
भारतीय रिज़र्व बैंक ने साइबर धोखाधड़ी और मनी म्यूल खातों पर लगाम लगाने के लिए केवाईसी दिशा-निर्देशों में संशोधन का नया मसौदा सार्वजनिक किया है।
मुख्य बातें
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने ड्राफ्ट Reserve Bank of India (KYC) Amendment Directions, 2026 जारी किया।
- सुप्रीम कोर्ट के 4 अगस्त 2026 के आदेश के अनुपालन में एसओपी (SOP) तैयार किया गया है।
- यह नियम वाणिज्यिक बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों, पेमेंट्स बैंकों, आरआरबी और अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों पर लागू होगा।
- हितधारक और आम जनता 2 अक्टूबर 2026 तक इस मसौदे पर अपनी प्रतिक्रिया या सुझाव दर्ज करा सकते हैं।
आरबीआई केवाईसी नियम में संशोधन के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने एक नया मसौदा (ड्राफ्ट) जारी कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने ‘रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (नो योर कस्टमर) अमेंडमेंट डायरेक्टंस, 2026’ पर आम जनता, बैंकों और संबंधित हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बैंक खातों के जरिए होने वाले साइबर वित्तीय अपराधों और मनी म्यूल (Money Mule) गतिविधियों पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाना है।
आरबीआई केवाईसी नियम 2026 क्या है?
आरबीआई केवाईसी नियम 2026 भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी एक प्रस्तावित ढांचा है, जिसके तहत साइबर धोखाधड़ी या संदिग्ध मनी म्यूल गतिविधियों से जुड़े बैंक खातों पर तुरंत अस्थायी डेबिट होल्ड (Debit Hold) लगाया जाएगा। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के आधार पर तैयार इस मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का मकसद ऑनलाइन वित्तीय ठगी के शिकार पीड़ितों के पैसे को बचाना है।
भारतीय रिज़र्व बैंक के मुख्य महाप्रबंधक ब्रिज राज द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह मसौदा केवाईसी दिशा-निर्देश 2025 में संशोधन का प्रस्ताव करता है। जब भी किसी बैंक खाते का इस्तेमाल अवैध लेनदेन या साइबर अपराध के लिए किया जाएगा, तो बैंक उस खाते की पूरी राशि या संदिग्ध रकम पर अस्थायी रूप से निकासी रोक सकेंगे।
क्यों पड़े आरबीआई केवाईसी नियम में बदलाव?
देश में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 4 अगस्त 2026 को अपने एक आदेश में रिज़र्व बैंक को कड़े कदम उठाने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी और मनी म्यूल खातों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के लिए बैंकों हेतु एक स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाई जाए। इसी आदेश का अनुपालन करते हुए रिज़र्व बैंक ने यह ड्राफ्ट तैयार किया है।
मौजूदा व्यवस्था में केवाईसी (Know Your Customer) दिशानिर्देश 2025 के तहत ‘बैंक खातों के संचालन और मनी म्यूल्स’ पर निर्देश पहले से मौजूद हैं। हालांकि, साइबर फ्रॉड के दौरान चुराई गई रकम को अपराधी बहुत तेजी से कई अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर लेते हैं। नई प्रक्रिया से संदिग्ध खातों में रकम तुरंत ब्लॉक हो जाएगी, जिससे ठगी के पैसों को निकाला नहीं जा सकेगा।
मनी म्यूल और डेबिट होल्ड का क्या अर्थ है?
डिजिटल बैंकिंग के दौर में मनी म्यूल खातों का दुरुपयोग एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस व्यवस्था को सही से समझने के लिए कुछ मुख्य शब्दों को जानना ज़रूरी है:
- मनी म्यूल (Money Mule): यह एक ऐसा बैंक खाता होता है जिसका उपयोग साइबर अपराधी या वित्तीय ठग अवैध रूप से हासिल किए गए पैसों को ट्रांसफर करने के लिए करते हैं। कई बार खाताधारक को पैसे के लालच में या झांसे में लेकर उसके खाते का इस्तेमाल किया जाता है।
- अस्थायी डेबिट होल्ड (Temporary Debit Hold): इसका मतलब है कि बैंक संदिग्ध खाते से पैसे निकालने या ट्रांसफर करने पर तुरंत रोक लगा देगा। हालांकि, उस खाते में पैसे जमा हो सकते हैं, लेकिन जब तक जांच पूरी नहीं होती, पैसे निकाले नहीं जा सकते।
- साइबर इनेबल्ड फ्रॉड (Cyber-enabled Fraud): इंटरनेट, फ़िशिंग, फर्जी कॉल्स या ऑनलाइन ऐप्स के ज़रिए की जाने वाली कोई भी वित्तीय धोखाधड़ी इसके तहत आती है।
किन-किन बैंकों पर लागू होंगे नए दिशा-निर्देश?
भारतीय रिज़र्व बैंक का यह ड्राफ्ट संशोधित नियम देश के लगभग सभी प्रमुख विनियमित वित्तीय संस्थानों पर प्रभावी होगा। इसमें निम्नलिखित संस्थान शामिल हैं:
- सभी वाणिज्यिक बैंक (Commercial Banks)
- स्मॉल फाइनेंस बैंक (Small Finance Banks)
- पेमेंट्स बैंक (Payments Banks)
- क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (Regional Rural Banks – RRBs)
- लोकल एरिया बैंक (Local Area Banks)
- शहरी सहकारी बैंक (Urban Cooperative Banks – UCBs)
रिज़र्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि जनता और विनियमित निकायों से मिलने वाली प्रतिक्रियाओं की समीक्षा के बाद इन सभी संस्थाओं के लिए अंतिम दिशानिर्देश अलग से जारी किए जाएंगे।
इसका असर: आम खाताधारकों को क्या लाभ होगा?
अगर कोई आम नागरिक साइबर ठगी का शिकार होता है, तो सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि अपराधी मिनटों में पैसा कई बैंक खातों से होते हुए निकाल लेते हैं। इस नए एसओपी के लागू होने के बाद, जैसे ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या पुलिस के माध्यम से शिकायत दर्ज होगी, संबंधित संदिग्ध खातों पर तुरंत डेबिट होल्ड लग जाएगा।
इससे ठगी का शिकार हुए व्यक्ति के पैसे के वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाएगी। साथ ही, जो लोग पैसों के लालच में आकर अपना बैंक खाता किराए पर देते हैं या साइबर अपराधियों के साथ साझा करते हैं, उनके खातों को तुरंत फ्रीज किया जा सकेगा। इससे आम जनता में वित्तीय जागरूकता बढ़ेगी और फर्जी खातों के दुरुपयोग पर लगाम लगेगी।
राय दर्ज कराने की प्रक्रिया और अंतिम तारीख
रिज़र्व बैंक ने इस संशोधन मसौदे को पारदर्शी परामर्श प्रक्रिया के तहत जारी किया है। बैंक, वित्तीय विशेषज्ञ, हितधारक और सामान्य नागरिक इस मसौदे पर अपने सुझाव दर्ज करा सकते हैं।
- अंतिम तिथि: सुझाव जमा करने की अंतिम तारीख 2 अक्टूबर 2026 तय की गई है।
- वेबसाइट के माध्यम से: भारतीय रिज़र्व बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूद ‘कनेक्ट 2 रेगुलेट’ (Connect 2 Regulate) सेक्शन के ज़रिए राय भेजी जा सकती है।
- ईमेल द्वारा: हितधारक ईमेल के माध्यम से भी अपने सुझाव दे सकते हैं। इसके लिए ईमेल का विषय (Subject) ‘Feedback on Draft Reserve Bank of India (Know Your Customer) Amendment Directions, 2026’ लिखना अनिवार्य होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: आरबीआई केवाईसी नियम में संशोधन किस आदेश के बाद किया गया है?
उत्तर: सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 4 अगस्त 2026 को दिए गए आदेश के आधार पर रिज़र्व बैंक ने यह संशोधन ड्राफ्ट तैयार किया है।
प्रश्न 2: क्या डेबिट होल्ड लगने पर पूरा खाता बंद हो जाएगा?
उत्तर: नहीं, डेबिट होल्ड का अर्थ केवल खाते से पैसे निकालने या ट्रांसफर करने पर अस्थायी रोक लगाना है, ताकि संदिग्ध रकम को निकाला न जा सके।
प्रश्न 3: इस ड्राफ्ट पर आम जनता कब तक अपनी प्रतिक्रिया दे सकती है?
उत्तर: आम नागरिक और हितधारक 2 अक्टूबर 2026 तक रिज़र्व बैंक की वेबसाइट या ईमेल के माध्यम से अपने सुझाव भेज सकते हैं।
यह रिपोर्ट RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






