बुधवार, अक्टूबर 28, 2026

अटल वयो योजना: 23 करोड़ बुजुर्गों के लिए केंद्र सरकार का बड़ा खाका

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अटल वयो योजना

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने अटल वयो अभ्युदय योजना के तहत चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 77.98 करोड़ रुपये की राशि जारी की है।

मुख्य बातें

  • सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने IPSARC घटक के तहत 755 परियोजनाओं के लिए 77.98 करोड़ रुपये अनुदान के रूप में जारी किए।
  • वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 10.38 करोड़ वरिष्ठ नागरिक थे, जिनकी संख्या 2036 तक बढ़कर 23 करोड़ पहुंचने का अनुमान है।
  • राष्ट्रीय वयोश्री योजना (RVY) के तहत एलिम्को के माध्यम से 10.45 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को 55.87 लाख से अधिक सहायक उपकरण बांटे गए।
  • मई 2026 में लॉन्च किए गए ‘शतायु’ डैशबोर्ड पर 30,151 प्रशिक्षित केयरगिवर्स पंजीकृत हैं, जिनमें 23,334 महिलाएं और 6,817 पुरुष शामिल हैं।
  • एल्डरलाइन (14567) राष्ट्रीय हेल्पलाइन पर अब तक 8.66 लाख से अधिक कॉल पर कार्रवाई की जा चुकी है।

केंद्र सरकार द्वारा संचालित अटल वयो योजना का मुख्य उद्देश्य देश के वरिष्ठ नागरिकों को स्वस्थ, सुरक्षित और गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करना है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अनुसार भारत में वृद्धजनों की जनसंख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसे देखते हुए एक एकीकृत और टिकाऊ देखभाल ढांचा तैयार किया गया है। वर्ष 2021 में शुरू की गई ‘अटल वयो अभ्युदय योजना’ (अव्यय) ने पूर्ववर्ती राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीएसआरसी) का विलय कर वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण से जुड़ी सभी पहलों को एक मंच पर ला दिया है।

अटल वयो योजना क्या है और इससे बुजुर्गों को क्या लाभ मिलते हैं?

अटल वयो योजना केंद्र सरकार का एक व्यापक एकीकृत ढांचा है जो देश के बुजुर्गों को आश्रय, स्वास्थ्य सेवा, सहायक उपकरण, कौशल विकास और आपातकालीन सहायता प्रदान करता है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित इस योजना का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को वृद्धाश्रमों या उनके अपने घरों में सम्मानजनक जीवन जीने की सुविधा देना है। इसके तहत एल्डरलाइन 14567, राष्ट्रीय वयोश्री योजना और ‘जीवन’ ऐप जैसी प्रमुख सेवाएं संचालित की जा रही हैं।

जनसांख्यिकीय बदलाव और अटल वयो योजना की आवश्यकता

भारत में वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार वरिष्ठ नागरिकों (60 वर्ष और उससे अधिक आयु) की कुल आबादी 10.38 करोड़ थी। इसमें 5.11 करोड़ पुरुष और 5.27 करोड़ महिलाएं शामिल थीं। लांगिट्यूडिनल एजिंग स्टडी इन इंडिया (एलएएसआई) के निष्कर्षों से पता चलता है कि बुजुर्गों की बड़ी आबादी अपने दैनिक कामकाज में शारीरिक कठिनाइयों का सामना करती है।

अनुमान के अनुसार वर्ष 2036 तक देश में वरिष्ठ नागरिकों की जनसंख्या 23 करोड़ तक पहुंच जाएगी। तेजी से हो रहे शहरीकरण, प्रवासन और एकल परिवारों के कारण पारंपरिक पारिवारिक सुरक्षा ढांचा कमजोर पड़ा है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान 30 सितंबर 2026 को समाप्त हुई तिमाही के लिए ‘वरिष्ठ नागरिकों के लिए समेकित कार्यक्रम’ (IPSARC) के तहत 755 परियोजनाओं को 77.98 करोड़ रुपये का सहायता अनुदान जारी किया है।

अटल वयो योजना के प्रमुख घटक और उनकी कार्यप्रणाली

यह योजना कई विशिष्ट घटकों के माध्यम से काम करती है, जिन्हें देश भर के बुजुर्गों की अलग-अलग आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है:

  • वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकीकृत कार्यक्रम (IPSARC): यह योजना का मुख्य कार्यान्वयन घटक है। वर्तमान में इसके तहत 764 वरिष्ठ नागरिक गृहों, 13 सतत देखभाल केंद्रों, 17 सचल चिकित्सा इकाइयों और 3 फिजियोथेरेपी क्लीनिकों के संचालन के लिए एनजीओ और local निकायों को अनुदान दिया जा रहा है।
  • राष्ट्रीय वयोश्री योजना (RVY): वर्ष 2017 में शुरू हुई इस योजना के जरिए उम्र से जुड़ी अक्षमताओं से जूझ रहे बुजुर्गों को सहायक उपकरण दिए जाते हैं। एलिम्को (ALIMCO) द्वारा संचालित ‘प्रधानमंत्री दिव्याशा वयोश्री केंद्रों’ के माध्यम से अब तक 10.45 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को 55,87,653 सहायक उपकरण बांटे गए हैं।
  • राष्ट्रीय हेल्पलाइन ‘एल्डरलाइन’ (14567): अक्टूबर 2021 में शुरू की गई इस हेल्पलाइन ने 8.66 लाख से अधिक कॉल पर कार्रवाई की है। यह सेवा बुजुर्गों को मुफ्त मार्गदर्शन, सूचना, भावनात्मक सहारा और मौके पर जाकर (फील्ड इंटरवेंशन) मदद उपलब्ध कराती है।
  • ‘जीवन’ ऐप और ‘शतायु’ डैशबोर्ड: मई 2026 में लॉन्च किए गए ‘जीवन’ ऐप में आपातकालीन वन-टैब कॉल की सुविधा है। ‘शतायु’ डैशबोर्ड पर कुल 30,151 प्रशिक्षित केयरगिवर्स का डाटाबेस उपलब्ध है, जिसमें 23,334 महिलाएं और 6,817 पुरुष शामिल हैं।
  • राज्य कार्य योजना (SAPSRC): इसके तहत राज्य और केंद्र शासित प्रदेश मोतियाबिंद सर्जरी अभियानों और केयरगिवर प्रशिक्षण के लिए अपने आवंटित बजट का 20 प्रतिशत तक स्थानीय कल्याणकारी पहलों पर खर्च कर सकते हैं।
  • क्षेत्रीय संसाधन और प्रशिक्षण केंद्र (RRTC): ये केंद्र अनुसंधान, प्रशिक्षण और डेटाबेस निर्माण का कार्य करते हैं। सरकार प्रत्येक RRTC को 19.58 लाख रुपये की वार्षिक वित्तीय सहायता देती है।

अटल वयो योजना की संस्थागत संरचना और निगरानी व्यवस्था

योजना के सुचारू संचालन के लिए तीन स्तरीय संस्थागत ढांचा तैयार किया गया है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय नोडल संस्था के रूप में नीति निर्माण और वित्तपोषण संभालता है। राज्य सरकारें अपनी राज्य स्तरीय कार्य योजनाएं लागू करती हैं। वहीं, स्थानीय स्तर पर लाभार्थियों के चयन और वृद्धाश्रमों के निरीक्षण की जिम्मेदारी जिला कलक्टर या मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली जिला समितियों के पास होती है।

योजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग यूनिट (PMU) द्वारा नियमित मैदानी निरीक्षण किया जाता है। सभी कार्यान्वयन एजेंसियों के लिए ई-अनुदान पोर्टल का उपयोग, बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम लगाना और संस्थानों के लाइव सीसीटीवी फीड पोर्टल पर उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है।

सिल्वर इकोनॉमी और एसएजीई (SAGE) पहल

बुजुर्गों की देखभाल के क्षेत्र में नए व्यावसायिक विचारों और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए Seniorcare Aging Growth Engine (SAGE) पहल शुरू की गई है। इसका उद्देश्य देश में एक मजबूत ‘रजत अर्थव्यवस्था’ (सिल्वर इकोनॉमी) का निर्माण करना है।

एसएजीई योजना के तहत बुजुर्गों के लिए उत्पाद और सेवाएं बनाने वाले चुने गए स्टार्टअप्स को 1 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता (इक्विटी भागीदारी के रूप में) दी जाती है। एसएजीई पोर्टल पर प्राप्त आवेदनों की प्रारंभिक जांच और विस्तृत मूल्यांकन आईएफसीआई वेंचर (IFCI Venture) द्वारा किया जाता है। इसके अलावा, बुजुर्गों के ज्ञान और अनुभवों को साझा करने के लिए ‘अनुभव बोलता है’ मंच को भी ‘जीवन’ मोबाइल ऐप के साथ जोड़ा गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: अटल वयो योजना का नोडल मंत्रालय कौन सा है?
उत्तर: इस योजना का नीति निर्माण, वित्तपोषण और समग्र कार्यान्वयन सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा किया जाता है।

प्रश्न: वरिष्ठ नागरिकों के लिए एल्डरलाइन का हेल्पलाइन नंबर क्या है?
उत्तर: वरिष्ठ नागरिक किसी भी सहायता या आपात स्थिति में टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14567 (एल्डरलाइन) पर कॉल कर सकते हैं।

प्रश्न: शतायु डैशबोर्ड पर बुजुर्गों के लिए क्या सुविधा उपलब्ध है?
उत्तर: शतायु डैशबोर्ड के माध्यम से बुजुर्ग और उनके परिजन अपने जिले या राज्य में उपलब्ध प्रशिक्षित और सत्यापित केयरगिवर्स (देखभाल करने वालों) की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक मामलों के संपादक हैं। वे संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही, सरकारी नीतियों, चुनाव, और भारत से जुड़ी बड़ी राष्ट्रीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्य-आधारित, संतुलित और स्रोत-सहित रिपोर्टिंग पर रहता है — हर लेख में वे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), संबंधित मंत्रालयों की विज्ञप्तियों और आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हैं। राय और विश्लेषण को वे समाचार से स्पष्ट रूप से अलग रखते हैं। सुझाव या तथ्य-सुधार के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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