
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने फरीदाबाद में आयोजित राष्ट्रीय महिला आयोग के कार्यक्रम में कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण ऐतिहासिक जरूरत है।
मुख्य बातें
- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने फरीदाबाद में राष्ट्रीय महिला आयोग के कार्यक्रम को संबोधित किया।
- उन्होंने लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को ऐतिहासिक आवश्यकता बताया।
- कार्यक्रम में 20 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों की लगभग 200 महिला विधायक शामिल हुईं।
- हरियाणा के राज्य मंत्री राजेश नागर और NCW अध्यक्ष विजया रहाटकर भी इस अवसर पर मौजूद रहे।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने महिला आरक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की मजबूत भागीदारी देश के भविष्य को तय करती है। पीआईबी के अनुसार, उन्होंने हरियाणा के फरीदाबाद में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) द्वारा आयोजित ‘लिंग-उत्तरदायी शासन’ विषय पर दो दिवसीय अखिल भारतीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम में देश भर से महिला जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और नेतृत्व के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
महिला आरक्षण से देश में खुलेगी नेतृत्व की नई राह
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने के प्रावधानों को लोकसभा अध्यक्ष ने एक ऐतिहासिक आवश्यकता बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक जीवन और विभिन्न पेशों में महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति से वह दिन दूर नहीं जब देश का 50 प्रतिशत नेतृत्व महिलाओं के हाथों में होगा। समाज की आधी आबादी आने वाले समय में राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक हर मोर्चे पर आगे आएगी।
कानून निर्माण में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी
पीआईबी रिपोर्ट के मुताबिक, श्री बिरला ने जोर देकर कहा कि अब सरकार और समाज का ध्यान केवल महिलाओं को सहायता देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके बजाय उन्हें नीतियां, कार्यक्रम और कानून बनाने की प्रक्रिया में सीधे तौर पर शामिल करना जरूरी है। महिला विधायक पंचायतों से लेकर संसद तक के मंचों के जरिए जमीनी हकीकत को कानूनों में ढालने में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं।
- फरीदाबाद में आयोजित हुई दो दिवसीय अखिल भारतीय क्षमता निर्माण कार्यशाला।
- राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्ष विजया रहाटकर कार्यक्रम में रहीं मौजूद।
- हरियाणा सरकार के राज्य मंत्री राजेश नागर ने भी कार्यक्रम में शिरकत की।
- 20 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों की लगभग 200 महिला विधायक हुईं शामिल।
आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण क्यों है जरूरी
देश की आधी आबादी के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के बिना भारत के विकसित राष्ट्र बनने का सपना पूरा नहीं हो सकता। हर महिला के पास रोजगार और आर्थिक स्वतंत्रता के पुख्ता अवसर होने चाहिए। कार्यशाला के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर चर्चा की कि कैसे कठिनाइयों का सामना कर रही महिलाओं को मजबूत बनाया जाए और संस्थागत तंत्र के प्रति उनमें जागरूकता बढ़ाई जाए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? फरीदाबाद में आयोजित कार्यशाला का विषय क्या था?
उत्तर। इस दो दिवसीय अखिल भारतीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का मुख्य विषय ‘लिंग-उत्तरदायी शासन’ (Gender-Responsive Governance) था।
प्रश्न? इस कार्यक्रम का आयोजन किसने किया था?
उत्तर। इस कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) द्वारा किया गया था।
प्रश्न? कार्यक्रम में कितने राज्यों की महिला विधायकों ने हिस्सा लिया?
उत्तर। इस कार्यशाला में 20 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों की लगभग 200 महिला विधायकों ने भाग लिया।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






