
प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में भारत सरकार बाजार से 7,86,000 करोड़ रुपये का कर्ज लेगी। यह प्रक्रिया 23 साप्ताहिक नीलामियों के जरिए पूरी की जाएगी।
मुख्य बातें
- वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही के लिए 7,86,000 करोड़ रुपये की उधारी तय की गई है।
- यह कुल बाजार उधारी 23 साप्ताहिक नीलामियों के माध्यम से पूरी होगी।
- आरबीआई ने दूसरी छमाही के लिए वेज एंड मीन एडवांस (डब्ल्यूएमए) की सीमा 50,000 करोड़ रुपये तय की है।
- तीसरी तिमाही में ट्रेजरी बिल के जरिए प्रति सप्ताह 23,000 करोड़ रुपये जुटाए जाने की उम्मीद है।
भारत सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ मिलकर वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही के लिए अपनी सरकारी उधारी योजना को अंतिम रूप दे दिया है। प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) के अनुसार, इस अवधि के दौरान सरकार बाजार से 7,86,000 करोड़ रुपये का कर्ज लेगी। सरकार का यह कदम वित्तीय वर्ष के बचे हुए महीनों में राजकोषीय प्रबंधन और विकास कार्यों के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाता है।
सरकारी उधारी योजना 2026-27 और कर्ज का पूरा गणित
भारत सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में ₹7,86,000 करोड़ का कुल बाजार से उधारी लक्ष्य 23 साप्ताहिक नीलामियों के माध्यम से पूरा किया जाएगा। यह उधारी 3, 5, 7, 10, 15, 30, 40 और 50 वर्षों की अवधि की प्रतिभूतियों में वितरित की जाएगी। वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान, भारत सरकार की ओर से तारीख वाली प्रतिभूतियों के माध्यम से कुल ₹15,99,506 करोड़ का बाजार से उधारी लेने की उम्मीद है, जबकि वित्त वर्ष के लिए बजट अनुमान ₹17,20,000 करोड़ का रखा गया था।
विभिन्न परिपक्वता अवधियों का आवंटन
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक विभिन्न अवधियों की प्रतिभूतियों में उधारी का हिस्सा अलग-अलग तय किया गया है ताकि बाजार में संतुलन बना रहे। एसजीआरबी सहित विभिन्न अवधियों के तहत उधारी का वितरण इस प्रकार है:
- 3- वर्षीय प्रतिभूतियां: 6.9% हिस्सा
- 5- वर्षीय प्रतिभूतियां: 12.1% हिस्सा
- 7- वर्षीय प्रतिभूतियां: 9.1% हिस्सा
- 10- वर्षीय प्रतिभूतियां: 26.3% हिस्सा
- 15- वर्षीय प्रतिभूतियां: 17.6% हिस्सा
- 30- वर्षीय प्रतिभूतियां: 9.2% हिस्सा
- 40- वर्षीय प्रतिभूतियां: 8.9% हिस्सा
- 50- वर्षीय प्रतिभूतियां: 9.9% हिस्सा
ग्रीनशू विकल्प और ट्रेजरी बिल की योजना
बाजार की मांग और स्थितियों को देखते हुए सरकार अपनी वित्तीय रणनीतियों में लचीलापन बनाए रखती है। सरकार प्रतिदान या रिडेंप्शन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए प्रतिभूतियों की अदला-बदली और वापसी करना जारी रखेगी। इसके अलावा, सरकार नीलामी अधिसूचनाओं में बताई गई प्रत्येक प्रतिभूति के एवज में ₹2,000 करोड़ तक की अतिरिक्त सदस्यता बनाए रखने के लिए ग्रीनशू विकल्प का प्रयोग करने का अधिकार सुरक्षित रखेगी। वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही के दौरान, सरकार की ओर से ट्रेजरी बिल जारी करके 13 नीलामी सप्ताहों में प्रति सप्ताह ₹23,000 करोड़ उधार लेने की उम्मीद है।
वेज एंड मीन एडवांस और इसका महत्व
सरकारी खातों में किसी भी प्रकार की अस्थायी नकदी की कमी या बेमेल को दूर करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की बड़ी भूमिका होती है। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही के लिए वेज एंड मीन एडवांस (डब्ल्यूएमए) की सीमा ₹50,000 करोड़ निर्धारित की है। डब्ल्यूएमए एक ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत केंद्रीय बैंक सरकारों को अस्थायी रूप से कर्ज देता है ताकि उनके नकदी प्रवाह में कोई बाधा न आए। इस बारे में अधिक और विस्तृत जानकारी वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक की आधिकारिक वेबसाइटों पर उपलब्ध प्रेस विज्ञप्तियों में देखी जा सकती है।
सरकारी उधारी योजना का अर्थव्यवस्था पर क्या असर होता है?
जब सरकार बाजार से बड़ा कर्ज उठाती है, तो इसका असर पूरे वित्तीय तंत्र पर देखने को मिलता है। इस योजना के तहत विभिन्न अवधियों के बॉन्ड जारी किए जाते हैं, जिनमें निवेश करने का मौका बैंकों, बीमा कंपनियों और बड़े संस्थागत निवेशकों को मिलता है। हालांकि, अत्यधिक सरकारी उधारी से बाजार में ब्याज दरों पर भी असर पड़ सकता है, जिसे नियंत्रित करने के लिए रिजर्व बैंक लगातार नजर बनाए रखता है। बजट अनुमानों के मुकाबले कम उधारी होना यह दर्शाता है कि सरकार के राजस्व संग्रह में सुधार हुआ है या खर्चों को बेहतर तरीके से प्रबंधित किया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही के लिए कुल कितनी उधारी तय की गई है?
उत्तर। पीआईबी के अनुसार, सरकार ने दूसरी छमाही (एच2) के लिए 7,86,000 करोड़ रुपये की उधारी तय की है।
प्रश्न? ट्रेजरी बिल के जरिए कितनी राशि जुटाने की योजना है?
उत्तर। तीसरी तिमाही के दौरान 13 नीलामी सप्ताहों में प्रति सप्ताह 23,000 करोड़ रुपये उधार लेने की उम्मीद है।
प्रश्न? डब्ल्यूएमए की सीमा क्या तय की गई है?
उत्तर। आरबीआई ने दूसरी छमाही के लिए वेज एंड मीन एडवांस की सीमा 50,000 करोड़ रुपये निर्धारित की है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






