
कैबिनेट ने पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों में 656 किमी नई रेल लाइनों के लिए 10,783 करोड़ रुपये स्वीकृत किए।
मुख्य बातें
- कैबिनेट ने 10,783 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन रेल मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी।
- पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों में 656 किमी नया रेल नेटवर्क बनेगा।
- लगभग 4,790 गांवों और 56 लाख आबादी को सीधी रेल कनेक्टिविटी का फायदा मिलेगा।
- अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता में प्रति वर्ष 27 मिलियन टन (MTPA) का इजाफा होगा।
- तेल आयात में 12 करोड़ लीटर की कमी और कार्बन उत्सर्जन में 62 करोड़ किग्रा की गिरावट आएगी।
केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 10,783 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली नई रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजना को मंजूरी प्रदान कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। पीआईबी के अनुसार, इस परियोजना के तहत पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों में रेल लाइनों का विस्तार किया जाएगा। इससे भारतीय रेलवे के वर्तमान नेटवर्क में लगभग 656 किलोमीटर की वृद्धि होगी।
रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजना क्या है और इससे क्या लाभ होगा?
रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजना भारतीय रेलवे के नेटवर्क का विस्तार करने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की एक प्रमुख पहल है। इसके तहत पांच राज्यों के 14 जिलों में लगभग 656 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइनें बिछाई जाएंगी। इस योजना से 4,790 गांवों और लगभग 56 लाख लोगों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी।
रेल मंत्रालय के अनुसार इस रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजना में तीन मुख्य रेल मार्गों का निर्माण शामिल है। पहली परियोजना खड़गपुर से झारसुगुड़ा (बागदेही) के बीच चौथी रेल लाइन का निर्माण है। दूसरी परियोजना कटनी से पेंड्रा रोड के बीच चौथी रेल लाइन बिछाने की है। वहीं तीसरी परियोजना बिलासपुर (उसलापुर) से पेंड्रा रोड के बीच तीसरी रेल लाइन के निर्माण से जुड़ी है। इन तीनों व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों की आवाजाही सुगम होगी।
इन नए ट्रैकों के निर्माण से परिचालन क्षमता में काफी सुधार आएगा। वर्तमान में मालगाड़ियों और पैसेंजर ट्रेनों के एक ही ट्रैक पर चलने के कारण अक्सर देरी होती थी। अतिरिक्त लाइनें बनने से परिचालन सुव्यवस्थित होगा और भीड़भाड़ कम होगी। इससे यात्रियों को अधिक समयबद्ध और विश्वसनीय ट्रेन सेवा मिलेगी।
रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजना के मुख्य बिंदु और बजट विवरण
इस रेल विस्तार योजना के माध्यम से पूर्वी और मध्य भारत के कई प्रमुख औद्योगिक और ग्रामीण क्षेत्रों को एक-दूसरे से जोड़ा जाएगा। योजना के मुख्य आंकड़े और विवरण नीचे दिए गए हैं:
- कुल बजट आवंटन: केंद्र सरकार द्वारा 10,783 करोड़ रुपये की मंजूरी।
- कवर किए गए राज्य: पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़।
- कवर किए गए जिले: कुल 14 जिलों में रेल पटरियों का निर्माण होगा।
- नई ट्रैक लंबाई: भारतीय रेल नेटवर्क में लगभग 656 किमी की वृद्धि होगी।
- लाभांवित ग्रामीण क्षेत्र: लगभग 4,790 गांवों की 56 लाख आबादी को फायदा होगा।
- अतिरिक्त माल ढुलाई: 27 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) की नई क्षमता मिलेगी।
- पर्यावरण लाभ: लगभग 12 करोड़ लीटर तेल आयात में कमी आएगी।
इस प्रकार रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजना न केवल यात्रा का समय घटाएगी बल्कि संबंधित राज्यों में आर्थिक गतिविधियों को नया बल प्रदान करेगी। इससे क्षेत्र के लोगों के लिए नए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर निर्मित होंगे।
पीएम गति शक्ति और माल ढुलाई क्षमता का विस्तार
प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजना का ढांचा तैयार किया गया है। गति शक्ति योजना का मूल उद्देश्य एकीकृत योजना और विभिन्न हितधारकों के समन्वय से मल्टीमॉडल-कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना है। इससे लॉजिस्टिक्स नेटवर्क अधिक मजबूत और तेज बनेगा।
यह पूरा क्षेत्र देश का प्रमुख औद्योगिक बेल्ट है, जहां से कोयला, सीमेंट, लोहा और इस्पात जैसे भारी सामानों का परिवहन होता है। अतिरिक्त ट्रैक क्षमता मिलने से भारतीय रेल प्रति वर्ष 27 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई करने में सक्षम होगी। माल ढुलाई सुगम होने से देश के प्रमुख उद्योगों को कच्चा माल समय पर मिलेगा और लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी।
धार्मिक और पर्यटन स्थलों से सीधे जुड़ेंगे यात्री
रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजना के लागू होने से न केवल व्यापारिक माल ढुलाई आसान होगी, बल्कि देश के कई प्रसिद्ध पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक पहुंच भी सुगम हो जाएगी। इन रूटों पर नई लाइनें बिछने से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को यात्रा करने में सहूलियत मिलेगी।
जिन प्रमुख तीर्थ और पर्यटन स्थलों का रेल संपर्क बेहतर होगा, उनमें ओडिशा का तारातारिणी मंदिर और झारसुगुड़ा के पास स्थित प्राचीन श्री क्षेत्र जगन्नाथ मंदिर शामिल हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, अचानकमार टाइगर रिजर्व, अमरकंटक मंदिर, विराटेश्वर मंदिर, ज्वालेश्वर धाम, खुटाघाट बांध, मल्हार पुरातात्विक स्थल और रतनपुर महामाया मंदिर जैसे स्थान भी इस नेटवर्क से बेहतर तरीके से जुड़ेंगे। इससे स्थानीय पर्यटन और आजीविका को बढ़ावा मिलेगा।
पर्यावरण संरक्षण और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी
पर्यावरण की दृष्टि से रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजना का बेहद सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। रेल परिवहन को सड़क परिवहन की तुलना में अधिक ऊर्जा-कुशल और स्वच्छ माना जाता है। पटरियों की क्षमता बढ़ने से भारी सामान सड़क के बजाय रेल से भेजा जा सकेगा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस परियोजना से देश में लगभग 12 करोड़ लीटर तेल आयात की बचत होगी। इसके साथ ही कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन में लगभग 62 करोड़ किलोग्राम की कमी आएगी। यह पर्यावरणीय लाभ लगभग 2.48 करोड़ पौधे लगाने के बराबर है। इस तरह यह कदम भारत के हरित लक्ष्यों और जलवायु संकट से निपटने के प्रयासों में सहायक बनेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजना की कुल लागत कितनी है?
उत्तर: आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने इस रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजना के लिए कुल 10,783 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है।
प्रश्न: इस परियोजना के तहत किन राज्यों को कवर किया जा रहा है?
उत्तर: इसके अंतर्गत पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों को शामिल किया गया है।
प्रश्न: रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजना से पर्यावरण को क्या फायदा होगा?
उत्तर: इससे 12 करोड़ लीटर तेल आयात घटेगा और 62 करोड़ किग्रा CO2 उत्सर्जन कम होगा, जो 2.48 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






