बुधवार, सितम्बर 16, 2026

एकलव्य मॉडल स्कूल: राजस्थान के 29 स्कूलों में बनेंगे स्मार्ट क्लासरूम और कंप्यूटर लैब

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एकलव्य मॉडल स्कूल

राजस्थान के 11 जिलों के 29 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में 16.01 करोड़ रुपये से हाई-टेक कंप्यूटर लैब और स्मार्ट क्लासरूम तैयार किए जाएंगे।

मुख्य बातें

  • राजस्थान के 11 जिलों के 29 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम और कंप्यूटर लैब बनेंगे।
  • हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) इस प्रोजेक्ट पर 16.01 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
  • प्रोजेक्ट को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर की तिथि से छह महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य है।
  • प्रतिवर्ष 10,000 से अधिक अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा का सीधा लाभ मिलेगा।
  • प्रत्येक स्कूल को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग सामग्री से लोड 10 टैबलेट भी दिए जाएंगे।

राजस्थान के 29 एकलव्य मॉडल स्कूल में पढ़ाई करने वाले जनजातीय छात्रों को जल्द ही आधुनिक डिजिटल शिक्षा की सुविधा मिलेगी। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (NSTFDC) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के बीच इसके लिए एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इस साझेदारी के तहत राजस्थान के 11 जिलों में स्थित एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRS) में एकीकृत कंप्यूटर लैब और स्मार्ट क्लासरूम स्थापित किए जाएंगे।

एकलव्य मॉडल स्कूल में स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल शिक्षा: प्रमुख जानकारी

राजस्थान के 29 एकलव्य मॉडल स्कूल में 16.01 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब और 4-4 स्मार्ट क्लासरूम बनाए जा रहे हैं। इस परियोजना का उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय छात्रों को डिजिटल साक्षरता, कोडिंग और आधुनिक तकनीक से जोड़ना है। छह महीने में पूरी होने वाली इस पहल से हर साल 10,000 से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।

16.01 करोड़ रुपये का बजट और 6 महीने की समय-सीमा

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के बोर्ड ने इस पूरी परियोजना के लिए 16.01 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होने की तारीख से छह महीने के भीतर सभी 29 विद्यालयों में निर्माण और उपकरण लगाने का काम पूरा कर लिया जाएगा।

इस समझौते के दौरान जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा, संयुक्त सचिव और एनएसटीएफडीसी के सीएमडी टी. रौमुआन पाइट, उप सचिव गणेश नागराजन उपस्थित रहे। वहीं एचपीसीएल की ओर से निदेशक (मानव संसाधन) के.एस. शेट्टी, मुख्य महाप्रबंधक पवन कुमार सहगल और अनुपम तिवारी समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। एनएसटीएफडीसी की ओर से अपर महाप्रबंधक बिस्मिता दास, मुख्य प्रबंधक हिमांशु विश्वकर्मा और प्रबंधक विकास रंजन मौजूद रहे।

राजस्थान के 11 जिलों के विद्यार्थियों को मिलेगा सीधा लाभ

यह परियोजना राजस्थान के 11 प्रमुख जनजातीय बाहुल्य और ग्रामीण जिलों में लागू की जा रही है। इन जिलों में शामिल हैं:

  • अलवर
  • बांसवाड़ा
  • बारां
  • डूंगरपुर
  • जयपुर
  • करौली
  • प्रतापगढ़
  • सवाई माधोपुर
  • सिरोही
  • टोंक
  • उदयपुर

इन 29 विद्यालयों की कुल स्वीकृत क्षमता कक्षा 6 से 12 तक 13,920 विद्यार्थियों की है। इनमें से अधिकांश बच्चे पहली पीढ़ी के डिजिटल शिक्षार्थी हैं, जो अपने परिवार में पहली बार कंप्यूटर और इंटरनेट का उपयोग करना सीख रहे हैं। योजना में छात्राओं के समान प्रतिनिधित्व पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे जनजातीय बालिकाओं को तकनीकी शिक्षा में आगे आने का अवसर मिलेगा।

स्मार्ट क्लासरूम और कंप्यूटर लैब में कौन-कौन सी सुविधाएं मिलेंगी?

प्रत्येक एकलव्य मॉडल स्कूल को आधुनिक तकनीकी उपकरणों से सुसज्जित किया जाएगा। इसके तहत प्रत्येक विद्यालय में निम्नलिखित सुविधाएं प्रदान की जाएंगी:

  • 4 स्मार्ट कक्षाएं: हर स्मार्ट क्लास में 86-इंच का इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल, पहले से लोड किए गए लाइसेंस प्राप्त शिक्षण सॉफ्टवेयर, ओपन एजुकेशनल रिसोर्स, स्पीकर और वेबकैम वाले ऑडियो-विजुअल उपकरण लगाए जाएंगे।
  • नेटवर्क्ड कंप्यूटर लैब: डेस्कटॉप कंप्यूटर, यूपीएस पावर बैकअप, स्ट्रक्चर्ड लैन (LAN) नेटवर्क, मल्टी-फंक्शन प्रिंटर, नया फर्नीचर, एयर कंडीशनिंग (AC), इलेक्ट्रिकल नवीनीकरण और सुरक्षा प्रणालियां होंगी।
  • प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए टैबलेट: हर स्कूल में प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग सामग्री से पहले से लोड किए गए 10 टैबलेट दिए जाएंगे।
  • इंटरनेट कनेक्टिविटी: पूरी वायरिंग, इंस्टॉलेशन और एक साल के मुफ्त इंटरनेट सब्सक्रिप्शन के साथ हाई-स्पीड कनेक्टिविटी दी जाएगी।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और सीएसआर दिशानिर्देशों से जुड़ाव

यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के प्राथमिक उद्देश्यों से मेल खाती है। एनईपी 2020 में माध्यमिक स्तर से ही कोडिंग, कम्प्यूटेशनल सोच और डिजिटल साक्षरता को शिक्षा प्रणाली में शामिल करने पर जोर दिया गया है। सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित समूहों के बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए यह डिजिटल ढांचा मददगार साबित होगा।

इसके अलावा, यह परियोजना सार्वजनिक उद्यम विभाग (DPE) द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 और 2027-28 के लिए केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSE) की कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) गतिविधियों हेतु निर्धारित ‘नवीन आजीविका संवर्धन’ थीम के भी पूरी तरह अनुकूल है।

कार्यान्वयन और संचालन की त्रिस्तरीय व्यवस्था

प्रोजेक्ट को पारदर्शी और प्रभावी ढंग से चलाने के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय ने एक मजबूत संस्थागत ढांचा तैयार किया है:

1. एनएसटीएफडीसी (NSTFDC): खरीद, आपूर्ति और बुनियादी ढांचे के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालेगा।

2. नेस्ट्स (NESTS): नेशनल एजुकेशन सोसाइटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स शैक्षणिक गुणवत्ता का सत्यापन करेगा और काम के दोहराव को रोकेगा।

3. राज्य ईएमआरएस सोसाइटी व स्कूल प्राचार्य: जमीन की तैयारी, कमरों की उपलब्धता और दैनिक आधार पर उपकरणों के उपयोग की देखरेख करेंगे।

जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा ने कार्यक्रम में कहा कि शिक्षा पीढ़ियों के विकास का सबसे सशक्त माध्यम है। उन्होंने विश्वास जताया कि एचपीसीएल के सहयोग से शुरू हुई यह डिजिटल पहल आदिवासी बच्चों के लिए उच्च शिक्षा और नए करियर के दरवाजे खोलेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: राजस्थान के किन-किन जिलों के एकलव्य मॉडल स्कूल इसमें शामिल हैं?
उत्तर: यह परियोजना राजस्थान के 11 जिलों – अलवर, बांसवाड़ा, बारां, डूंगरपुर, जयपुर, करौली, प्रतापगढ़, सवाई माधोपुर, सिरोही, टोंक और उदयपुर के 29 विद्यालयों में लागू की जा रही है।

प्रश्न: इस डिजिटल प्रोजेक्ट की कुल लागत कितनी है और काम कब तक पूरा होगा?
उत्तर: एचपीसीएल द्वारा स्वीकृत इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 16.01 करोड़ रुपये है। इसे एमओयू हस्ताक्षर की तारीख से 6 महीने के भीतर पूरा किया जाएगा।

प्रश्न: एकलव्य मॉडल स्कूल के छात्रों को इस योजना से क्या विशेष लाभ मिलेगा?
उत्तर: प्रत्येक स्कूल को 4 स्मार्ट क्लासरूम, एक आधुनिक कंप्यूटर लैब, 1 साल का मुफ्त इंटरनेट और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए 10 प्री-लोड टैबलेट दिए जाएंगे। इससे हर साल 10,000 से अधिक जनजातीय छात्रों को डिजिटल शिक्षा मिलेगी।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

दीक्षा कुमारी
दीक्षा कुमारी
दीक्षा कुमारी आज पत्रिका में वरिष्ठ संपादक हैं और शिक्षा, परीक्षाएँ एवं परिणाम, खेल, मनोरंजन, धर्म-संस्कृति तथा लाइफस्टाइल कवरेज की ज़िम्मेदारी संभालती हैं। वे परीक्षा अधिसूचनाओं, रिजल्ट, प्रवेश प्रक्रिया, त्योहारों की परंपराओं और स्वास्थ्य-जीवनशैली से जुड़ी सामग्री को सरल, सटीक और सत्यापित रूप में पाठकों तक पहुँचाती हैं। स्वास्थ्य से जुड़े लेखों में वे हमेशा योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेने की सलाह जोड़ती हैं। सुझाव/सुधार: corrections@aajpatrika.com।

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