
भारतीय रिज़र्व बैंक ने देश भर के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के लिए रूरल कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे के नए दौर का आगाज कर दिया है।
मुख्य बातें
- आरबीआई ने सितंबर 2026 के रूरल कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे की शुरुआत की है।
- यह सर्वेक्षण देश के 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलाया जा रहा है।
- इप्सोस रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड, गुरुग्राम को इस सर्वेक्षण को पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
- इस प्रक्रिया के नतीजे देश की मौद्रिक नीति तैयार करने में उपयोगी इनपुट प्रदान करते हैं।
भारतीय रिज़र्व बैंक के अनुसार, देश की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की वित्तीय स्थिति का आकलन करने के लिए रूरल कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे का सितंबर 2026 दौर शुरू कर दिया गया है। यह सर्वेक्षण ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में रहने वाले परिवारों के अनुभवों और उम्मीदों को दर्ज करने का एक नियमित प्रयास है। मौद्रिक नीति तय करने से पहले केंद्रीय बैंक इस तरह के डेटा का गहराई से अध्ययन करता है ताकि जमीनी हकीकत का पता चल सके।
रूरल कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे के बारे में जानिए
रूरल कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे ग्रामीण भारत के आर्थिक मिजाज को समझने का एक प्रमुख पैमाना है। इस सर्वेक्षण के जरिए देश भर के परिवारों से सामान्य आर्थिक स्थिति, रोजगार के अवसरों, महंगाई और कीमतों की स्थिति, उनकी अपनी आय तथा खर्च के पैटर्न पर राय ली जाती है। इसमें न केवल वर्तमान समय की धारणाओं को परखा जाता है, बल्कि आने वाले एक साल के बाद की उम्मीदों का भी आकलन किया जाता है। केंद्रीय बैंक इस प्रक्रिया को नियमित रूप से आयोजित करता आ रहा है ताकि नीतिगत फैसले लेने में आसानी हो।
किन राज्यों और क्षेत्रों को किया गया है शामिल
पीआईबी के अनुसार, सितंबर 2026 के इस दौर का दायरा देश के 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक फैला हुआ है। इसमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, दिल्ली, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, लद्दाख, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्र शामिल हैं। इन सभी जगहों से परिवारों के विचार जुटाए जाएंगे ताकि व्यापक आंकड़े तैयार हो सकें।
सर्वेक्षण प्रक्रिया और एजेंसी की भूमिका
इस बार के सर्वेक्षण को संचालित करने के लिए इप्सोस रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड, गुरुग्राम को अधिकृत किया गया है। बैंक द्वारा चुनिंदा परिवारों से संपर्क किया जाएगा और उनसे प्रामाणिक जानकारी साझा करने का अनुरोध किया जाएगा। इसके अलावा, जिन लोगों से एजेंसी सीधे संपर्क नहीं करती है, वे भी इस रूरल कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे में स्वेच्छा से भाग ले सकते हैं। इसके लिए निर्धारित फॉर्म को भरकर ईमेल के माध्यम से संबंधित विभाग तक भेजा जा सकता है, जिससे किसी भी नागरिक की आवाज दबने न पाए।
- सर्वेक्षण का दौर: सितंबर 2026
- जिम्मेदार एजेंसी: इप्सोस रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड, गुरुग्राम
- शामिल क्षेत्र: 31 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश
- मुख्यालय संपर्क: मुंबई स्थित आरबीआई का सांख्यिकी और सूचना प्रबंधन विभाग
आम जनता के लिए इसका क्या महत्व है
किसी भी देश की केंद्रीय बैंक के लिए यह जानना बेहद जरूरी होता है कि आम उपभोक्ता अर्थव्यवस्था को लेकर कैसा महसूस कर रहा है। यदि ग्रामीण इलाकों में उपभोक्ता का आत्मविश्वास मजबूत होता है, तो बाजार में मांग बढ़ती है और आर्थिक पहिया तेजी से घूमता है। इसके विपरीत, यदि चिंताएं अधिक होती हैं, तो मौद्रिक समीक्षा के दौरान ब्याज दरों और अन्य नीतियों में तदनुसार बदलाव किए जाते हैं। इस प्रकार, यह अध्ययन सीधे तौर पर देश की वित्तीय दिशा और आम आदमी के जीवन को प्रभावित करने वाले नीतिगत निर्णयों से जुड़ा हुआ है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? रूरल कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे का मुख्य उद्देश्य क्या है? उत्तर। इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और अर्ध-शहरी परिवारों की वर्तमान आर्थिक स्थिति और भविष्य की उम्मीदों का डेटा जुटाना है, जो मौद्रिक नीति में मदद करता है।
प्रश्न? क्या इस सर्वेक्षण में कोई भी आम नागरिक भाग ले सकता है? उत्तर। हां, जिन लोगों से एजेंसी संपर्क नहीं करती, वे भी लिंक किए गए शेड्यूल के जरिए अपने जवाब ईमेल करके इस प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं।
यह रिपोर्ट RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






