
क्रिकेट के सबसे लंबे फॉर्मेट यानी टेस्ट मैच में फॉलो-ऑन एक खास नियम है, जो खेल का रुख पूरी तरह बदल सकता है।
मुख्य बातें
- पांच दिन या उससे अधिक के टेस्ट मैच में फॉलो-ऑन के लिए 200 रन की बढ़त जरूरी होती है।
- तीन या चार दिन के मैच में यह अंतर 150 रन का होता है।
- यह फैसला पूरी तरह से पहली पारी में बढ़त हासिल करने वाली टीम के कप्तान पर निर्भर करता है।
- फॉलो-ऑन देने से गेंदबाजी करने वाली टीम के खिलाड़ियों को लगातार गेंदबाजी करनी पड़ती है।
फॉलो-ऑन क्या है
फॉलो-ऑन क्या है, यह क्रिकेट का वह नियम है जिसके तहत पहली पारी में भारी बढ़त हासिल करने वाली टीम, विपक्षी टीम को बिना अंतराल के लगातार दूसरी बार बल्लेबाजी करने के लिए आमंत्रित करती है। टेस्ट क्रिकेट में यह स्थिति तब बनती है जब मैच के शुरुआती चरणों में एक टीम बहुत कम स्कोर पर आउट हो जाती है और दूसरी टीम काफी आगे निकल जाती है।
क्रिकेट के नियमों के मुताबिक, पारंपरिक रूप से यह नियम मैच को समय पर समाप्त करने और ड्रा होने से बचाने के लिए बनाया गया था। जब स्कोर में बहुत बड़ा अंतर होता है, तो खेल को आगे बढ़ाने के लिए यह प्रावधान उपयोगी साबित होता है।
फॉलो-ऑन मिलने के नियम और रन का अंतर
फॉलो-ऑन क्या है और इसके लिए कितने रनों की जरूरत होती है, यह मैच के कुल दिनों पर निर्भर करता है। खेल के तय नियमों के अनुसार, अलग-अलग फॉर्मेट के लिए रन संख्या तय की गई है।
- पांच दिन या उससे अधिक के टेस्ट मैच में, पहली पारी में कम से कम 200 रन की बढ़त होनी चाहिए।
- तीन या चार दिन के प्रथम श्रेणी मैच में यह अंतर 150 रन का होता है।
- दो दिवसीय मैचों में 100 रन की बढ़त पर यह नियम लागू होता है।
- एक दिवसीय मैचों में फॉलो-ऑन का कोई प्रावधान नहीं होता है।
कप्तान का फैसला और रणनीतिक जोखिम
बढ़त हासिल करने वाली टीम के कप्तान के पास अधिकार होता है कि वह विपक्षी टीम को दोबारा बल्लेबाजी के लिए बुलाए या खुद बल्लेबाजी करने उतरे। हालांकि, यह फैसला हमेशा आसान नहीं होता है। कप्तान को कई बातों का ध्यान रखना पड़ता है।
अपने गेंदबाजों को लगातार गेंदबाजी करवाने से वे थक सकते हैं। मैच के चौथे या पांचवें दिन पिच खराब हो जाती है, जिससे आखिरी पारी में बल्लेबाजी करना काफी मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से कई बार कप्तान सुरक्षित रास्ता चुनते हैं और खुद दूसरी पारी में बल्लेबाजी करना पसंद करते हैं ताकि मैच बचाया जा सके या सुरक्षित स्कोर बनाया जा सके।
ऐतिहासिक महत्व और उपयोग
क्रिकेट इतिहास में कई ऐसे मैच हैं जहां फॉलो-ऑन मिलने के बाद भी पिछड़ने वाली टीम ने शानदार वापसी की है। साल 2001 में कोलकाता के ईडन गार्डन्स में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए ऐतिहासिक टेस्ट मैच का उदाहरण इसके लिए सबसे सटीक बैठता है।
फॉलो-ऑन मिलने के बाद वीवीएस लक्ष्मण और राहुल द्रविड़ की साझेदारी ने मैच का पासा पलट दिया था। ऐसी घटनाएं साबित करती हैं कि यह नियम न सिर्फ मैच की गति तय करता है, बल्कि खिलाड़ियों की मानसिक और शारीरिक मजबूती की भी कड़ी परीक्षा लेता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? क्या फॉलो-ऑन लेना अनिवार्य है?
उत्तर। नहीं, यह पहली पारी में बढ़त लेने वाली टीम के कप्तान की मर्जी पर निर्भर करता है।
प्रश्न? क्या सीमित ओवरों के मैच में फॉलो-ऑन होता है?
उत्तर। जी नहीं, यह नियम केवल टेस्ट और प्रथम श्रेणी क्रिकेट पर लागू होता है।
प्रश्न? फॉलो-ऑन के लिए न्यूनतम बढ़त कितनी चाहिए?
उत्तर। पांच दिवसीय टेस्ट मैच के लिए यह बढ़त 200 रनों की होनी चाहिए।
यह लेख आज पत्रिका की एक्सप्लेनर डेस्क द्वारा सामान्य जागरूकता के लिए तैयार किया गया है। नियम और प्रक्रियाएं समय-समय पर बदल सकती हैं — कृपया आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें। सुधार/सुझाव: corrections@aajpatrika.com






