
ईवीएम और वीवीपैट की कार्यप्रणाली, मतदान प्रक्रिया, सुरक्षा उपाय और पर्चियों की गिनती से जुड़ी पूरी जानकारी हिंदी में पढ़ें।
मुख्य बातें
- ईवीएम एक स्टैंडअलोन मशीन है, जो किसी वाई-फाई, ब्लूटूथ या इंटरनेट से नहीं जुड़ सकती।
- वीवीपैट पर्ची पर मतदाता का चुना हुआ उम्मीदवार, चुनाव चिह्न और क्रमांक 7 सेकंड तक दिखता है।
- वास्तविक मतदान से पहले पोलिंग एजेंटों की मौजूदगी में कम से कम 50 वोटों का मॉक पोल किया जाता है।
- प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के 5 यादृच्छिक मतदान केंद्रों की वीवीपैट पर्चियों का अनिवार्य भौतिक मिलान होता है।
ईवीएम वीवीपैट भारतीय चुनाव प्रणाली की दो ऐसी इकाइयां हैं जो मतदाता के डाले गए वोट को इलेक्ट्रॉनिक रूप में दर्ज करने और उसकी कागजी पर्ची दिखाकर पुष्टि करने का काम करती हैं। जब कोई नागरिक वोट डालता है, तो कंट्रोल यूनिट में वोट दर्ज होने के साथ ही वीवीपैट की पारदर्शी खिड़की में 7 सेकंड के लिए एक पर्ची दिखाई देती है।
ईवीएम वीवीपैट क्या है और कैसे काम करता है?
ईवीएम वीवीपैट एक बिना इंटरनेट चलने वाला चुनावी उपकरण है जिसमें बैलेट यूनिट, कंट्रोल यूनिट और वीवीपैट आपस में केबल से जुड़े होते हैं। जब मतदाता बैलेट यूनिट पर बटन दबाता है, तो वीवीपैट मशीन में उम्मीदवार का नाम, क्रमांक और चुनाव चिह्न छपी हुई पर्ची 7 सेकंड तक दिखती है और फिर अपने आप कटकर सीलबंद डिब्बे में गिर जाती है।
ईवीएम वीवीपैट के मुख्य हिस्से और उनकी भूमिका
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) मुख्य रूप से तीन अलग-अलग उपकरणों से मिलकर बनते हैं। इन तीनों का समन्वय मतदान प्रक्रिया को पूरा करता है।
| उपकरण का नाम | मुख्य कार्य | कहाँ रखा होता है? |
|---|---|---|
| बैलेट यूनिट (BU) | उम्मीदवारों के नाम और नीले बटन वाला पैनल | वोटिंग कंपार्टमेंट (गोपनीय जगह) |
| वीवीपैट (VVPAT) | वोट की कागजी पर्ची प्रिंट करके दिखाना | वोटिंग कंपार्टमेंट (BU के पास) |
| कंट्रोल यूनिट (CU) | वोट को अपनी मेमोरी में सुरक्षित दर्ज करना | पीठासीन अधिकारी की मेज पर |
बैलेट यूनिट पर कुल 16 उम्मीदवारों के नाम आ सकते हैं। यदि उम्मीदवारों की संख्या 16 से अधिक होती है, तो अतिरिक्त बैलेट यूनिट को पहली यूनिट के साथ श्रृंखला (cascade) में जोड़ा जाता है। कंट्रोल यूनिट पूरी प्रक्रिया को संचालित करती है और अंतिम परिणाम इसी में सुरक्षित रहता है।
ईवीएम वीवीपैट में वोट दर्ज होने की चरण-दर-चरण प्रक्रिया
मतदान केंद्र के भीतर एक वोट दर्ज होने की पूरी प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में पूरी होती है:
- पीठासीन अधिकारी अपनी मेज पर रखी कंट्रोल यूनिट का ‘बैलेट’ (Ballot) बटन दबाकर मशीन को वोट के लिए तैयार करते हैं।
- मतदाता वोटिंग कंपार्टमेंट में जाकर बैलेट यूनिट पर अपने पसंदीदा उम्मीदवार के नाम के आगे बना नीला बटन दबाता है।
- नीला बटन दबाते ही उस उम्मीदवार के नाम के सामने वाली लाल बत्ती जलती है।
- उसी समय वीवीपैट की स्क्रीन पर एक पारदर्शी खिड़की के पीछे कागजी पर्ची छपती है, जिस पर उम्मीदवार का क्रमांक, नाम और चुनाव चिह्न साफ दिखता है।
- वीवीपैट में यह पर्ची लगभग 7 सेकंड तक टंगी रहती है ताकि मतदाता अपने वोट की पुष्टि कर सके।
- सात सेकंड पूरे होते ही पर्ची कटकर वीवीपैट के नीचे बने सीलबंद ड्रॉप बॉक्स में गिर जाती है।
- कंट्रोल यूनिट से एक लंबी बीप (Beep) की आवाज आती है, जो इस बात का संकेत है कि वोट सफलतापूर्वक दर्ज हो गया है।
मॉक पोल और सीलिंग: निष्पक्षता की सुरक्षा प्रक्रिया
मतदान वाले दिन वास्तविक वोटिंग शुरू होने से कम से कम 90 मिनट पहले एक मॉक पोल (बनावटी मतदान) कराया जाता है। इसमें चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के मतदान एजेंटों की उपस्थिति अनिवार्य होती है।
मॉक पोल के दौरान कम से कम 50 वोट डालकर मशीन की सटीकता की जांच की जाती है। वोट डालने के बाद कंट्रोल यूनिट पर परिणाम देखा जाता है और वीवीपैट के ड्रॉप बॉक्स को खोलकर पर्चियों का मिलान किया जाता है। जब सभी एजेंट संतुष्ट हो जाते हैं, तो कंट्रोल यूनिट का ‘क्लीन’ (Clear) बटन दबाकर सभी डेटा मिटा दिया जाता है।
इसके बाद वीवीपैट के ड्रॉप बॉक्स से मॉक पोल की पर्चियां निकालकर उन पर ‘मॉक पोल स्लिप’ की मुहर लगाई जाती है और उन्हें एक काले लिफाफे में सील कर दिया जाता है। फिर ईवीएम और वीवीपैट को विशेष पेपर सील, एड्रेस टैग और हरी सील (Green Paper Seal) से सील किया जाता है। इस सीलिंग प्रक्रिया पर पोलिंग एजेंट भी अपने हस्ताक्षर करते हैं।
वीवीपैट पर्चियों की गिनती और भौतिक सत्यापन
मतदान समाप्त होने पर पीठासीन अधिकारी ‘क्लोज’ (Close) बटन दबाते हैं, जिसके बाद मशीन में कोई नया वोट दर्ज नहीं हो सकता। इसके बाद मशीनों को कैरी केस में बंद करके सील किया जाता है और स्ट्रॉन्ग रूम में जमा कर दिया जाता है। स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों द्वारा की जाती है और 24 घंटे सीसीटीवी से निगरानी होती है।
गणना वाले दिन सबसे पहले कंट्रोल यूनिट से वोटों की गिनती होती है। भारत निर्वाचन आयोग के नियमानुसार, प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के यादृच्छिक (random) रूप से चुने गए 5 मतदान केंद्रों की वीवीपैट पर्चियों की अनिवार्य रूप से भौतिक गिनती की जाती है। यदि कंट्रोल यूनिट के आंकड़े और वीवीपैट की पर्चियों की गिनती में कोई अंतर पाया जाता है, तो कानूनन वीवीपैट पर्चियों की गिनती को ही अंतिम और मान्य माना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? क्या ईवीएम वीवीपैट को वाई-फाई या ब्लूटूथ से हैक किया जा सकता है?
उत्तर। नहीं, ईवीएम और वीवीपैट पूरी तरह स्टैंडअलोन उपकरण हैं। इनमें कोई भी वायरलेस रिसीवर, ब्लूटूथ, वाई-फाई या इंटरनेट मॉड्यूल नहीं होता है।
प्रश्न? क्या मतदाता वीवीपैट की पर्ची अपने साथ घर ले जा सकता है?
उत्तर। नहीं, वीवीपैट पर्ची केवल 7 सेकंड तक पारदर्शी कांच के पीछे दिखाई देती है और फिर स्वतः कटकर सीलबंद ड्रॉप बॉक्स में गिर जाती है। मतदान की गोपनीयता बनाए रखने के लिए पर्ची बाहर निकालने का कोई नियम नहीं है।
प्रश्न? यदि वीवीपैट में गलत पर्ची दिखे तो मतदाता को क्या करना चाहिए?
उत्तर। मतदाता तुरंत पीठासीन अधिकारी से शिकायत कर सकता है। इसके लिए संचालन नियमों के नियम 49MA के तहत एक परीक्षण वोट (Test Vote) का प्रावधान है, लेकिन यदि शिकायत झूठी पाई जाती है तो कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
यह लेख भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा तय की गई आधिकारिक प्रक्रियाओं और नियमों पर आधारित सामान्य जानकारी के लिए है। चुनाव प्रक्रिया और नियमों की ताज़ा स्थिति जानने के लिए निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट eci.gov.in पर जांच करें।
आधिकारिक जानकारी और नवीनतम अपडेट के लिए: https://eci.gov.in
यह लेख आज पत्रिका की एक्सप्लेनर डेस्क द्वारा सामान्य जागरूकता के लिए तैयार किया गया है। नियम और प्रक्रियाएं समय-समय पर बदल सकती हैं — कृपया आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें। सुधार/सुझाव: corrections@aajpatrika.com






