
गरियाबंद के मैनपुर में 6 साल से अधूरा पड़ा है 300 मीटर का पुल, पैरी नदी पार करने के लिए लोहे की सीढ़ी चढ़ने को मजबूर हैं छात्र।
मुख्य बातें
- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गरियाबंद के मैनपुर में अधूरे पुल पर स्वतः संज्ञान लिया।
- छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को एनएचआरसी नोटिस भेजकर दो हफ्ते में रिपोर्ट मांगी गई है।
- मैनपुर में देहरगुडा और खंभाथा के बीच 300 मीटर लंबा पुल 6 सालों से अधूरा बना पड़ा है।
- स्कूली बच्चे उफनती पैरी नदी पार करने के लिए संकरी और फिसलन भरी लोहे की सीढ़ी चढ़ रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्कूली बच्चों की जान जोखिम में डालकर नदी पार करने के मामले में एनएचआरसी नोटिस जारी किया गया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस विषय को मानवाधिकारों का गंभीर हनन मानते हुए राज्य प्रशासन से जवाब मांगा है। आयोग ने मीडिया में आई खबरों के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया है। गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक में स्थित खंभाथा और आसपास की बस्तियों के दर्जनों बच्चों को हर रोज अपनी पढ़ाई के लिए उफनती नदी पार करनी पड़ती है। बच्चों के पास नदी पार करने का कोई सुरक्षित साधन नहीं है, जिससे हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
छत्तीसगढ़ में अधूरे पुल मामले में एनएचआरसी नोटिस का क्या है कारण?
एनएचआरसी नोटिस जारी होने की मुख्य वजह गरियाबंद के मैनपुर में बच्चों का पैरी नदी पार करने का खतरनाक तरीका है। छह साल से अधूरा पड़ा 300 मीटर लंबा पुल बच्चों के अधिकार और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुका है, जिस पर मानवाधिकार आयोग ने मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
पीआईबी के अनुसार, अगर मीडिया रिपोर्ट में दी गई बातें सच पाई जाती हैं, तो यह सीधे तौर पर मासूम बच्चों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। आयोग ने छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस भेजकर मामले की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। राज्य शासन को इस पूरे विषय पर अपना पक्ष रखने और सुधारात्मक कदमों की जानकारी देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है।
एनएचआरसी नोटिस और गरियाबंद का यह पूरा मामला क्या है?
मैनपुर ब्लॉक में देहरगुडा और खंभाथा गांवों के बीच पैरी नदी पर लगभग 300 मीटर लंबे पुल का निर्माण कार्य चल रहा है। यह निर्माण कार्य पिछले छह सालों से अधूरा पड़ा हुआ है। लगभग एक साल पहले संबंधित अधिकारियों ने ग्रामीणों को भरोसा दिया था कि अगले छह महीने के भीतर पुल का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बावजूद अब तक निर्माण पूरा नहीं हो सका है।
मानसून के मौसम में पैरी नदी का जलस्तर काफी बढ़ जाता है। नदी में उफान आने के कारण पानी उथले रास्तों के ऊपर से बहने लगता है। ऐसी स्थिति में खंभाथा और आसपास के छोटे टोलों के बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए इस अधूरे पुल का सहारा लेना पड़ता है। पुल से एक संकरी और अत्यधिक फिसलन भरी लोहे की सीढ़ी जुड़ी हुई है। स्कूली बच्चे रोज अपनी जान दांव पर लगाकर इस खतरनाक सीढ़ी पर चढ़ते हैं और फिर पैरी नदी पार करते हैं।
इस एनएचआरसी नोटिस के बाद प्रशासनिक स्तर पर खलबली मच गई है। सालों से निर्माण कार्य में हो रही देरी ने बच्चों के बुनियादी अधिकारों को खतरे में डाल दिया है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि शिक्षा प्राप्त करना हर बच्चे का अधिकार है, लेकिन स्कूल जाने के लिए इस तरह जान जोखिम में डालना प्रशासनिक अनदेखी को दिखाता है।
मानवाधिकार आयोग का स्वतः संज्ञान और कानूनी दायरा
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग मानव अधिकारों के संरक्षण अधिनियम के तहत काम करता है। जब भी देश के किसी भी हिस्से में मानवाधिकारों के हनन की कोई घटना सामने आती है, तो आयोग के पास समाचार माध्यमों की रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेने का अधिकार होता है। इस मामले में भी आयोग ने 3 सितंबर 2026 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के आधार पर कदम उठाया है।
इस एनएचआरसी नोटिस के तहत मुख्य सचिव से कई बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है:
- निर्माण में देरी: 300 मीटर लंबे पुल का निर्माण कार्य छह वर्षों से अधूरा क्यों पड़ा हुआ है?
- अधिकारियों की जवाबदेही: एक साल पहले छह महीने में काम पूरा करने का आश्वासन देने वाले अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की गई?
- सुरक्षा व्यवस्था: पुल बनने तक स्कूली बच्चों और ग्रामीणों के सुरक्षित आवागमन के लिए क्या अस्थायी इंतजाम किए गए हैं?
- समय सीमा: पुल के बाकी बचे निर्माण कार्य को कब तक पूरा कर लिया जाएगा?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्पष्ट किया है कि दो सप्ताह के भीतर मुख्य सचिव को इन तमाम बिंदुओं पर स्पष्टीकरण के साथ अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।
ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचे की सुस्त रफ्तार
छत्तीसगढ़ के दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का निर्माण कई बार अपेक्षित गति से नहीं हो पाता है। गरियाबंद का मैनपुर ब्लॉक ऐसा ही क्षेत्र है जहां विकास कार्य लंबे समय से अटके हुए हैं। मानसून के दौरान नदियां उफान पर होती हैं, और अगर पुल तैयार न हो तो कई बस्तियों का संपर्क टूट जाता है।
इस एनएचआरसी नोटिस के जरिए यह संदेश दिया गया है कि बुनियादी सुविधाओं में देरी केवल निर्माण कार्य का मामला नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। जब छोटे बच्चे पानी के तेज बहाव के बीच फिसलन भरी सीढ़ी पर चढ़ते हैं, तो एक छोटी सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि वे बार-बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला है।
एनएचआरसी नोटिस के बाद क्या कदम उठाए जाने की उम्मीद है?
जब मानवाधिकार आयोग किसी राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस भेजता है, तो राज्य प्रशासन को त्वरित कदम उठाने होते हैं। मुख्य सचिव गरियाबंद के जिला प्रशासन और संबंधित निर्माण विभाग से इस मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट मंगाएंगे।
इसके बाद शासन स्तर से पुल निर्माण के रुके हुए काम को तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया जा सकता है। जब तक 300 मीटर लंबा यह पुल पूरी तरह तैयार नहीं हो जाता, तब तक छात्रों के नदी पार करने के लिए कोई सुरक्षित वैकल्पिक इंतजाम किया जा सकता है। इस एनएचआरसी नोटिस का प्राथमिक उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद मामले में एनएचआरसी नोटिस क्यों जारी किया गया?
उत्तर: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गरियाबंद जिले के मैनपुर में स्कूली बच्चों द्वारा 6 साल से अधूरे पड़े पुल की फिसलन भरी लोहे की सीढ़ी से उफनती पैरी नदी पार करने की मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए एनएचआरसी नोटिस जारी किया है।
प्रश्न: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने किस अधिकारी से जवाब मांगा है?
उत्तर: आयोग ने छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
प्रश्न: मैनपुर ब्लॉक में बन रहा यह पुल कितने समय से अधूरा है?
उत्तर: देहरगुडा और खंभाथा के बीच पैरी नदी पर बन रहा लगभग 300 मीटर लंबा यह पुल पिछले छह वर्षों से अधूरा पड़ा हुआ है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






