बुधवार, सितम्बर 9, 2026

नशामुक्ति उपचार से बदली निखिल की जिंदगी, पथानामथिट्टा के युवक की प्रेरणादायक कहानी

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नशामुक्ति उपचार

केरल के पथानामथिट्टा के रहने वाले 30 वर्षीय निखिल ने एनएपीडीडीआर के तहत मिले निःशुल्क नशामुक्ति उपचार से अपनी जिंदगी को एक नई दिशा दी है।

मुख्य बातें

  • केरल के पथानामथिट्टा के 30 वर्षीय निखिल एच. ने नशे की लत से सफलतापूर्वक छुटकारा पाया है।
  • उन्हें नेशनल एक्शन प्लान फॉर ड्रग डिमांड रिडक्शन (एनएपीडीडीआर) के तहत सहायता मिली।
  • पथानामथिट्टा स्थित गांधीभवन इंटीग्रेटेड रिहैबिलिटेशन सेंटर फॉर एडिक्ट्स (आईआरसीए) में 17 मई 2025 से उपचार शुरू हुआ था।
  • निखिल को केंद्र में निःशुल्क आवासीय उपचार, मनोवैज्ञानिक परामर्श और पुनर्वास सहायता प्रदान की गई।

नशामुक्ति उपचार की बदौलत केरल के एक युवक ने कठिन परिस्थितियों और नशे की गिरफ्त से बाहर निकलकर एक नई जिंदगी की शुरुआत की है। पीआईबी के अनुसार, सही समय पर मिली चिकित्सीय देखभाल और दृढ़ इच्छाशक्ति से कोई भी व्यक्ति अपने जीवन को फिर से पटरी पर ला सकता है।

नशामुक्ति उपचार ने कैसे बदली निखिल की जिंदगी

नशामुक्ति उपचार ने जीवन को नए सिरे से जीने की उम्मीद जगा दी है। केरला के पथानामथिट्टा जिले के रहने वाले 30 वर्षीय निखिल एच. (बदला हुआ नाम) ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन से यह साबित कर दिखाया है। हाई-स्कूल तक पढ़े और पार्ट-टाइम काम करने वाले निखिल का सपना हमेशा से एक स्थायी नौकरी पाना और अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य बनाना रहा है।

बचपन में महज चार साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता को खो दिया था, जिसके बाद उनकी माँ ने परिवार की पूरी जिम्मेदारी संभाली। मुश्किल परिस्थितियों और व्यक्तिगत चुनौतियों के कारण निखिल नशे की गिरफ्त में आ गए थे, जिससे उनका स्वास्थ्य और जीवन दोनों बुरी तरह प्रभावित हुए थे। समय रहते मदद मिलने पर उन्होंने अपनी इस आदत से बाहर निकलने का फैसला किया।

एनएपीडीडीआर योजना और पुनर्वास केंद्र की भूमिका

नशामुक्ति उपचार के तहत उन्हें नेशनल एक्शन प्लान फॉर ड्रग डिमांड रिडक्शन (एनएपीडीडीआर) यानी मादक पदार्थों की मांग में कमी के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना से मदद मिली। पथानामथिट्टा स्थित गांधीभवन इंटीग्रेटेड रिहैबिलिटेशन सेंटर फॉर एडिक्ट्स (आईआरसीए) ने इसमें अहम भूमिका निभाई। इस केंद्र में 17 मई 2025 से उन्हें निःशुल्क आवासीय उपचार और मनोवैज्ञानिक परामर्श दिया गया।

केंद्र के अनुशासित माहौल और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से निखिल ने तनाव से निपटने के स्वस्थ तरीके सीखे। आज वह पूरी तरह से सुरक्षित और स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। इस प्रकार की सरकारी योजनाएं समाज में बड़ा बदलाव लाने का काम करती हैं और जरूरतमंदों को मुख्यधारा से जोड़ती हैं।

  • केरल के पथानामथिट्टा में 17 मई 2025 से शुरू हुआ था आवासीय उपचार।
  • एनएपीडीडीआर योजना के अंतर्गत दी गई निःशुल्क चिकित्सा और काउंसलिंग।
  • गांधीभवन आईआरसीए केंद्र द्वारा प्रदान किया गया निरंतर सहयोग।
  • निखिल अब आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न? निखिल को किस योजना के तहत सहायता मिली?

उत्तर। निखिल को नेशनल एक्शन प्लान फॉर ड्रग डिमांड रिडक्शन (एनएपीडीडीआर) के तहत सहायता मिली।

प्रश्न? यह उपचार किस केंद्र में और कब शुरू हुआ था?

उत्तर। यह उपचार पथानामथिट्टा स्थित गांधीभवन इंटीग्रेटेड रिहैबिलिटेशन सेंटर फॉर एडिक्ट्स (आईआरसीए) में 17 मई 2025 से शुरू हुआ था।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक मामलों के संपादक हैं। वे संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही, सरकारी नीतियों, चुनाव, और भारत से जुड़ी बड़ी राष्ट्रीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्य-आधारित, संतुलित और स्रोत-सहित रिपोर्टिंग पर रहता है — हर लेख में वे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), संबंधित मंत्रालयों की विज्ञप्तियों और आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हैं। राय और विश्लेषण को वे समाचार से स्पष्ट रूप से अलग रखते हैं। सुझाव या तथ्य-सुधार के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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