
दिल्ली दक्षिण सीजीएसटी टीम ने 87.67 करोड़ रुपये के फर्जी बिलों के माध्यम से 15.78 करोड़ रुपये का अमान्य क्रेडिट हड़पने वाले इस्पात व्यापारी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया।
मुख्य बातें
- सीजीएसटी दिल्ली दक्षिण की टीम ने 15.78 करोड़ रुपये के अमान्य इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाले का पर्दाफाश किया।
- लौह और इस्पात व्यापार में लगी कंपनी ने बिना माल आपूर्ति के 87.67 करोड़ रुपये के फर्जी चालान जारी किए।
- जांच के दौरान कई आपूर्तिकर्ता फर्में कागजों पर फर्जी, निष्क्रिय या रद्द पाई गईं।
- आरोपी पार्टनर को सीजीएसटी अधिनियम की धारा 69 के तहत 14 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया गया।
- पटियाला हाउस कोर्ट ने आरोपी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा।
जीएसटी फर्जीवाड़ा के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) दिल्ली दक्षिण आयुक्त कार्यालय ने बड़ी कार्रवाई की है। कर चोरी रोकने वाली शाखा (Anti-Evasion Wing) के अधिकारियों ने लौह और इस्पात वस्तुओं के व्यापार से जुड़ी एक कंपनी के पार्टनर को गिरफ्तार किया है। पीआईबी के अनुसार, आरोपी पर 87.67 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी चालानों के जरिए 15.78 करोड़ रुपये से ज्यादा के अमान्य इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का धोखाधड़ी से लाभ उठाने, उपयोग करने और हस्तांतरित करने का आरोप है।
जीएसटी फर्जीवाड़ा क्या है और दिल्ली में क्या कार्रवाई हुई?
जीएसटी फर्जीवाड़ा मामले में दिल्ली दक्षिण सीजीएसटी अधिकारियों ने इस्पात व्यापार से जुड़े एक कंपनी पार्टनर को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने बिना वास्तविक माल की आपूर्ति किए 87.67 करोड़ रुपये के फर्जी चालान बनाकर 15.78 करोड़ रुपये से अधिक का अमान्य इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) हासिल और आगे ट्रांसफर किया था।
फर्जी कंपनियों का नेटवर्क और जांच का खुलासा
सीजीएसटी दिल्ली दक्षिण की जांच से यह बात सामने आई कि संबंधित कंपनी ने कई अलग-अलग फर्मों से जारी बिलों के आधार पर अमान्य आईटीसी का लाभ उठाया था। जब राजस्व अधिकारियों ने इन आपूर्तिकर्ता फर्मों का जमीनी स्तर पर सत्यापन किया, तो बड़ा सच सामने आया। अधिकतर फर्में केवल कागजों पर चल रही थीं। वे या तो अस्तित्वहीन थीं, या फिर पहले से निलंबित, निष्क्रिय और रद्द घोषित हो चुकी थीं।
अधिकारियों ने बताया कि घोषित व्यापारिक स्थलों पर किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि नहीं पाई गई। जमीनी सत्यापन में साबित हुआ कि वास्तविक माल की डिलीवरी कभी हुई ही नहीं थी। केवल कर बचाने और सरकार को चूना लगाने के लिए चालान जारी किए गए थे। इसके बाद बिना किसी सामान के लेनदेन के इस क्रेडिट को आगे अन्य खरीदारों या प्राप्तकर्ताओं को ट्रांसफर कर दिया गया।
पटियाला हाउस कोर्ट में पेशी और न्यायिक हिरासत
केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 70 के तहत दर्ज बयानों और एकत्र किए गए भौतिक व डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अधिकारियों ने कड़ी कानूनी कार्रवाई की। आरोपी को 14 सितंबर 2026 को सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 69 के प्रावधानों के अंतर्गत गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को नई दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने मामले की गंभीरता और जांच के प्रारंभिक चरण को देखते हुए आरोपी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में अन्य सहयोगियों और फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त करने वाली कंपनियों की भी जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
जीएसटी फर्जीवाड़ा रोकने के नियम और आईटीसी प्रक्रिया
वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) एक मुख्य व्यवस्था है। इसके तहत जब कोई व्यापारी अपनी व्यावसायिक गतिविधि के लिए सामान या सेवाएं खरीदता है, तो उस पर चुकाए गए जीएसटी का क्रेडिट उसे अपनी बिक्री पर बनने वाली कर देनदारी में से घटाने की छूट मिलती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यापारी ने कच्चे माल पर 100 रुपये जीएसटी दिया है और तैयार माल पर उसकी देनदारी 150 रुपये बनती है, तो उसे केवल 50 रुपये का नकद भुगतान करना होता है।
हालांकि, कुछ असामाजिक तत्व और फर्जी कारोबारी बिना माल बेचे केवल कागजी बिल जारी करते हैं। इसे बोगस बिलिंग या शेल कंपनियां बनाकर किया जाने वाला जालसाजी खेल कहा जाता है। इस प्रक्रिया में सरकार को वास्तविक कर का भुगतान नहीं होता, लेकिन व्यापारी गलत तरीके से क्रेडिट का दावा करके सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाते हैं। सीजीएसटी विभाग ऐसे मामलों में फर्जीवाड़े के खिलाफ सख्त अभियान चला रहा है।
धोखाधड़ी से बचने और अनुपालन की मुख्य बातें
व्यापारियों और करदाताओं को जीएसटी नियमों का पालन करते समय निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना आवश्यक है:
- केवल वास्तविक माल या सेवाओं की प्राप्ति के बाद ही इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करें।
- अपने आपूर्तिकर्ताओं का जीएसटी नेटवर्क (GSTN) पोर्टल पर नियमित सत्यापन करें कि उनका पंजीकरण सक्रिय है या नहीं।
- बिना वास्तविक डिलीवरी के केवल बिल या चालान लेने से बचें, यह गंभीर कानूनी अपराध है।
- जीएसटी अधिनियम की धारा 69 के तहत 5 करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी या फर्जी क्रेडिट के मामलों में गैर-जमानती गिरफ्तारी का प्रावधान है।
- नियमित ई-वे बिल और परिवहन कागजातों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें ताकि भौतिक जांच के समय माल की आपूर्ति साबित की जा सके।
इसका असर और कर प्रवर्तन की भावी दिशा
दिल्ली में 15.78 करोड़ रुपये के फर्जी आईटीसी का भंडाफोड़ होने से यह साफ हो गया है कि कर विभाग शेल कंपनियों के खिलाफ तकनीक और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल कर रहा है। जीएसटी नेटवर्क पर संदिग्ध डेटा का विश्लेषण करके विभाग ऐसी फर्जी फर्मों की पहचान तुरंत कर लेता है।
इस प्रकार की सख्त कार्रवाई से ईमानदार करदाताओं को सुरक्षा मिलती है और अनुचित प्रतिस्पर्धा पर रोक लगती है। राजस्व विभाग ने स्पष्ट किया है कि फर्जी चालान बनाने और अमान्य क्रेडिट का उपयोग करने वालों के खिलाफ आगे भी प्रवर्तन कार्रवाई जारी रहेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: दिल्ली में हुए जीएसटी फर्जीवाड़ा मामले में कुल कितने रुपये का घोटाला सामने आया है?
उत्तर: इस मामले में 87.67 करोड़ रुपये के फर्जी चालानों के जरिए 15.78 करोड़ रुपये से अधिक के अमान्य इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के घोटाले का भंडाफोड़ हुआ है।
प्रश्न: आरोपी को किस कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है?
उत्तर: आरोपी को केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) अधिनियम, 2017 की धारा 69 के तहत गिरफ्तार करके पटियाला हाउस कोर्ट के आदेश पर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
प्रश्न: फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्या होता है?
उत्तर: जब कोई व्यापारी बिना किसी वास्तविक माल या सेवा की खरीद-बिक्री के केवल फर्जी बिलों के आधार पर कर छूट का दावा करता है, तो उसे फर्जी या अमान्य आईटीसी कहा जाता है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






