
सीमित ओवरों के क्रिकेट में पावरप्ले के दौरान फील्डिंग पर पाबंदियां लागू होती हैं। जानिए वनडे और टी20 में इसके सभी नियम और रणनीति।
मुख्य बातें
- टी20 मैचों में शुरुआत के 6 ओवर पावरप्ले के होते हैं, जिसमें 30-यार्ड घेरे से बाहर केवल 2 फील्डर रह सकते हैं।
- वनडे मैचों में 50 ओवरों को तीन अलग-अलग पावरप्ले चरणों में बांटा गया है।
- पहला वनडे पावरप्ले (1 से 10 ओवर) अनिवार्य होता है जिसमें अधिकतम 2 खिलाड़ी घेरे से बाहर रहते हैं।
- पावरप्ले का मुख्य उद्देश्य शुरुआती ओवरों में आक्रामक बल्लेबाजी को बढ़ावा देना और मैच को रोमांचक बनाना है।
अगर आप क्रिकेट मैच देखते हैं और जानना चाहते हैं कि सीमित ओवरों के खेल में पावरप्ले क्या है, तो साधारण शब्दों में यह मैदान पर फील्डिंग की पाबंदियों की एक व्यवस्था है। इस नियम के तहत मैच के तय ओवरों के दौरान गेंदबाजी करने वाली टीम को 30-यार्ड के घेरे के अंदर अपने अधिकांश खिलाड़ियों को रखना अनिवार्य होता है। इससे बल्लेबाज़ों को खुले मैदान में आसानी से चौके और छक्के लगाने की छूट मिलती है।
पावरप्ले क्या है?
क्रिकेट के सीमित ओवरों वाले मैचों में पावरप्ले क्या है, इसका सीधा जवाब है – फील्डिंग पाबंदियों का एक ऐसा चरण जो बल्लेबाज़ों को शुरुआती ओवरों में आक्रामक शॉट खेलने का मौका देता है। पावरप्ले के दौरान 30-यार्ड सर्कल के बाहर बहुत कम फील्डर खड़े किए जा सकते हैं, जिससे बल्लेबाज़ बाउंड्री हासिल करने के लिए जोखिम उठाते हैं और मैच की शुरुआत ही आक्रामक होती है।
टी20 और वनडे में पावरप्ले क्या है और इसके नियम
टी20 और वनडे क्रिकेट दोनों में पावरप्ले लागू करने के तरीके अलग-अलग हैं। क्रिकेट के इन दोनों प्रारूपों में पावरप्ले के नियमों को नीचे विस्तार से समझाया गया है:
1. टी20 क्रिकेट में पावरप्ले के नियम
टी20 मैचों में कुल 20 ओवर होते हैं। टी20 में पावरप्ले क्या है, इसे समझना बहुत आसान है। इसमें पारी के शुरुआती 6 ओवर पावरप्ले के तहत आते हैं।
- फील्डिंग पाबंदी: शुरुआती 1 से 6 ओवर के दौरान केवल 2 फील्डर 30-यार्ड सर्कल के बाहर रह सकते हैं।
- 7 से 20 ओवर: पावरप्ले खत्म होने के बाद 30-यार्ड घेरे के बाहर अधिकतम 5 फील्डर खड़े किए जा सकते हैं।
2. वनडे क्रिकेट में पावरप्ले के नियम
प्रशंसक अक्सर पूछते हैं कि वनडे प्रारूप में पावरप्ले क्या है और यह टी20 से अलग कैसे है। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के नियमों के अनुसार 50 ओवर के वनडे मैच को तीन पावरप्ले चरणों में विभाजित किया गया है:
- पावरप्ले 1 (ओवर 1 से 10): यह अनिवार्य पावरप्ले है। इसमें 30-यार्ड घेरे के बाहर अधिकतम 2 फील्डर रह सकते हैं।
- पावरप्ले 2 (ओवर 11 से 40): इस चरण के दौरान 30-यार्ड घेरे के बाहर अधिकतम 4 फील्डर रखे जा सकते हैं।
- पावरप्ले 3 (ओवर 41 से 50): अंतिम 10 ओवरों में गेंदबाजी टीम 30-यार्ड घेरे के बाहर अधिकतम 5 फील्डर तैनात कर सकती है।
वनडे और टी20 पावरप्ले में अंतर
दोनों फॉर्मेट में नियमों का अंतर समझने के लिए यह तालिका देखें:
| क्रिकेट फॉर्मेट | पावरप्ले चरण | ओवर संख्या | घेरे के बाहर अधिकतम फील्डर |
|---|---|---|---|
| टी20 (T20I) | एकमात्र पावरप्ले | 1 से 6 ओवर | 2 खिलाड़ी |
| वनडे (P1) | पहला पावरप्ले | 1 से 10 ओवर | 2 खिलाड़ी |
| वनडे (P2) | दूसरा पावरप्ले | 11 से 40 ओवर | 4 खिलाड़ी |
| वनडे (P3) | तीसरा पावरप्ले | 41 से 50 ओवर | 5 खिलाड़ी |
पावरप्ले का इतिहास और इसे लागू करने की वजह
नियमों की शुरुआत से पहले सीमित ओवरों के मैचों में कप्तान शुरुआत से ही बाउंड्री रेखा पर फील्डर तैनात कर देते थे। इससे बल्लेबाज़ों के लिए बड़े शॉट खेलना मुश्किल हो जाता था और रन गति धीमी रहती थी। दर्शकों के लिए खेल को अधिक मनोरंजक और आक्रामक बनाने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में फील्डिंग पाबंदियां पेश की गईं।
साल 2005 में आईसीसी ने आधिकारिक तौर पर ‘पावरप्ले’ शब्द और इससे जुड़े नए नियमों की घोषणा की। समय के साथ इसमें कई बदलाव किए गए, जैसे बैटिंग पावरप्ले और बॉलिंग पावरप्ले को हटाकर 2015 में वनडे के लिए तीन स्थिर चरण तय किए गए।
पावरप्ले के दौरान टीमों की रणनीतियाँ
मैच का नतीजा तय करने में पावरप्ले का बहुत बड़ा योगदान होता है। दोनों टीमें इस दौरान अलग-अलग योजनाएं बनाती हैं:
बल्लेबाजी करने वाली टीम की रणनीति
सलामी बल्लेबाज 30-यार्ड घेरे के ऊपर से शॉट खेलकर तेजी से रन जुटाने की कोशिश करते हैं। पावरप्ले में तेजी से रन बनाने से आने वाले बल्लेबाजों पर से दबाव हट जाता है। हालांकि, ज्यादा जोखिम लेने के चक्कर में शुरुआती विकेट गिरने का खतरा भी बना रहता है।
गेंदबाजी करने वाली टीम की रणनीति
गेंदबाज आमतौर पर स्विंग गेंद डालने, सटीक लाइन-लेंथ बनाए रखने और फील्डरों के सीमित घेरे के बावजूद बल्लेबाज को चकमा देने की कोशिश करते हैं। पावरप्ले के दौरान विकेट हासिल करना विरोधी टीम की रन गति को धीमा करने का सबसे कारगर तरीका होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: वनडे मैच में पहला पावरप्ले क्या है?
उत्तर: वनडे मैच की पारी के शुरुआती 1 से 10 ओवर को पहला पावरप्ले (P1) कहा जाता है। इसमें 30-यार्ड घेरे के बाहर केवल 2 फील्डर रह सकते हैं।
प्रश्न 2: क्या टेस्ट क्रिकेट में भी पावरप्ले होता है?
उत्तर: नहीं, टेस्ट क्रिकेट में पावरप्ले का कोई नियम नहीं होता। कप्तान अपनी मर्जी के अनुसार मैदान पर कहीं भी फील्डिंग सजा सकता है।
प्रश्न 3: बारिश के कारण ओवर कम होने पर पावरप्ले कैसे तय होता है?
उत्तर: अगर बारिश या किसी कारणवश मैच के ओवर घटाए जाते हैं, तो मैच रेफरी और अंपायर कुल ओवरों के अनुपात में पावरप्ले के ओवरों की संख्या को भी कम कर देते हैं।
प्रश्न 4: टी20 में पावरप्ले के दौरान कितने फील्डर घेरे के बाहर रह सकते हैं?
उत्तर: टी20 मैचों में 1 से 6 ओवर के पावरप्ले के दौरान 30-यार्ड घेरे के बाहर अधिकतम 2 फील्डर रह सकते हैं।
यह लेख आज पत्रिका की एक्सप्लेनर डेस्क द्वारा सामान्य जागरूकता के लिए तैयार किया गया है। नियम और प्रक्रियाएं समय-समय पर बदल सकती हैं — कृपया आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें। सुधार/सुझाव: corrections@aajpatrika.com






