
अगस्त 2026 तक देश में डेटा सेंटर क्षमता बढ़कर 1.57 गीगावाट हुई, 2030 तक 8 गीगावाट पहुंचने का अनुमान है।
मुख्य बातें
- भारत में डेटा सेंटर क्षमता 2020 में 375 मेगावाट से बढ़कर अगस्त 2026 तक 1.57 गीगावाट हुई।
- डेटा सेंटर क्षेत्र में 70 अरब डॉलर का निवेश हो चुका है और 90 अरब डॉलर के प्रोजेक्ट घोषित हैं।
- बजट 2026-27 में विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए 2047 तक टैक्स हॉलिडे का प्रावधान।
- 15 जुलाई 2026 को सेमीकॉन 2.0 के लिए 1,27,500 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया।
- एनआईसी के दिल्ली, पुणे, हैदराबाद और भुवनेश्वर में राष्ट्रीय सेंटर तथा राज्यों में 37 छोटे डेटा सेंटर कार्यरत हैं।
डेटा सेंटर भारत में डिजिटल विकास को कैसे गति दे रहे हैं?
डेटा सेंटर भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और दैनिक ऑनलाइन सेवाओं को निरंतर संचालित करने वाली रीढ़ बन चुके हैं। अगस्त 2026 तक देश में डेटा सेंटरों की क्षमता 1.57 गीगावाट पहुंच चुकी है। ये सेंटर सुरक्षित सर्वर नेटवर्क के माध्यम से डिजिटल भुगतान, ई-गवर्नेंस और क्लाउड सेवाओं को 24 घंटे निर्बाध बनाए रखते हैं।
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, देश का डेटा सेंटर क्षेत्र अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज कर रहा है। वर्ष 2020 में भारत में डेटा सेंटरों की कुल स्थापित विद्युत क्षमता महज 375 मेगावाट थी। यह क्षमता अगस्त 2026 तक बढ़कर 1.57 गीगावाट पर पहुंच गई है। सरकारी अनुमानों के मुताबिक वर्ष 2030 तक यह क्षमता 8 गीगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है। वहीं विद्युत मंत्रालय के केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने अनुमान जताया है कि वर्ष 2031-32 तक डेटा सेंटरों की बिजली मांग 17 गीगावाट तक हो सकती है।
इस क्षेत्र में पूंजी का प्रवाह भी तेज हुआ है। अब तक भारत के डेटा सेंटर क्षेत्र में लगभग 70 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश हो चुका है। इसके अतिरिक्त 90 अरब अमेरिकी डॉलर के नए प्रोजेक्ट्स की घोषणाएं की जा चुकी हैं। यह निवेश भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर पर वैश्विक निवेशकों के भरोसे को दिखाता है।
डेटा सेंटर भारत: बुनियादी ढांचे का दर्जा और टैक्स प्रोत्साहन
सरकार ने इस पूरे इकोसिस्टम को मजबूती देने के लिए कई बड़े नीतिगत कदम उठाए हैं। केंद्रीय बजट 2022-23 में डेटा सेंटरों को बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) की सामंजस्यपूर्ण सूची में शामिल किया गया था। इस फैसले के बाद डेटा सेंटरों को राष्ट्रीय राजमार्गों, बिजली ग्रिडों और हवाई अड्डों की तर्ज पर आसान और सस्ती दरों पर दीर्घकालिक ऋण मिलना आसान हो गया।
केंद्रीय बजट 2026-27 में विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए बड़ी राहत घोषित की गई है। इसके तहत अधिसूचित विदेशी कंपनियों को वर्ष 2047 तक टैक्स हॉलिडे की सुविधा दी गई है। यह नियम कर वर्ष 2026-27 से 2046-47 तक प्रभावी रहेगा। इसका सीधा फायदा भारत में सर्वर और क्लाउड बुनियादी ढांचा स्थापित करने वाले अंतरराष्ट्रीय परिचालनों को मिलेगा।
एनआईसी नेटवर्क और सरकारी डिजिटल सेवाओं की स्थिति
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) ने देश भर में सरकारी डेटा सेवाओं को संभालने के लिए मजबूत आधार तैयार किया है। एनआईसी ने नई दिल्ली, पुणे, हैदराबाद और भुवनेश्वर में अपने मुख्यालयों पर राष्ट्रीय डेटा सेंटर स्थापित किए हैं। इसके अलावा विभिन्न राज्यों की राजधानियों में 37 छोटे डेटा सेंटर भी संचालित किए जा रहे हैं। ये केंद्र सरकारी विभागों, ई-गवर्नेंस पोर्टल और नागरिक सेवाओं को चौबीसों घंटे सुरक्षित कंप्यूटिंग क्षमता प्रदान करते हैं।
सेमीकॉन 2.0 और संबद्ध योजनाओं का समर्थन
डेटा सेंटरों के विकास को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने कई सहायक योजनाओं में वित्तीय आवंटन बढ़ाया है:
- सेमीकॉन इंडिया 2.0: 15 जुलाई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत 1,27,500 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ सेमीकॉन 2.0 को स्वीकृति दी।
- इंडियाएआई मिशन: देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इकोसिस्टम के लिए 10,371.92 करोड़ रुपये का कुल बजट स्वीकृत किया गया है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (ECMS): इस योजना का वित्तीय आवंटन 22,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
- पीएलआई 2.0: आईटी हार्डवेयर और सर्वर विनिर्माण के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना लागू की गई है।
ऊर्जा दक्षता और बीआईएस के नए मानक
डेटा सेंटरों में भारी मात्रा में बिजली और कूलिंग के उपयोग को देखते हुए सरकार ने पर्यावरण मानकों पर विशेष ध्यान दिया है। परमाणु ऊर्जा का सतत दोहन और विकास (शांति) अधिनियम, 2025 के माध्यम से स्मॉल मॉड्यूलर और माइक्रो न्यूक्लियर रिएक्टरों से डेटा सेंटरों को स्वच्छ बिजली देने का खाका तैयार किया गया है।
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की तकनीकी समिति एलआईटीडी 31 ने डेटा सेंटरों की दक्षता मापने के लिए पीयूई (पावर यूसेज इफेक्टिवनेस), सीयूई (कार्बन यूसेज इफेक्टिवनेस), डब्ल्यूयूई (वॉटर यूसेज इफेक्टिवनेस) और सीईआर (कूलिंग एफिशिएंसी रेशियो) मानक तय किए हैं। ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) ने इसके लिए ईसीबीसी 2017 और ईसीएसबीसी 2024 कोड अधिसूचित किए हैं। प्रत्यक्ष लिक्विड कूलिंग और इमर्शन कूलिंग जैसी आधुनिक तकनीकें पानी और ऊर्जा की खपत घटाने में मदद कर रही हैं।
इसका असर: एक क्लिक पर कैसे काम करता है डेटा सेंटर?
जब कोई नागरिक मोबाइल ऐप से बैंक बैलेंस चेक करता है या डिजिटल भुगतान करता है, तो वह रिक्वेस्ट नेटवर्क के जरिए डेटा सेंटर पहुंचती है। वहां सबसे पहले सुरक्षा लेयर साइबर खतरों की जांच करती है। इसके बाद लोड बैलेंसर आने वाले ट्रैफिक को उपलब्ध सर्वर पर भेजता है। एप्लिकेशन सर्वर ऑर्डर प्रोसेस करता है और डेटाबेस सर्वर से जरूरी जानकारी निकालता है। यह पूरी प्रक्रिया 1 से 2 सेकंड में पूरी होकर उपभोक्ता के स्क्रीन पर रिस्पॉन्स भेज देती है। वर्चुअलाइजेशन तकनीक के माध्यम से एक ही भौतिक सर्वर को कई मिनी-कंप्यूटरों में बांटकर संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? भारत में 2026 तक डेटा सेंटरों की क्षमता कितनी है?
उत्तर। अगस्त 2026 तक भारत में डेटा सेंटरों की स्थापित विद्युत क्षमता 1.57 गीगावाट तक पहुंच गई है, जो 2020 में 375 मेगावाट थी।
प्रश्न? डेटा सेंटरों को बुनियादी ढांचे का दर्जा मिलने से क्या फायदा हुआ?
उत्तर। इससे डेटा सेंटरों को राष्ट्रीय राजमार्गों और पावर ग्रिड की तरह आसान और किफायती दरों पर दीर्घकालिक ऋण मिलना आसान हो गया है।
प्रश्न? शांति अधिनियम 2025 डेटा सेंटरों के लिए क्यों जरूरी है?
उत्तर। शांति अधिनियम 2025 परमाणु ऊर्जा के माध्यम से डेटा सेंटरों और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को निरंतर और स्वच्छ बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद करता है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






