बुधवार, सितम्बर 9, 2026

राज्यसभा चुनाव कैसे होता है और सदस्य कैसे चुने जाते हैं?

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राज्यसभा चुनाव

जानिए राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया, वोटों की गिनती का कोटा फॉर्मूला, विधायकों का मतदान और सिंगल ट्रांसफरेबल वोट का पूरा गणित।

मुख्य बातें

  • राज्यसभा एक स्थायी सदन है जिसका कार्यकाल 6 साल का होता है और हर 2 साल में एक-तिहाई सदस्य रिटायर होते हैं।
  • राज्यसभा चुनाव में आम जनता नहीं, बल्कि राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक (MLA) वोट डालते हैं।
  • चुनाव एकल हस्तांतरणीय मत (Single Transferable Vote) और अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से होता है।
  • जीत के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को तय किया गया एक विशिष्ट वोट कोटा हासिल करना अनिवार्य होता है।

राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया में आम नागरिक सीधे मतदान नहीं करते, बल्कि जनता द्वारा चुने गए विधायक (MLA) वोट डालकर अपने राज्य के प्रतिनिधियों को संसद के उच्च सदन में भेजते हैं। संसद के संचालन और राज्यों के अधिकारों की रक्षा में यह प्रक्रिया मुख्य आधार मानी जाती है।

राज्यसभा चुनाव क्या है?

राज्यसभा चुनाव भारतीय संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा के सदस्यों का चयन करने की एक अप्रत्यक्ष निर्वाचन प्रक्रिया है। इसमें आम जनता वोट नहीं डालती, बल्कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक मतदान करते हैं। यह एक स्थायी सदन है जिसे कभी भंग नहीं किया जा सकता, और इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है।

राज्यसभा चुनाव की बुनियादी व्यवस्था और संरचना

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं। वर्तमान में इसकी स्वीकृत सदस्य संख्या 245 है। इन सदस्यों का बंटवारा दो श्रेणियों में होता है:

  • निर्वाचित सदस्य (233): राज्यों और दिल्ली, पुडुचेरी व जम्मू-कश्मीर जैसे केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं। किस राज्य में कितनी सीटें होंगी, यह वहां की आबादी के आधार पर तय होता है।
  • मनोनीत सदस्य (12): भारत के राष्ट्रपति द्वारा कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले नागरिकों को सीधे राज्यसभा में भेजा जाता है।

हर दो साल में राज्यसभा के एक-तिहाई सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो जाता है। खाली हुई इन सीटों के लिए चुनाव आयोजित किए जाते हैं। यही वजह है कि राज्यसभा का अस्तित्व कभी खत्म नहीं होता और इसे स्थायी सदन कहा जाता है।

लोकसभा और राज्यसभा चुनाव में मुख्य अंतर

विशेषतालोकसभा चुनावराज्यसभा चुनाव
मतदान प्रकारप्रत्यक्ष (जनता द्वारा)अप्रत्यक्ष (विधायकों द्वारा)
सदन का स्वरूपअस्थायी (5 वर्ष में भंग)स्थायी (कभी भंग नहीं होता)
सदस्य का कार्यकाल5 वर्ष6 वर्ष
न्यूनतम आयु सीमा25 वर्ष30 वर्ष
मतदान पद्धतिफर्स्ट पास्ट द पोस्टसिंगल ट्रांसफरेबल वोट (STV)

राज्यसभा चुनाव में वोट की गिनती और जीत का गणित

राज्यसभा चुनाव में केवल सबसे ज्यादा वोट पा लेना ही जीत की गारंटी नहीं होता। उम्मीदवार को जीतने के लिए एक तय वोट संख्या यानी ‘कोटा’ हासिल करना पड़ता है। इसे अनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल हस्तांतरणीय मत प्रणाली (Single Transferable Vote) कहते हैं।

जीत के लिए आवश्यक वोटों का कोटा तय करने का गणितीय फॉर्मूला इस प्रकार है:

जीत का कोटा = [(कुल वैध मतों का मान / (खाली सीटों की संख्या + 1)) + 1]

इस गणित को एक उदाहरण से समझें। मान लीजिए किसी राज्य में 4 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है और उस राज्य की विधानसभा में कुल 200 विधायक हैं:

  • कुल वैध मत = 200
  • खाली सीटें = 4
  • फॉर्मूले के अनुसार: 200 / (4 + 1) = 40
  • कोटा = 40 + 1 = 41

यानी इस उदाहरण में किसी भी प्रत्याशी को चुनाव जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोट पाना अनिवार्य होगा।

राज्यसभा चुनाव में वोट डालने का तरीका: वरीयता आधारित मतदान

राज्यसभा चुनाव में विधायक बैलेट पेपर पर किसी एक प्रत्याशी के आगे निशान नहीं लगाते। वे अपनी पसंद के अनुसार वरीयता (Preference) दर्ज करते हैं। विधायक अपनी पहली पसंद के आगे ‘1’, दूसरी पसंद के आगे ‘2’ और तीसरी पसंद के आगे ‘3’ लिखते हैं।

वोटों की गिनती के दौरान सबसे पहले पहली वरीयता (1st Preference) के वोटों को गिना जाता है। अगर किसी प्रत्याशी को तय कोटे के बराबर या उससे ज्यादा पहली पसंद के वोट मिल जाते हैं, तो उसे तुरंत विजयी घोषित कर दिया जाता है।

अगर पहली गिनती में सभी सीटें नहीं भर पाती हैं, तो सबसे कम पहली वरीयता वाले वोट पाने वाले उम्मीदवार को चुनाव की दौड़ से बाहर कर दिया जाता है। उसके मतों में दर्ज दूसरी वरीयता (2nd Preference) वाले वोटों को बचे हुए अन्य उम्मीदवारों के खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है। यह गिनती तब तक चलती है जब तक सभी सीटें भर न जाएं।

ओपन बैलेट सिस्टम क्या होता है?

वर्ष 2003 में राज्यसभा चुनाव के नियमों में संशोधन करके ‘ओपन बैलेट’ यानी खुला मतदान लागू किया गया। इसके तहत किसी पार्टी का विधायक अपना वोट डालकर मतपेटी में डालने से पहले अपनी राजनीतिक पार्टी के अधिकृत प्रतिनिधि (Authorized Agent) को दिखाता है।

यदि कोई विधायक अपनी पार्टी के एजेंट को बैलेट पेपर दिखाए बिना पेटी में डाल देता है या किसी अन्य को दिखाता है, तो उसका वोट अमान्य कर दिया जाता है। इस व्यवस्था की शुरुआत विधायकों द्वारा होने वाली क्रास-वोटिंग और पैसों के दम पर वोट बदलने की गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से की गई थी। हालांकि, निर्दलीय विधायकों पर यह शर्त लागू नहीं होती।

राज्यसभा चुनाव के लिए आवश्यक योग्यता और शर्तें

राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए उम्मीदवार में निम्नलिखित योग्यताओं का होना आवश्यक है:

  • वह भारत का नागरिक हो।
  • उम्मीदवार की आयु कम से कम 30 वर्ष पूरी हो चुकी हो।
  • वह केंद्र या किसी राज्य सरकार के अंतर्गत लाभ के पद पर न हो।
  • वह मानसिक रूप से स्वस्थ हो और न्यायालय द्वारा दिवालिया घोषित न किया गया हो।
  • उसका नाम देश के किसी भी संसदीय क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज हो।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: क्या आम नागरिक राज्यसभा चुनाव में सीधे वोट दे सकते हैं?
उत्तर: नहीं, आम नागरिक इसमें वोट नहीं डालते। जनता विधानसभा चुनाव में विधायकों को चुनती है, और निर्वाचित विधायक राज्यसभा चुनाव में हिस्सा लेते हैं।

प्रश्न 2: क्या राज्यसभा कभी भंग हो सकती है?
उत्तर: नहीं, राज्यसभा एक स्थायी सदन है। यह कभी भंग नहीं होती। इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में रिटायर होते हैं और उनकी जगह नए सदस्यों का चुनाव होता है।

प्रश्न 3: राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल कितना होता है?
उत्तर: राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है।

प्रश्न 4: क्या मनोनीत 12 सदस्यों को भी चुनाव लड़ना पड़ता है?
उत्तर: नहीं, मनोनीत सदस्यों का चुनाव नहीं होता। भारत के राष्ट्रपति साहित्य, कला, विज्ञान और समाज सेवा में विशेष योगदान देने वाले 12 व्यक्तियों को सीधे नामांकित करते हैं।

नोट: यह लेख केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षणिक समझ के लिए तैयार किया गया है। चुनाव नियमों, सीटों के आवंटन और ताजा अधिसूचनाओं की विस्तृत जानकारी के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की आधिकारिक वेबसाइट eci.gov.in पर जाएं।

आधिकारिक जानकारी और नवीनतम अपडेट के लिए: https://eci.gov.in

यह लेख आज पत्रिका की एक्सप्लेनर डेस्क द्वारा सामान्य जागरूकता के लिए तैयार किया गया है। नियम और प्रक्रियाएं समय-समय पर बदल सकती हैं — कृपया आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें। सुधार/सुझाव: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक मामलों के संपादक हैं। वे संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही, सरकारी नीतियों, चुनाव, और भारत से जुड़ी बड़ी राष्ट्रीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्य-आधारित, संतुलित और स्रोत-सहित रिपोर्टिंग पर रहता है — हर लेख में वे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), संबंधित मंत्रालयों की विज्ञप्तियों और आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हैं। राय और विश्लेषण को वे समाचार से स्पष्ट रूप से अलग रखते हैं। सुझाव या तथ्य-सुधार के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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