
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय भैंसों पर अनुसंधान संस्थान ने स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत स्वच्छता संवाद का आयोजन किया है।
मुख्य बातें
- आईसीएआर-सीआईआरबी, हिसार ने 24 सितंबर 2026 को स्वच्छता संवाद आयोजित किया।
- यह कार्यक्रम ‘स्वच्छता में सहभाग – स्वच्छ भारत, विकसित भारत’ विषय के तहत हुआ।
- इसमें संविदात्मक कर्मचारियों और युवा पेशेवरों सहित लगभग 20 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
- चर्चा का मुख्य केंद्र कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक का कम उपयोग और अपशिष्ट पृथक्करण रहा।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अंतर्गत आने वाले केंद्रीय भैंसों पर अनुसंधान संस्थान (सीआईआरबी), हिसार में स्वच्छता संवाद का आयोजन किया गया है। यह विशेष कार्यक्रम 24 सितंबर 2026 को ‘स्वच्छता में सहभाग – स्वच्छ भारत, विकसित भारत’ विषय के अंतर्गत चलाया गया। पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य संविदा कर्मचारियों और युवा पेशेवरों के बीच कार्यस्थल पर साफ-सफाई को लेकर जागरूकता बढ़ाना था।
स्वच्छता संवाद क्या है और इससे क्या लाभ मिलता है?
स्वच्छता संवाद एक ऐसी संवादात्मक पहल है जिसके जरिए लोग बिना किसी पारंपरिक व्याख्यान के सीधे अपने अनुभव साझा करते हैं। इस संवाद में लगभग 20 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और कचरे के सही निपटान पर खुलकर चर्चा की। इस प्रकार के आयोजनों से आम नागरिकों और कर्मचारियों को व्यक्तिगत स्तर पर सफाई के प्रति जवाबदेह बनने की प्रेरणा मिलती है, जिससे दीर्घकालिक सामाजिक बदलाव की नींव पड़ती है।
देशभर में स्वच्छता ही सेवा अभियान के आठवें दिन की कार्य योजना के तहत इस गतिविधि को अंजाम दिया गया। इस अनूठी पहल का मकसद केवल दफ्तर के कमरों को झाड़ू लगाना नहीं, बल्कि कर्मचारियों के दिलों-दिमाग में कचरा प्रबंधन के प्रति स्थायी आदतें डालना था। पारंपरिक बैठकों से हटकर इस बार खुले मंच पर चर्चा हुई ताकि हर कोई अपनी बात रख सके।
स्वच्छता संवाद की मुख्य बातें और कार्ययोजना
संस्थान में आयोजित इस चर्चा के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया जो रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करते हैं। प्रतिभागियों ने न केवल अपनी बात रखी बल्कि कार्यस्थलों पर कचरा प्रबंधन सुधारने के ठोस सुझाव भी दिए।
- कूड़ा-करकट रोकने और कचरे का जिम्मेदारी से निपटान करने के उपाय।
- प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करने पर जोर।
- कचरे का पृथक्करण यानी सूखा और गीला कचरा अलग करना।
- मजबूत और टिकाऊ स्वच्छता प्रथाओं को दैनिक जीवन में अपनाना।
संस्थान की पृष्ठभूमि और इस अभियान का महत्व
हिसार स्थित केंद्रीय भैंसों पर अनुसंधान संस्थान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का एक प्रमुख अनुसंधान केंद्र है, जो भैंसों की नस्लों और उनके विकास के लिए जाना जाता है। वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ-साथ ऐसे संस्थान सामाजिक और राष्ट्रीय अभियानों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। इस तरह के आयोजनों से सरकारी कार्यालयों और परिसरों में एक स्वच्छ कार्य संस्कृति विकसित होती है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बनती है।
चर्चा के अंत में सभी प्रतिभागियों ने अपने-अपने परिवेश को स्वच्छ रखने की सामूहिक शपथ ली। यह पहल दर्शाती है कि जब तक हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेगा, तब तक स्वच्छ भारत का सपना अधूरा रहेगा। इस संवाद ने सहभागिता और आपसी बातचीत के जरिए एक स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है।
यह भी जानें: कैसे बदलती है कार्यस्थल की सूरत
जब किसी संस्थान में इस तरह की गतिविधियां चलाई जाती हैं, तो उसका असर केवल कागजों तक सीमित नहीं रहता। कर्मचारियों के व्यवहार में बदलाव आने से दफ्तर के कोने-कोने में सफाई नजर आने लगती है। सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर रोक और कचरे का सही वर्गीकरण करने से रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया आसान हो जाती है, जो पर्यावरण संरक्षण में सीधे तौर पर मददगार साबित होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? स्वच्छता संवाद का आयोजन किस संस्थान में किया गया था। उत्तर। यह आयोजन आईसीएआर-सीआईआरबी, हिसार में किया गया था।
प्रश्न? इस संवाद में किन विषयों पर मुख्य रूप से चर्चा हुई। उत्तर। इसमें कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक का कम उपयोग और अपशिष्ट पृथक्करण पर ध्यान केंद्रित किया गया।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






