल्प पर इसका असर
अंतरराष्ट्रीय स्तर की इन प्रदर्शनियों से भारत के ग्रामीण और शहरी दस्तकारों को बहुत फायदा मिलता है। जब विदेशी प्रतिनिधि और कूटनीतिज्ञ भारतीय कलाकृतियों को देखते हैं, तो इससे भारतीय हस्तशिल्प की वैश्विक मांग बढ़ती है।
- अंतरराष्ट्रीय मंच: स्थानीय शिल्पकारों के उत्पादों को ब्रिक्स जैसे बड़े वैश्विक समूह के सामने पेश करने का मौका मिलता है।
- सांस्कृतिक कूटनीति: कला और हस्तशिल्प के जरिए देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध और मजबूत होते हैं।
- महिला सशक्तिकरण: भारत में हस्तशिल्प क्षेत्र में बड़ी संख्या में महिलाएं कार्यरत हैं, ऐसे में इस क्षेत्र को बढ़ावा मिलने से महिला कारीगरों को सीधा आर्थिक लाभ होता है।
- धरोहर का संरक्षण: विलुप्त हो रही पारंपरिक कलाओं और बुनाई शैलियों को सहेजने और प्रोत्साहित करने में मदद मिलती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: ब्रिक्स बाजार का आयोजन कहां किया गया?
उत्तर: इस प्रदर्शनी का आयोजन नई दिल्ली में स्थित राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय में किया गया।
प्रश्न: ब्रिक्स बाजार में मुख्य अतिथि कौन थीं?
उत्तर: केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने ईरान के राष्ट्रपति की पुत्री जहरा पेज़ेशकियान का इस आयोजन में स्वागत किया।
प्रश्न: भारत किस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है?
उत्तर: भारत वर्ष 2026 के लिए ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता कर रहा है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






