
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने दक्षिण भारत में 10,021 करोड़ रुपये की 5 मल्टीट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
मुख्य बातें
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10,021 करोड़ रुपये की कुल अनुमानित लागत वाली 5 रेल परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की।
- तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 जिलों में 540 किलोमीटर बढ़ेगा भारतीय रेल नेटवर्क।
- इन परियोजनाओं से 2,121 गांवों के लगभग 52 लाख लोगों को मिलेगी सीधी और बेहतर रेल कनेक्टिविटी।
- प्रति वर्ष 47 मिलियन टन की अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता हासिल होगी और 8 करोड़ लीटर तेल आयात घटेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने दक्षिण भारत के चार प्रमुख राज्यों में 10,021 करोड़ रुपये की नई रेल परियोजनाएं मंजूर की हैं। पीआईबी के अनुसार, इन स्वीकृत मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं से भारतीय रेल के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 540 किलोमीटर की वृद्धि होगी। इस निर्णय से तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 जिलों को सीधा फायदा पहुंचेगा। पटरियों पर ट्रेन परिचालन को सुव्यवस्थित करने और भीड़भाड़ कम करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।
दक्षिण भारत में स्वीकृत 5 नई रेल परियोजनाएं क्या हैं?
केंद्रीय कैबिनेट द्वारा मंजूर की गई नई रेल परियोजनाएं तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 जिलों को आपस में जोड़ेंगी। लगभग 10,021 करोड़ रुपये की लागत वाली इन पांच रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं से कुल 540 किलोमीटर का रेल नेटवर्क बढ़ेगा। इससे लगभग 52 लाख आबादी वाले 2,121 गांवों की कनेक्टिविटी में सुधार होगा।
इन पांच मुख्य रेल परियोजनाएं से जुड़े प्रमुख रूट
रेल मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के आधार पर केंद्र सरकार ने जिन पांच मल्टीट्रैकिंग रेल मार्गों को मंजूरी दी है, वे दक्षिण भारत के सबसे व्यस्त रेल गलियारों में शामिल हैं। इन रेल मार्गों पर अतिरिक्त लाइनें बिछाने और दोहरीकरण का कार्य किया जाएगा।
- अरक्कोनम – रेनिगुंटा तीसरी और चौथी लाइन: 77 किलोमीटर लंबी इस लाइन के निर्माण से आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के बीच रेल यातायात को गति मिलेगी।
- व्हाइटफील्ड – बांगरपेट तीसरी और चौथी लाइन: कर्नाटक के औद्योगिक और आईटी कॉरिडोर को जोड़ने वाले 47 किलोमीटर के इस रेल खंड पर ट्रेनों का परिचालन सुगम होगा।
- होसुर – ओमालूर दोहरीकरण मार्ग: 147 किलोमीटर लंबे इस रेल मार्ग का दोहरीकरण होने से मालगाड़ियों और यात्री गाड़ियों की रफ्तार बढ़ेगी।
- सलेम – करूर – डिंडीगुल दोहरीकरण: 159 किलोमीटर लंबे इस ट्रैक के दोहरीकरण से तमिलनाडु के आंतरिक जिलों में परिवहन व्यवस्था मजबूत होगी।
- सिकंदराबाद (घाटकेसर) से काजीपेट मल्टीट्रैकिंग: 110 किलोमीटर की इस मल्टीट्रैकिंग परियोजना से तेलंगाना में व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों की देरी कम होगी।
पीएम गति शक्ति और रेल परियोजनाएं से माल ढुलाई में विस्तार
पीआईबी द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, ये सभी स्वीकृत रेल परियोजनाएं पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत तैयार की गई हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य एकीकृत योजना निर्माण और विभिन्न हितधारकों के समन्वय के माध्यम से बहु-मार्गीय संपर्क स्थापित करना है। पटरियों की क्षमता बढ़ने से यात्री गाड़ियों की समयबद्धता सुधरेगी और माल ढुलाई की परिचालन दक्षता में भारी इजाफा होगा।
इन पांचों रेल मार्गों पर लाइन क्षमता बढ़ने से औद्योगिक और कृषि उत्पादों के परिवहन में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। रेलवे के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस नए नेटवर्क से प्रति वर्ष 47 मिलियन टन (एमटीपीए) की अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता प्राप्त होगी। यह संपूर्ण क्षेत्र कोयला, सीमेंट, लोहा, इस्पात, ऑटोमोबाइल, खाद्यान्न, पेट्रोलियम उत्पाद, उर्वरक और कंटेनर माल के परिवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। अतिरिक्त रेल लाइनें बिछने से इन वस्तुओं की आवाजाही में लगने वाला समय और लॉजिस्टिक लागत दोनों घट जाएंगे।
रेल परियोजनाएं से पर्यावरण और ईंधन बचत के फायदे
भारतीय रेलवे को सड़क परिवहन की तुलना में अधिक ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण के अनुकूल माध्यम माना जाता है। केंद्र सरकार की इस पहल से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में भी सहायता मिलेगी। रेल नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण से सड़क मार्ग पर निर्भरता घटेगी और देश की कुल लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी।
माल ढुलाई सड़क से रेल मार्ग पर स्थानांतरित होने के फलस्वरूप प्रति वर्ष लगभग 8 करोड़ लीटर कच्चे तेल का आयात कम किया जा सकेगा। इसके साथ ही कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 42 करोड़ किलोग्राम की कमी दर्ज की जाएगी। यह पर्यावरणीय लाभ लगभग 2 करोड़ वृक्षारोपण के बराबर माना गया है। इस प्रकार आर्थिक प्रगति के साथ-साथ यह योजना हरित भारत के संकल्प को भी मजबूत करती है।
धार्मिक और पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाली रेल परियोजनाएं
इन पांच रेल परियोजनाओं के निर्माण से न केवल व्यापारिक गतिविधियों को बल मिलेगा, बल्कि देश भर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यात्रा करना अधिक आरामदायक हो जाएगा। स्वीकृत क्षमता वृद्धि से दक्षिण भारत के अनेक प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों और ऐतिहासिक पर्यटन केंद्रों तक सीधी और त्वरित रेल पहुंच संभव होगी।
इस नेटवर्क विस्तार से तिरूपति, सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर (तिरुत्तानी), श्री पद्मावती अम्मावारी मंदिर (तिरूचनूर), कोटिलिंगेश्वर देवालय और यादगिरिगुट्टा मंदिर जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा आसान होगी। इसके अलावा बंगारू तिरूपति, कोलार गोल्ड फील्ड्स, होगेनक्कल फॉल्स, होसुर किला, मेट्टूर बांध, कोडाइकनाल हिल्स, सत्यमंगलम वन्यजीव अभयारण्य, नमक्कल किला, सुरेंद्रपुरी और स्वर्णगिरि मंदिर जैसे प्रसिद्ध पर्यटन क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इससे स्थानीय पर्यटन उद्योग का विकास होगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
ग्रामीण विकास और रोजगार के नए अवसर
इन रेल परियोजनाओं का सीधा प्रभाव संबंधित क्षेत्रों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। पीएम मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन के अनुरूप, बुनियादी ढांचे का यह विस्तार स्थानीय निवासियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगा। 17 जिलों के अंतर्गत आने वाले 2,121 गांवों की 52 लाख से अधिक आबादी को इस आधुनिक रेल नेटवर्क का प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
परियोजनाओं के निर्माण के दौरान सिविल कार्य, ट्रैक बिछाने और सिग्नलिंग से जुड़े प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। निर्माण कार्य पूरा होने के पश्चात व्यापार, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और स्थानीय सेवाओं के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर स्वरोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे। यह पहल क्षेत्रीय विकास के अंतर को समाप्त करने में मददगार साबित होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: केंद्रीय कैबिनेट ने दक्षिण भारत के किन राज्यों के लिए नई रेल परियोजनाएं मंजूर की हैं?
उत्तर: कैबिनेट ने तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 जिलों में फैली 5 नई मल्टीट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनकी कुल लंबाई लगभग 540 किलोमीटर है।
प्रश्न: इन पांच नई रेल परियोजनाएं की कुल अनुमानित लागत कितनी है?
उत्तर: केंद्र सरकार इन पांच रेल परियोजनाओं पर कुल 10,021 करोड़ रुपये की राशि खर्च करेगी।
प्रश्न: इन रेल परियोजनाओं से पर्यावरण को क्या फायदा होगा?
उत्तर: इन परियोजनाओं से माल परिवहन रेल मार्ग से होने से लगभग 8 करोड़ लीटर तेल आयात घटेगा और 42 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






