बुधवार, अक्टूबर 28, 2026

इमर्जिंग साइंस कॉन्क्लेव 2026: भारत नई टेक्नोलॉजी का लीडर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है

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इमर्जिंग साइंस कॉन्क्लेव

प्रधानमंत्री ने इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव 2026 के उद्घाटन पर कहा कि भारत अब केवल तकनीक अपनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के लिए नई तकनीकें विकसित कर रहा है।

मुख्य बातें

  • देश का 500-मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर फर्स्ट क्रिटिकलता तक पहुंच चुका है।
  • अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के तहत पिछले एक साल में 24,000 करोड़ रुपये की रिसर्च प्रतिबद्धताएं हुई हैं।
  • दस वर्ष पहले सालभर में 50,000 से कम पेटेंट आवेदन आते थे, जो पिछले वर्ष बढ़कर करीब डेढ़ लाख हो गए।

प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली में आयोजित ‘इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव 2026’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि 21वीं सदी का भारत नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्रिमंडल के मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और देश के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार अजय सूद समेत कई नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक और स्टार्टअप संस्थापक मौजूद रहे। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देश की वैज्ञानिक प्रगति, अंतरिक्ष उपलब्धियों, परमाणु ऊर्जा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते उपयोग पर विस्तार से बात की।

इमर्जिंग साइंस कॉन्क्लेव 2026 में क्या घोषणाएं हुईं?

इमर्जिंग साइंस कॉन्क्लेव 2026 में प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत अब वैश्विक स्तर पर तकनीक के क्षेत्र में सिर्फ कैच-अप करने के बजाय नए समाधान गढ़ रहा है। देश का 500-मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर फर्स्ट क्रिटिकलता तक पहुंच चुका है, जो परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक ताकत को मजबूत करेगा। इसके अलावा, अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के माध्यम से रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर कुल 24,000 करोड़ रुपये की नई प्रतिबद्धताएं कर चुके हैं।

यह भी जानें: भारत के अनुसंधान और पेटेंट इकोसिस्टम का हाल

किसी भी देश की तकनीकी क्षमता उसकी रिसर्च पर निर्भर करती है। भारत इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है जिसका प्रमाण पेटेंट आवेदनों में आई भारी तेजी है। एक दशक पहले देश में जहां सालभर में 50,000 से भी कम पेटेंट आवेदन दाखिल किए जाते थे, वहीं पिछले वर्ष यह संख्या बढ़कर करीब डेढ़ लाख तक पहुंच गई है। यह आंकड़े दिखाते हैं कि देश के युवाओं और स्टार्टअप्स में रिसर्च और इनोवेशन का कल्चर तेजी से मजबूत हो रहा है।

  • न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर पर तेजी से काम जारी है।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पेस सेक्टर में मेड इन इंडिया रॉकेट और सैटेलाइट डॉकिंग की क्षमता हासिल की गई है।
  • चेन्नई के आईआईटी मद्रास में आधुनिक ब्रेन सेंटर का लोकार्पण किया गया है।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत अपनी हिस्सेदारी लगातार बढ़ा रहा है।

लैब से लेकर जमीन तक तकनीक का विस्तार

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि विज्ञान और तकनीक की सफलता केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य आम नागरिक के जीवन को बेहतर बनाना है। स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप्स की भागीदारी बढ़ रही है। वियरएबल ईईजी टेक्नोलॉजी और स्वदेशी वायरलेस संचार समाधान जैसे उत्पाद इसी दिशा में काम कर रहे हैं। आईआईटी मद्रास का आधुनिक ब्रेन सेंटर मस्तिष्क से जुड़ी जटिल बीमारियों को सुलझाने में मददगार साबित होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न? इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव 2026 का मुख्य उद्देश्य क्या है? उत्तर। इसका मुख्य उद्देश्य देश में उभरती हुई विज्ञान और तकनीकी क्षमताओं को बढ़ावा देना और भारत को भविष्य की तकनीकों में आत्मनिर्भर बनाना है।

प्रश्न? अनुसंधान के लिए पिछले एक साल में कुल कितने निवेश की प्रतिबद्धता हुई है? उत्तर। सरकार और निजी क्षेत्र की पार्टनरशिप के जरिए पिछले एक वर्ष में रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए कुल 24,000 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता हुई है।

प्रश्न? पेटेंट आवेदनों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में कितना बदलाव आया है? उत्तर। दस साल पहले जहां सालाना 50,000 से कम पेटेंट आवेदन आते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब डेढ़ लाख हो गई है।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक मामलों के संपादक हैं। वे संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही, सरकारी नीतियों, चुनाव, और भारत से जुड़ी बड़ी राष्ट्रीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्य-आधारित, संतुलित और स्रोत-सहित रिपोर्टिंग पर रहता है — हर लेख में वे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), संबंधित मंत्रालयों की विज्ञप्तियों और आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हैं। राय और विश्लेषण को वे समाचार से स्पष्ट रूप से अलग रखते हैं। सुझाव या तथ्य-सुधार के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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