
ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग द्वारा डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी) 3.0 के दिशानिर्देश गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को शाम 6:30 बजे आधिकारिक रूप से शुरू किए जाएंगे।
मुख्य बातें
- कार्यक्रम का वित्तीय परिव्यय 565.50 करोड़ रुपये है और यह 2026 से 2031 तक लागू रहेगा।
- हर भूभाग को 14 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या (यूनिवर्सल भू-आधार) दी जाएगी।
- 37.5 करोड़ रुपये खर्च कर 75 उप-पंजीयक कार्यालयों को आधुनिक पंजीकरण सेवा केंद्रों में बदला जाएगा।
- नक्शों का डिजिटलीकरण और एकीकृत राजस्व न्यायालय प्रणाली शुरू होगी।
डीआईएलआरएमपी 3.0 के तहत देश भर में भूमि प्रशासन को अधिक पारदर्शी और नागरिक-हितैषी बनाने की दिशा में ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग द्वारा नए दिशानिर्देश गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को शाम 6:30 बजे जारी किए जाएंगे। प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) के अनुसार, इस केंद्रीय क्षेत्र योजना का कुल अनुमानित वित्तीय परिव्यय 565.50 करोड़ रुपये रखा गया है, जिसे पांच साल की अवधि (2026-2031) के दौरान सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा।
डीआईएलआरएमपी 3.0 और भूमि अभिलेख सुधार की रूपरेखा
डीआईएलआरएमपी 3.0 के शुभारंभ के बाद भारत में भूमि रिकॉर्ड का आधुनिकीकरण नए स्तर पर पहुंचेगा। इस योजना के माध्यम से साधारण डिजिटल रिकॉर्ड रखने के बजाय एक व्यापक, जीआईएस-सक्षम ‘लैंड स्टैक’ स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है। यह डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मानचित्रों, भूमि स्वामित्व विवरण, संपत्ति पंजीकरण और अदालती मामलों को एक ही मंच पर जोड़ेगा।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला भूमि संसाधन विभाग इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए पूरी तरह तैयार है। पिछले चरणों की सफलता को आगे बढ़ाते हुए इस बार तकनीकी एकीकरण और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
डीआईएलआरएमपी 3.0 के मुख्य उपाय और डिजिटल पहल
- यूनिवर्सल भू-आधार (यूएलपीआईएन): देश के हर भूभाग को 14 अंकों की एक विशिष्ट पहचान संख्या प्रदान की जाएगी, जिससे संपत्ति की स्पष्ट और सुरक्षित पहचान हो सकेगी।
- मानचित्रों का डिजिटलीकरण: सटीक भौगोलिक निर्देशांकों के साथ भूमि पंजीकरण मानचित्रों का पूर्ण डिजिटलीकरण और भू-संदर्भन किया जाएगा।
- कागजी कार्रवाई रहित पंजीकरण: संपूर्ण ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली के साथ एक नया पंजीकरण भंडार बनाया जाएगा। इसके लिए 37.5 करोड़ रुपये के खर्च से 75 उप-पंजीयक कार्यालयों को आधुनिक ‘पंजीकरण सेवा केंद्रों’ में बदला जाएगा।
- एकीकृत राजस्व न्यायालय: विवादों पर नज़र रखने के लिए एक आधुनिक, कागज रहित केस प्रबंधन प्रणाली (आरसीसीएमएस) लाई जाएगी जो सीधे भूमि अभिलेखों से जुड़ी होगी।
इसका असर और नागरिकों को मिलने वाले लाभ
इस पूरी पहल का उद्देश्य ‘जीवन की सुगमता’ और ‘व्यापार करने की सुगमता’ को बढ़ावा देना है। एपीआई-आधारित सुरक्षित एकीकरण से नागरिकों को बार-बार सरकारी कार्यालयों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी। मंत्रालय उन्नत डीआईएलआरएमपी-एमआईएस डैशबोर्ड के जरिए इस पूरी प्रक्रिया की वास्तविक समय पर निगरानी करेगा, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी।
यह योजना विकसित भारत के दृष्टिकोण के तहत एक विश्वसनीय और भविष्य के लिए तैयार भूमि सूचना पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करेगी। इससे कानूनी लड़ाइयों में लगने वाले समय और लागत में भी भारी कमी आने की उम्मीद है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? डीआईएलआरएमपी 3.0 योजना कब शुरू होगी?
उत्तर। इस योजना के दिशानिर्देश 10 सितंबर 2026 को शाम 6:30 बजे आधिकारिक रूप से शुरू किए जाएंगे।
प्रश्न? इस योजना का कुल बजट कितना है?
उत्तर। इस पांच वर्षीय केंद्रीय क्षेत्र योजना का अनुमानित वित्तीय परिव्यय 565.50 करोड़ रुपये है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






