
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 के तहत हर साल पेश होने वाले केंद्रीय बजट के पीछे महीनों की मेहनत और एक कड़ा प्रशासनिक ढांचा होता है।
मुख्य बातें
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 के तहत आम बजट सालाना वित्तीय विवरण के रूप में पेश किया जाता है।
- बजट निर्माण की शुरुआत आमतौर पर सितंबर-अक्टूबर में सभी मंत्रालयों के साथ बैठकों से होती है।
- बजट को कानूनी रूप देने के लिए वित्त विधेयक और विनियोग विधेयक को संसद से पारित कराना अनिवार्य होता है।
- यह प्रक्रिया राजस्व घाटे, पूंजीगत व्यय और कर प्रस्तावों का पूरा लेखा-जोखा तय करती है।
आम बजट प्रक्रिया एक बेहद अनुशासित, जटिल और पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया है जिसके जरिए सरकार आने वाले वित्त वर्ष के लिए अपनी आमदनी और खर्च का लेखा-जोखा देश के सामने रखती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 के अनुसार, भारत के केंद्रीय बजट को ‘वार्षिक वित्तीय विवरण’ कहा जाता है। यह प्रक्रिया साल के बीच से ही शुरू हो जाती है और इसे अमलीजामा पहनाने में कई महीनों की मेहनत लगती है।
आम बजट प्रक्रिया क्या है?
आम बजट प्रक्रिया वह संवैधानिक और प्रशासनिक प्रणाली है जिसके तहत सरकार विभिन्न मंत्रालयों की वित्तीय जरूरतों का अनुमान लगाती है, राजस्व और पूंजीगत प्राप्तियों का हिसाब रखती है और संसद की मंजूरी से देश की तिजोरी का बजट तय करती है। यह प्रक्रिया नीति आयोग, वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक के साझा परामर्श से आगे बढ़ती है।
चरण-दर-चरण बजट तैयार होने का तरीका
- वित्त मंत्रालय का व्यय विभाग सितंबर और अक्टूबर के महीने में सभी केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और राज्यों को सर्कुलर जारी कर अगले साल के खर्च का अनुमान मांगता है।
- विभिन्न उद्योगों, किसानों, ट्रेड यूनियनों और अर्थशास्त्रियों के साथ प्री-बजट बैठकें (पूर्व-बजट परामर्श) आयोजित की जाती हैं ताकि जनता की उम्मीदों और सुझावों को समझा जा सके।
- राजस्व और पूंजीगत प्राप्तियों के साथ-साथ योजनाओं के खर्च का अनुमान लगाया जाता है, जिसे राजस्व बजट और पूंजीगत बजट में बांटा जाता है।
- बजट दस्तावेजों की छपाई के अंतिम चरण में पारंपरिक ‘हलवा समारोह’ (Halwa Ceremony) का आयोजन होता है, जिसके बाद वित्त मंत्रालय के अधिकारी बजट छपने तक आइसोलेशन में रहते हैं।
- वित्त मंत्री 1 फरवरी को संसद में बजट भाषण देते हैं और लोकसभा में विधिवत रूप से बजट पेश करते हैं।
- संसद में बजट पेश होने के बाद उस पर चर्चा होती है, अनुदान की मांगों पर मतदान होता है और अंत में वित्त विधेयक तथा विनियोग विधेयक पारित किए जाते हैं।
राजस्व और पूंजीगत व्यय का गणित
बजट प्रक्रिया के दौरान सरकार अपने खर्चों को मुख्य रूप से दो हिस्सों में बांटती है। राजस्व व्यय (Revenue Expenditure) वह पैसा होता है जो सरकार के रोजमर्रा के कामकाज, कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और ब्याज चुकाने में खर्च होता है। दूसरी ओर, पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) वह निवेश है जिससे देश में लंबी अवधि की संपत्तियां जैसे सड़कें, रेलवे ट्रैक, अस्पताल और स्कूल बनते हैं। राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) यह बताता है कि सरकार की कुल आय और कुल खर्च के बीच कितना अंतर है, जिसे पूरा करने के लिए सरकार को कर्ज लेना पड़ता है।
प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों का निर्धारण
बजट का सबसे बड़ा आकर्षण कर प्रस्ताव होते हैं। प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) सीधे नागरिकों और कंपनियों की आय पर लगते हैं, जैसे आयकर (Income Tax) और कॉर्पोरेट टैक्स। अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax) वस्तुओं और सेवाओं की खरीद पर लगते हैं। वित्त मंत्री बजट के दौरान इन करों में छूट या बढ़ोतरी की घोषणा करते हैं, जिससे आम आदमी की जेब और बाजार की रफ्तार दोनों पर सीधा असर पड़ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? आम बजट किस तारीख को पेश किया जाता है?
उत्तर। साल 2017 से आम बजट हर साल 1 फरवरी को सुबह 11 बजे संसद में पेश किया जाता है।
प्रश्न? बजट संसद में पास होना क्यों जरूरी है?
उत्तर। जब तक संसद वित्त विधेयक और विनियोग विधेयक को मंजूरी नहीं देती, सरकार को जनता से कर वसूलने या संचित निधि से पैसे निकालने का कानूनी अधिकार नहीं मिलता है।
प्रश्न? हलवा समारोह का क्या महत्व है?
उत्तर। यह बजट दस्तावेजों की छपाई से जुड़े अधिकारियों की गोपनीयता और कड़ी मेहनत को सम्मान देने की एक पारंपरिक रस्म है।
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, निवेश या वित्तीय सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले किसी योग्य/सेबी-पंजीकृत सलाहकार से परामर्श करें।
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यह लेख आज पत्रिका की एक्सप्लेनर डेस्क द्वारा सामान्य जागरूकता के लिए तैयार किया गया है। नियम और प्रक्रियाएं समय-समय पर बदल सकती हैं — कृपया आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें। सुधार/सुझाव: corrections@aajpatrika.com






