
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल की जयंती पर आयोजित जन्मशताब्दी वर्ष के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया।
मुख्य बातें
- केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में अशोक सिंहल की जयंती पर जन्मशताब्दी वर्ष के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया।
- अमित शाह ने कहा कि अशोक सिंहल ने अपना पूरा जीवन राम जन्मभूमि आंदोलन और हिंदुत्व को समर्पित कर दिया।
- समारोह के दौरान 11 श्रीराम स्तंभों का डिजिटल लोकार्पण भी किया गया जो राम वनगमन मार्ग का स्मरण कराते हैं।
- अमित शाह ने कहा कि कृतज्ञता केवल भावना नहीं बल्कि राष्ट्रीय आवश्यकता है ताकि युवा अपने नायकों से प्रेरणा ले सकें।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्रद्धेय अशोक सिंहल जी की जयंती पर आयोजित जन्मशताब्दी वर्ष के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम में बोलते हुए गृह मंत्री ने कहा कि अशोक जी के जन्मशताब्दी समारोह के उद्घाटन में उपस्थित होना गर्व की बात है क्योंकि उन्होंने जीवन के हर पड़ाव पर श्रेष्ठता साबित की और अंतिम सांस तक निष्ठापूर्वक हिंदुत्व को समर्पित जीवन जिया।
अशोक सिंहल जन्मशताब्दी और विहिप का योगदान
अशोक सिंहल जन्मशताब्दी वर्ष के इस खास अवसर पर गृह मंत्री अमित शाह ने विश्व हिंदू परिषद और राम जन्मभूमि आंदोलन में उनके योगदान को याद किया। अशोक सिंहल जन्मशताब्दी समारोह में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि साढ़े पांच सौ वर्षों से जिस क्षण के लिए समग्र हिंदू समाज बलिदान देता रहा, उस राम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण हमने देखा। उन्होंने याद किया कि विहिप कार्यालय का वह कक्ष, जहां अशोक जी ने अपने जीवन के बीस वर्ष बिताए, आज कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा स्थल बन गया है। इतनी सादगी से जीना और इतनी उत्कृष्ट राष्ट्रभक्ति रखना बेहद दुर्लभ है।
राम जन्मभूमि आंदोलन और संघर्ष की गाथा
गृह मंत्री ने बताया कि अशोक सिंहल को सब संघर्ष से ही जानते हैं। राम जन्मभूमि आंदोलन उनके मन में रचा-बसा विषय था और वे दृढ़ता से मानते थे कि भारत का विश्व में गौरवमय स्थान तभी संभव है, जब गुलामी के इस कलंक को मिटाकर भव्य राम मंदिर बनाया जाए। जब उत्तर प्रदेश की तत्कालीन सरकार ने निर्मम लाठीचार्ज किया, तब अशोक जी भेष बदलकर मोर्चे पर पहुंचे और घायल भी हुए। गमछे से खून पोंछते हुए उनका वह दृश्य युवाओं को सौ वर्ष तक नहीं भूलना चाहिए।
- अशोक सिंहल ने विश्व हिंदू परिषद के दायित्व को निभाते हुए अंतिम सांस तक हिंदुत्व को समर्पित जीवन जिया।
- वे अधिक आयु होने के बावजूद प्रतिदिन सोलह-सोलह घंटे कार्य करते थे।
- उत्तर प्रदेश सरकार के लाठीचार्ज के दौरान वे घायल हुए थे लेकिन पीछे नहीं हटे।
- शताब्दी वर्ष के अवसर पर 11 श्रीराम स्तंभों का डिजिटल लोकार्पण किया गया।
इसका असर और युवा पीढ़ी के लिए संदेश
अमित शाह ने स्पष्ट किया कि कुछ लोग कहते हैं कि जिस व्यक्ति ने कभी प्रचार नहीं किया, उसकी जन्मशती मनाने की क्या आवश्यकता है। इस पर उन्होंने कहा कि कृतज्ञता केवल भावना नहीं, राष्ट्रीय आवश्यकता है। जब कोई देश और समाज अपने नायकों का स्मरण नहीं करता और उनके जीवन तथा वचन युवाओं तक नहीं पहुंचाता, तब वैचारिक शून्य उत्पन्न होता है। तब न आदर्श मिलता है, न दिशा और न प्रेरणा, और फिर लोग हजारों किलोमीटर दूर की सभ्यताओं में आदर्श खोजने लगते हैं। इसीलिए यह जन्मशती मनाना अत्यंत आवश्यक है ताकि देश के युवाओं को उनके व्यक्तित्व और कृतित्व से प्रेरणा मिलती रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? अशोक सिंहल कौन थे? उत्तर। अशोक सिंहल विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष थे जिन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी।
प्रश्न? जन्मशताब्दी वर्ष समारोह का आयोजन कहाँ हुआ? उत्तर। इस जन्मशताब्दी वर्ष के उद्घाटन समारोह का आयोजन नई दिल्ली में किया गया जहाँ केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य वक्ता थे।
प्रश्न? इस समारोह में क्या विशेष प्रस्तुतियाँ थीं? उत्तर। इस अवसर पर रविदास जी और वाल्मीकि मंदिर में पूजन, प्रयागराज में गंगा आरती, गौमाता की सेवा और 11 श्रीराम स्तंभों का डिजिटल लोकार्पण किया गया।
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